
गलत खान-पान, अनियमित खानेका समय, ज्यादा तला-भुना भोजन और खराब लाइफस्टाइल के कारण गैस, अपच और पेट फूलने जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। ऐसे में कुछ लोग घरेलू उपायों का सहारा लेते हैं। अजवाइन का पानी भी ऐसा ही एक पारंपरिक घरेलू नुस्खा है, जिसका इस्तेमाल लंबे समय से पाचन संबंधी परेशानियों में किया जाता रहा है। योग और वेलनेस एक्सपर्ट हंसाजी योगेंद्र के अनुसार, अजवाइन में थाइमोल (Thymol) जैसे यौगिक पाए जाते हैं, जो पाचन तंत्र पर असर डाल सकते हैं, पेट की ऐंठन या असहजता में मदद कर सकते हैं।
हंसाजी योगेंद्र ने बताया ये पानी पेट की गैस और ब्लोटिंग को कंट्रोल करता है। अजवाइन में मौजूद कुछ सक्रिय यौगिक पाचन प्रक्रिया को सपोर्ट कर सकते हैं, जिससे कुछ लोगों को गैस और ब्लोटिंग में राहत महसूस हो सकती है। अजवाइन में पाया जाने वाला थाइमोल इसके प्रमुख सक्रिय यौगिकों में से एक है जो पाचन को सपोर्ट करता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि अजवाइन का पानी कैसे पाचन को दुरुस्त करता है।
अजवाइन का पानी कैसे गैस, ब्लोटिंग और भारीपन में देता है राहत
अजवाइन में मौजूद कुछ यौगिक पाचन प्रक्रिया को सपोर्ट कर सकते हैं। इसका पानी गैस और पेट फूलने जैसी पाचन से जुड़ी दिक्कतों में राहत दे सकता है। खासकर भारी खाना खाने के बाद अजवाइन का सेवन पेट के भारीपन को कम करने में मददगार माना जाता है। अजवाइन का इस्तेमाल पेट में होने वाली हल्की ऐंठन और मरोड़ के लिए भी घरेलू उपाय के तौर पर किया जाता है। इसमें मौजूद कुछ यौगिक पाचन तंत्र की मांसपेशियों को रिलैक्स करने में मदद कर सकते हैं। अजवाइन में मौजूद थाइमोल जैसे यौगिकों में एंटीमाइक्रोबियल गुण पाए गए हैं। कई रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि ये पानी पेट में मौजूद हानिकारक सूक्ष्मजीवों के खिलाफ प्रभावी असर दिखाता है।
अजवाइन के पानी पर क्या कहती है रिसर्च
अजवाइन में थाइमोल और गैस्ट्रिक एंजाइम का स्राव होता है। फार्माकोलॉजिकल स्टडीज जैसे Journal of Ethnopharmacology और Evidence Based Complementary and Alternative Medicine के अनुसार थाइमोल पेट में Gastric Acid, पित्त और पाचन एंजाइमों जैसे एमाइलेज और लाइपेज के स्राव को उत्तेजित करता है। जब एंजाइम सही मात्रा में बनते हैं, तो खाना तेजी से और ठीक से पचता है, जिससे भोजन सड़ता नहीं है और गैस या पेट फूलने की समस्या नहीं बनती।
अजवाइन में एंटीस्पास्मोडिक और कार्मिनेटिव गुण मौजूद होते हैं जो गैस बाहर निकालने वाले माने जाते हैं। लैब अध्ययनों और इन-विवो (In-vivo) स्टडीज से पता चला है कि थाइमोल आंतों की चिकनी मांसपेशियों पर कैल्शियम चैनल ब्लॉक करने का काम करता है। इससे पेट और आंतों की मांसपेशियों में आने वाली ऐंठन, मरोड़ और ब्लोटिंग दूर होती है। इसका सेवन करने से पेट में फंसी हुई गैस आसानी से बाहर निकल जाती है और पेट का भारीपन व ऐंठन मिनटों में कम हो जाती है।
अजवाइन के वाष्पशील तेलों में थाइमोल और गामा-टेरपीनेने (γ-terpinene) जैसे एंटीमाइक्रोबियल यौगिक होते हैं। Journal of Food Science और कई माइक्रोबायोलॉजिकल अध्ययनों में यह साबित हुआ है कि अजवाइन का अर्क पेट और आंतों में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया जैसे E. coli, Salmonella और Helicobacter pylori के विकास को रोकता है। जब पेट में खराब बैक्टीरिया पनपते हैं, तो वे भोजन को फॉर्मेट करके अत्यधिक गैस पैदा करते हैं। अजवाइन का पानी इन हानिकारक सूक्ष्मजीवों को कंट्रोल कर गैस बनने से रोकता है। कई रिसर्च में पाया गया है कि अजवाइन पेट खाली होने की दर (Gastric Emptying Time) में सुधार करती है। यानी जब आप बहुत भारी या तला-भुना खाना खाते हैं, तो अजवाइन का पानी पेट में भोजन को रुकने नहीं देता और इसे आंतों की ओर तेजी से बढ़ाता है, जिससे भारीपन की शिकायत नहीं होती।
अजवाइन का पानी बनाने के दो आसान तरीके
अजवाइन का पानी बनाने के लिए एक तरीका है कि एक चम्मच अजवाइन को एक गिलास पानी में रातभर भिगोकर सुबह छानकर पिया जाए। दूसरे तरीके में एक चम्मच अजवाइन को दो कप पानी में करीब 5 मिनट तक उबालकर, ठंडा होने दें और उसके बाद छानकर उसका सेवन कर लें। स्वाद के लिए इसमें थोड़ी मात्रा में काला नमक या नींबू भी मिला सकते हैं।
डिस्क्लेमर: अजवाइन का पानी गैस, अपच या एसिडिटी का इलाज नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लगातार बने रहने पर डॉक्टर से सलाह लें।



