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लिवर खराब होने के 7 शुरुआती लक्षण; गैस्ट्रोएंट्रोलोजिस्ट से जानें पेशाब के रंग में बदलाव को क्यों न करें इग्नोर..

लिवर खराब होने के 7 शुरुआती लक्षण; गैस्ट्रोएंट्रोलोजिस्ट से जानें पेशाब के रंग में बदलाव को क्यों न करें इग्नोर..

लिवर हमारे शरीर का एक ऐसा महत्वपूर्ण अंग है, जो शुरुआती समस्याओं या बीमारी के दौरान अक्सर कोई स्पष्ट संकेत नहीं देता। यही वजह है कि इसके खराब होने या फैटी लिवर जैसी स्थितियों का पता आसानी से और जल्दी नहीं चलता। हालांकि, शरीर छोटे-छोटे संकेतों के ज़रिए सजग करने की कोशिश करता है जिनमें से एक प्रमुख संकेत पेशाब (Urinary System) के रंग, मल या पेट के पाचन में बदलाव से जुड़ा होता है।

AIIMS, हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड से प्रशिक्षित,बोर्ड-सर्टिफाइड गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट एवं हेपेटोलॉजिस्ट,डॉ. सौरभ सेठी ने बताया अगर आपके पेशाब का रंग गहरा पीला, लाल या असामान्य दिखता है, तो इसे सामान्य डिहाइड्रेशन मानकर नज़रअंदाज़ करना जोखिम भरा हो सकता है। लिवर की बीमारी के गंभीर लक्षणों का इंतजार करने के बजाय अपने जोखिम कारकों को समझना और जरूरत पड़ने पर समय पर जांच कराना ज्यादा जरूरी है। आइए एक्सपर्ट्स से समझते हैं लिवर से जुड़े 7 शुरुआती लक्षण कौन-कौन से हैं और पेशाब का बदला रंग आपके लिवर की सेहत के बारे में क्या संकेत देता है।

पेशाब का रंग गहरा होना नजरअंदाज न करें

डॉक्टर सौरव ने बताया लिवर में परेशानी होने पर यूरिन और मल के रंग में बदलाव हो सकता है। हालांकि पेशाब का गहरा रंग कई बार शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन की वजह से हो सकता है। इसी तरह कभी-कभार मल का थोड़ा हल्का या तैरता हुआ होना हमेशा चिंता का कारण नहीं होता। लेकिन अगर पर्याप्त पानी पीने के बावजूद पेशाब लगातार बहुत गहरा रहे और मल बार-बार सफेद, ग्रे या मिट्टी जैसे रंग का दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पित्त मल को उसका सामान्य भूरा रंग देने में भूमिका निभाता है। अगर पित्त आंतों तक सामान्य तरीके से नहीं पहुंच पाता, तो मल का रंग फीका हो सकता है। वहीं बिलीरुबिन बढ़ने पर यह पेशाब में पहुंचकर उसे चाय या कोला जैसे गहरे रंग का बना सकता है। ऐसा लिवर में सूजन या बाइल डक्ट में रुकावट जैसी स्थितियों में हो सकता है। अगर इसके साथ खुजली या आंखों में पीलापन भी दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

बिना किसी दाने के लगातार खुजली होना

शरीर में खुजली होने के कई कारण हो सकते हैं लेकिन लिवर में परेशानी होने पर भी बॉडी में खुजली की दिक्कत हो सकती है। लिवर और बाइल डक्ट यानी पित्त नली से जुड़ी बीमारियों में पित्त के सामान्य प्रवाह में रुकावट आ सकती है, जिससे स्किन पर किसी भी तरह का दाना दिखे बिना ही तेज खुजली हो सकती है। इसे कोलेस्टेटिक प्रुरिटस (Cholestatic Pruritus) कहा जाता है। यह खुजली शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है, लेकिन हथेलियों और तलवों में ज्यादा परेशानी हो सकती है। कई लोगों में यह रात के समय अधिक महसूस हो सकती है। अगर खुजली लगातार बनी हुई है और इसका कोई स्पष्ट कारण समझ नहीं आ रहा है, खासकर अगर इसके साथ दूसरे लक्षण भी मौजूद हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

