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क्या सिर्फ 12 घंटे की ओवरनाइट फास्टिंग से घट सकता है वजन, वेट लॉस से लेकर मेटाबॉलिज्म तक पर कैसा होता है असर, डायटीशियन से जानिए..

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बढ़ता वजन कई क्रॉनिक बीमारियों जैसे डायबिटीज, ब्लड प्रेशर,थायराइड और दिल के रोगों का जोखिम पैदा कर सकता है, इसलिए हर उम्र में वजन को कंट्रोल रखना बेहद जरूरी है। वजन को कंट्रोल रखने के लिए डाइट का ध्यान रखना, बॉडी को एक्टिव रखना और तनाव को कंट्रोल करना बेहद जरूरी है। डाइट में जंक फूड,फास्ट फूड,फ्रोजन फूड,लेट नाइट स्नैकिंग हमारा वेट गेन करने में अहम रोल निभाती है। फिटनेस फ्रीक लोगों में वजन घटाने के कई ट्रेंड चलन में है जैसे इंटरमिटेंट फास्टिंग, 12-घंटे ओवरनाइट फास्टिंग,टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग, कैलोरी डेफिसिट डाइट, हाई-प्रोटीन डाइट, लो-कार्ब डाइट, कीटो , DASH और मेडिटेरेनियन डाइट समेत 15 से 20 तरीके लोग वेट लॉस करने में ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इन सब में आजकल लोग 12 घंटे की ओवरनाइट फास्टिंग पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। डाइट और न्यूट्रिशन विशेषज्ञों के अनुसार, 12 घंटे का यह सिंपल गैप न केवल वजन कंट्रोल करने में मदद कर सकता है, बल्कि आपके मेटाबॉलिज्म को भी दुरुस्त रखता है। आइए डायटीशियन से जानते हैं कि ओवरनाइट फास्टिंग आपके शरीर पर कैसे काम करती है और किसे इसे अपनाना चाहिए।

बढ़ता वजन कई क्रॉनिक बीमारियों जैसे डायबिटीज, ब्लड प्रेशर,थायराइड और दिल के रोगों का जोखिम पैदा कर सकता है, इसलिए हर उम्र में वजन को कंट्रोल रखना बेहद जरूरी है। वजन को कंट्रोल रखने के लिए डाइट का ध्यान रखना, बॉडी को एक्टिव रखना और तनाव को कंट्रोल करना बेहद जरूरी है। डाइट में जंक फूड,फास्ट फूड,फ्रोजन फूड,लेट नाइट स्नैकिंग हमारा वेट गेन करने में अहम रोल निभाती है। फिटनेस फ्रीक लोगों में वजन घटाने के कई ट्रेंड चलन में है जैसे इंटरमिटेंट फास्टिंग, 12-घंटे ओवरनाइट फास्टिंग,टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग, कैलोरी डेफिसिट डाइट, हाई-प्रोटीन डाइट, लो-कार्ब डाइट, कीटो , DASH और मेडिटेरेनियन डाइट समेत 15 से 20 तरीके लोग वेट लॉस करने में ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इन सब में आजकल लोग 12 घंटे की ओवरनाइट फास्टिंग पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। डाइट और न्यूट्रिशन विशेषज्ञों के अनुसार, 12 घंटे का यह सिंपल गैप न केवल वजन कंट्रोल करने में मदद कर सकता है, बल्कि आपके मेटाबॉलिज्म को भी दुरुस्त रखता है। आइए डायटीशियन से जानते हैं कि ओवरनाइट फास्टिंग आपके शरीर पर कैसे काम करती है और किसे इसे अपनाना चाहिए।

ओवरनाइट फास्टिंग से क्या मतलब है?

