नई दिल्ली
केंद्रीय कर्मचारियों के साथ पेंशनकर्मियों को भी आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार है। अगर सबकुछ ठीक रहा तो वेतन आयोग अगले साल की पहली छमाही में अपनी सिफारिशें सरकार को सौंप देगा। इससे पहले, कर्मचारियों के अलगअलग संगठन 8वें वेतन आयोग के ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ में बदलाव करने की मांग कर रहे हैं। अब सवाल है कि क्या यह बदलाव संभव है। अब तक के पैटर्न के हिसाब से समझते हैं।

क्या है मांग?
बीते कुछ महीनों से भारत पेंशनर्स समाज और ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन जैसे प्रमुख कर्मचारी संगठनों, स्टेकहोल्डर्स ने ToR में बदलाव करने की मांग की है। इन संगठनों ने ‘नॉनकंट्रीब्यूटरी पेंशन स्कीम’ की ‘अनफंडेड कॉस्ट’ के जिक्र को हटाने की भी मांग की है। उनका तर्क है कि पेंशन को सिर्फ सरकारी खर्च के तौर पर नहीं बल्कि रिटायर कर्मचारियों के लिए आर्थिक सुरक्षा के तौर पर देखा जाना चाहिए। यह मांग रिटायर हो चुके कर्मचारियों और उनके परिवारों के जीवनस्तर को बेहतर बनाने के मकसद से की गई है। इसमें 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर होने वाले कर्मचारियों की पेंशन और फैमिली पेंशन में बदलाव की बात भी शामिल है।
क्या बदलाव संभव है?
अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक अपडेट या जानकारी नहीं आई है। हालांकि, सरकार को लगता है कि कुछ और मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत है और उन्हें आयोग के अधिकार क्षेत्र में शामिल किया जाना चाहिए तो वह ToR में बदलाव कर सकती है। पिछले वेतन आयोगों ने दिखाया है कि ToR बदले जा सकते हैं। 5वें वेतन आयोग में ToR को 1995 और 1996 के बीच चार बार बदलाव किए गए थे। छठे वेतन आयोग में भी दो बार बदलाव हुए जबकि सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट जमा करने की समयसीमा बढ़ाने के लिए सितंबर 2015 में उसके ToR में बदलाव किया गया था। कहने का मतलब है कि आठवें वेतन आयोग में भी ToR में बदलाव संभव है।
इस बार ToR में 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए लोगों की पेंशन में बदलाव को शामिल करना है या नहीं, यह सरकार का नीतिगत फैसला होगा। बता दें कि कैबिनेट ने 28 अक्टूबर 2025 को एक आधिकारिक बयान के जरिए 8वें वेतन आयोग के ToR को मंजूरी दी थी।
बीते साल नवंबर महीने में आठवें वेतन आयोग के लिए समिति का गठन हुआ था। इसके बाद फरवरी 2026 में वेतन आयोग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट को लॉन्च किया। इस वेबसाइट के जरिए वेतन आयोग समयसमय पर बैठकों के अपडेट देता रहता है। इसके अलावा, हितधारकों या स्टेकहोल्डर्स से सुझाव की मांग की जाती है। बता दें कि 8वां वेतन आयोग राजस्थान और तमिलनाडु में कर्मचारी यूनियनों और स्टेकहोल्डर्स के साथ अपनी अगली बैठकें क्रमशः 31 अगस्त और 7 सितंबर को करेगा।