स्किन पर मकड़ी जैसी छोटी लाल नसें दिखाई देना

स्किन पर मकड़ी के आकार जैसी छोटी-छोटी लाल रक्त वाहिकाओं को स्पाइडर एंजियोमा (Spider Angioma) कहा जाता है। इसमें बीच में एक लाल बिंदु होता है और वहां से छोटी रक्त वाहिकाएं बाहर की तरफ फैलती हुई दिखाई देती हैं। एक-दो स्पाइडर एंजियोमा हेल्दी लोगों में भी हो सकते हैं, इसलिए इन्हें देखकर घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर ऐसी कई नई रक्त वाहिकाएं दिखाई देने लगें, खासकर चेहरे, कंधों और छाती के ऊपरी हिस्से पर, तो उसे नजरअंदाज नहीं करें। कुछ मामलों में इनका संबंध क्रॉनिक लिवर डिजीज या सिरोसिस से हो सकता है।

हथेलियों का लाल होना आम नहीं

हथेलियों का जरूरत से ज्यादा लाल दिखाई देना पाल्मर एरिथेमा (Palmar Erythema) कहलाता है। इसमें खासतौर पर अंगूठे और छोटी उंगली के आधार के आसपास हथेलियों में रेडनेस दिखाई दे सकती है। हालांकि ये सिर्फ लिवर की बीमारी का संकेत नहीं है। गर्भावस्था, थायरॉयड से जुड़ी समस्या और रूमेटाइड आर्थराइटिस जैसी दूसरी स्थितियों में भी हथेलियां लाल हो सकती हैं। इसलिए केवल लाल हथेलियों के आधार पर लिवर की बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। लेकिन अगर इसके साथ स्पाइडर एंजियोमा और लिवर टेस्ट में असामान्यता जैसे दूसरे संकेत भी हों, तो डॉक्टर इसकी वजह की जांच कर सकते हैं।

अचानक आसानी से चोट लगना या खून निकलना

अगर पहले की तुलना में शरीर पर आसानी से नीले निशान पड़ने लगे हैं या बिना स्पष्ट कारण के खून निकलने जैसी समस्या होने लगी है, तो इसे गंभीरता से लेना जरूरी है। लिवर शरीर में सामान्य ब्लड क्लॉटिंग यानी खून जमने की प्रक्रिया में शामिल कई महत्वपूर्ण प्रोटीन बनाता है। गंभीर या एडवांस्ड लिवर डिजीज में इस प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।

पेट में लगातार सूजन या पानी भरना

पेट का लगातार बढ़ना, खासकर जब इसके साथ पैरों और टखनों में सूजन भी हो, लिवर की गंभीर बीमारी में देखा जा सकता है। एडवांस सिरोसिस में पेट के अंदर तरल पदार्थ जमा हो सकता है। इसे असाइटिस (Ascites) कहा जाता है। इसके कारण पेट का आकार धीरे-धीरे बढ़ सकता है। सिरोसिस के शुरुआती चरण में लिवर अपनी जरूरी प्रक्रियाएं काफी हद तक संभाल सकता है, लेकिन जब पेट में असाइटिस जैसी जटिलताएं विकसित होने लगती हैं, तो यह बीमारी के गंभीर होने का संकेत हो सकता है। अगर पेट लगातार बढ़ रहा है और साथ में पैरों में सूजन, सांस लेने में परेशानी, पेट दर्द या बुखार भी है, तो तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए।

आंखों का पीला होना या अचानक भ्रम की स्थिति

आंखों के सफेद हिस्से का पीला पड़ना पीलिया (Jaundice) कहलाता है। शरीर में बिलीरुबिन जमा होने के कारण ऐसा हो सकता है। पीलिया का मतलब हमेशा एंड-स्टेज सिरोसिस नहीं होता। एक्यूट हेपेटाइटिस, कुछ दवाओं से होने वाली लिवर इंजरी और बाइल डक्ट में रुकावट जैसी कई अन्य स्थितियां भी पीलिया का कारण बन सकती हैं। फिर भी अगर आंखें या स्किन अचानक पीली पड़ने लगे, तो इसकी वजह जानने के लिए जल्द डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। अगर लिवर की बीमारी से जूझ रहा व्यक्ति अचानक कंफ्यूज होने लगे, बहुत ज्यादा नींद आने लगे, चीजें भूलने लगे या उसके व्यवहार में असामान्य बदलाव दिखाई दे, तो यह हेपेटिक एन्सेफैलोपैथी जैसी गंभीर जटिलता का संकेत हो सकता है।

डिस्क्लेमर: ये जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। इनमें से किसी एक लक्षण का होना लिवर की बीमारी की पुष्टि नहीं करता। लक्षणों के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। लगातार या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर से जांच और उचित सलाह लें।

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