ओवरनाइट फास्टिंग का मतलब है रात का खाना खाने के बाद अगले दिन नाश्ता करने तक कुछ भी कैलोरी वाली चीज़ न खाना। यानी रात और सुबह के बीच के समय में खाने से परहेज करना, जैसे रात 8:00 बजे डिनर किया। इसके बाद रातभर कुछ नहीं खाया सिर्फ पानी, बिना चीनी की चाय या ब्लैक कॉफी लिया। अगले दिन सुबह 8:00 बजे नाश्ता किया। इस तरह डिनर और ब्रेकफास्ट के बीच 12 घंटे का अंतर ही 12-घंटे की ओवरनाइट फास्टिंग कहलाता है। यह इंटरमिटेंट फास्टिंग का सबसे आसान और व्यावहारिक रूप माना जाता है, क्योंकि इसमें आपको पूरे दिन भूखे रहने की जरूरत नहीं होती। इसका मुख्य उद्देश्य देर रात की स्नैकिंग से बचना और शरीर को रात में भोजन पचाने तथा आराम करने का पर्याप्त समय देना है।

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12 घंटों की फास्टिंग कैसे वजन घटाने में मदद करती है?

इंटरमिटेंट फास्टिंग आजकल वजन घटाने के सबसे लोकप्रिय तरीकों में से एक बन चुकी है। कुछ  लोग 14 घंटे का उपवास और 10 घंटे का खाने का समय रखते हैं तो कुछ लोग 16 घंटे का उपवास और 8 घंटे के खाने के समय जैसा पैटर्न अपनाते हैं। हालांकि ये तरीके हर किसी के लिए जरूरी या व्यावहारिक नहीं होते। असल में रात के खाने और अगले दिन के नाश्ते के बीच सिर्फ 12 घंटे का अंतर रखना भी सेहत के लिहाज से फायदेमंद हो सकता है। यदि इसे संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद के साथ अपनाया जाए, तो यह लंबे समय तक हेल्दी तरीके से वजन कंट्रोल रखने में मदद कर सकता है। इस तरह की फास्टिंग का उद्देश्य शरीर को भूखा रखना नहीं है, बल्कि पाचन तंत्र को आराम देना, शरीर की सामान्य मेटाबॉलिक प्रक्रियाओं को सुचारु रूप से काम करने का समय देना और नियमित खानपान की आदत विकसित करना है, जिसे लंबे समय तक आसानी से अपनाया जा सके।

12 घंटों की फास्टिंग करने से सेहत को कौन-कौन से होते हैं फायदे

  1. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक इस लेख को लिखने वाली क्लीनिकल डायटीशियन बताती है कि जब भी हम कुछ खाते हैं, शरीर इंसुलिन नामक हार्मोन रिलीज करता है, जो खून में मौजूद ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाकर ऊर्जा बनाने में मदद करता है। अगर आप बार-बार स्नैकिंग करते हैं या देर रात तक खाते रहते हैं, तो इंसुलिन का स्तर लंबे समय तक ऊंचा बना रहता है। इससे शरीर को भोजन पचाने और जमा ऊर्जा का उपयोग करने के बीच संतुलन बनाने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।
  2. 12 घंटे की ओवरनाइट फास्टिंग के दौरान भोजन पचने के बाद इंसुलिन का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है। हालांकि यह बदलाव लंबी अवधि की फास्टिंग जितना गहरा नहीं होता, फिर भी इससे शरीर को जमा ऊर्जा का उपयोग करने का मौका मिलता है और समय के साथ ऊर्जा संतुलन बेहतर हो सकता है।
  3. 12 घंटों की फास्टिंग शरीर की जैविक घड़ी (Circadian Rhythm) के अनुरूप काम करती है। हमारे शरीर का मेटाबॉलिज्म 24 घंटे की प्राकृतिक जैविक घड़ी यानी सर्कैडियन रिद्म के अनुसार काम करता है। कई रिसर्च में ये बात सामने आ चुकी है कि शरीर दिन के शुरुआती समय में भोजन को देर रात की तुलना में अधिक प्रभावी ढंग से पचाता और उपयोग करता है। अगर आप रात का खाना शाम 7:30 से 8 बजे तक खा लेते हैं और लगभग 12 घंटे बाद नाश्ता करते हैं, तो यह शरीर की प्राकृतिक लय के अनुरूप होता है। इसके विपरीत, देर रात खाना खाने से ब्लड शुगर कंट्रोल बिगड़ सकता है, कैलोरी की मात्रा बढ़ सकती है और नींद प्रभावित हो सकती है। ये सभी कारण धीरे-धीरे वजन बढ़ने का जोखिम बढ़ाते हैं।
  4. अधिकांश लोगों में वजन बढ़ने की बड़ी वजह मुख्य भोजन नहीं, बल्कि रात के खाने के बाद की स्नैकिंग, मीठे ड्रिंक और टीवी देखते समय बिना सोचे-समझे खाना होता है। 12 घंटे की ओवरनाइट फास्टिंग इस आदत को अपने आप सीमित कर देती है। कई लोगों को इससे सुबह पेट हल्का महसूस होता है और गैस, एसिडिटी व भारीपन जैसी समस्याओं में भी राहत मिल सकती है।
  5. बहुत लंबे समय तक उपवास रखने से कुछ लोगों को अत्यधिक भूख, थकान या सामाजिक गतिविधियों में असुविधा महसूस हो सकती है, जिससे बाद में जरूरत से ज्यादा खाने का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन 12 घंटे की ओवरनाइट फास्टिंग छात्रों, नौकरीपेशा लोगों, माता-पिता और बुजुर्गों सहित अधिकांश लोगों की दिनचर्या में आसानी से फिट हो जाती है। वजन कंट्रोल रखने के लिए लंबे समय तक अपनाई जा सकने वाली आदतें अक्सर कठोर नियमों से अधिक प्रभावी साबित होती हैं।
  6. 12 घंटों की फास्टिंग मेटाबॉलिक हेल्थ में सुधार करती है।  ओवरनाइट फास्टिंग के फायदे केवल वजन घटाने तक सीमित नहीं हैं बल्कि इससे इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर हो सकती है, ब्लड शुगर कंट्रोल में सुधार आ सकता है और संपूर्ण मेटाबॉलिक हेल्थ को स्पोर्ट मिल सकती है। ये फायदे विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकते हैं जो मोटापे, प्रीडायबिटीज या मेटाबॉलिक सिंड्रोम से जूझ रहे हैं। डायटीशियन के मुताबिक फास्टिंग को किसी चमत्कारी उपाय के हेल्दी लाइफस्टाइल का एक हिस्सा ही माना जाना चाहिए।
  7. फास्टिंग का मतलब यह नहीं कि खाने के समय आप कुछ भी खा लें। आपको फास्टिंग के साथ ही हेल्दी डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना भी जरूरी है। भोजन में सब्जियां, फल, साबुत अनाज, लीन प्रोटीन, हेल्दी फैट और फाइबर शामिल करना जरूरी है। ये डाइट लंबे समय तक पेट भरा रखती हैं, ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने में मदद करती हैं और शरीर को जरूरी पोषक तत्व प्रदान करती हैं। इसके विपरीत, तली-भुनी चीजें, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, मीठे पेय और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन फास्टिंग के फायदों को कम कर सकता है। इसके साथ ही, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है। इससे पाचन बेहतर रहता है, शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और अनावश्यक भूख कम लग सकती है।

किन लोगों को फास्टिंग से बचना चाहिए?

हालांकि 12 घंटे की ओवरनाइट फास्टिंग अधिकांश हेल्दी लोगों के लिए सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन यह हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं है। इन लोगों को फास्टिंग शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए

  • गर्भवती महिलाएं
  • स्तनपान कराने वाली महिलाएं
  • किशोर, जिनकी पोषण संबंधी जरूरतें अधिक होती हैं
  • डायबिटीज की दवा लेने वाले लोग
  • ईटिंग डिसऑर्डर का इतिहास रखने वाले लोग
  • किसी गंभीर या पुरानी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति

इंटरमिटेंट फास्टिंग के फायदे पाने के लिए जरूरी नहीं कि आप 16 घंटे तक उपवास करें। कई लोगों के लिए रात के खाने और नाश्ते के बीच 12 घंटे का अंतर रखना ही एक आसान, व्यावहारिक और लंबे समय तक अपनाई जा सकने वाली आदत है।

डिस्क्लेमर: – यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी तरह से पेशेवर चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। किसी भी तरह का डाइट प्लान, फास्टिंग या लाइफस्टाइल में बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर या डायटीशियन से परामर्श अवश्य लें। स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों के आधार पर इसके परिणाम अलग-अलग हो सकते हैं।

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