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कब्ज हो या लूज मोशन, इसबगोल कैसे करें इस्तेमाल? दूध और दही के साथ लेने का सही तरीका जानें..​​​​​​

आजकल खराब खानपान, कम पानी पीने और बदलती जीवनशैली के कारण कब्ज, गैस, अपच और पेट फूलने जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। ऐसे में कई लोग राहत के लिए इसबगोल की भूसी का इस्तेमाल करते हैं। इसमें भरपूर मात्रा में घुलनशील फाइबर पाया जाता है, जो आंतों में पानी को सोखकर पाचन और मल त्याग को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

हालांकि, इसबगोल का फायदा इस बात पर भी निर्भर करता है कि इसे किस मात्रा में और किस तरह लिया जा रहा है। कब्ज और दस्त जैसी अलग-अलग स्थितियों में इसका इस्तेमाल भी अलग तरीके से किया जाता है। सबसे जरूरी बात यह है कि इसबगोल लेते समय पर्याप्त पानी पीना चाहिए, वरना कुछ लोगों में कब्ज की समस्या बढ़ सकती है।

कब्ज में कैसे काम करता है इसबगोल?

इसबगोल की भूसी पानी को सोखकर आंतों में जेल जैसी संरचना बनाती है। इससे मल में पानी और मात्रा बढ़ सकती है, जिससे मल नरम होकर आसानी से बाहर निकलने में मदद मिलती है।

यह फाइबर आंतों की सामान्य गतिविधि को सपोर्ट करता है और नियमित मल त्याग में मदद कर सकता है। इसी वजह से लंबे समय से होने वाली साधारण कब्ज में इसबगोल का इस्तेमाल किया जाता है।

लेकिन इसे लेने के साथ पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद जरूरी है। पानी की कमी होने पर फाइबर उल्टा मल को सख्त कर सकता है और कब्ज की परेशानी बढ़ सकती है।

कब्ज होने पर दूध के साथ कैसे लें?

कब्ज की स्थिति में कुछ लोग रात को सोने से पहले इसबगोल का सेवन करते हैं। एक गिलास गुनगुने पानी या दूध में इसबगोल की उचित मात्रा मिलाकर तुरंत पी सकते हैं।

आम तौर पर वयस्कों में 1 से 2 चम्मच तक इस्तेमाल की सलाह दी जाती है, लेकिन सही मात्रा व्यक्ति की जरूरत और उत्पाद के निर्देशों पर निर्भर करती है। इसबगोल लेने के बाद भी पर्याप्त पानी पीना जरूरी है।

अगर दूध पीने से आपको गैस, पेट फूलना या असहजता होती है, तो इसे पानी के साथ लेना बेहतर विकल्प हो सकता है।

क्या दस्त में भी इसबगोल फायदेमंद है?

हां, कुछ मामलों में इसबगोल दस्त या लूज मोशन के दौरान भी मल को अधिक ठोस बनाने में मदद कर सकता है। इसका घुलनशील फाइबर अतिरिक्त पानी को बांध सकता है, जिससे मल की बनावट बेहतर हो सकती है।

हालांकि, दस्त होने पर सबसे जरूरी चीज शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करना है। सिर्फ इसबगोल पर निर्भर रहना सही नहीं है।

लूज मोशन में दही के साथ कैसे लें?

पारंपरिक तौर पर दस्त की स्थिति में इसबगोल को दही के साथ लेने की सलाह दी जाती है। दही में थोड़ी मात्रा में इसबगोल मिलाकर लिया जा सकता है।

लेकिन बार-बार या बहुत ज्यादा मात्रा में लेने की जरूरत नहीं है। उत्पाद के निर्देशों के अनुसार मात्रा तय करें और अगर दस्त लगातार बने रहें तो डॉक्टर से संपर्क करें।

इसबगोल के दूसरे फायदे क्या हैं?

इसबगोल सिर्फ कब्ज के लिए ही इस्तेमाल नहीं किया जाता। पर्याप्त पानी और संतुलित डाइट के साथ घुलनशील फाइबर कई तरह से स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है।

पाचन को सपोर्ट करता है

फाइबर आंतों की सामान्य गतिविधि और नियमित मल त्याग को बनाए रखने में मदद करता है। इससे पाचन तंत्र को बेहतर तरीके से काम करने में सहायता मिल सकती है।

पेट लंबे समय तक भरा रख सकता है

इसबगोल पानी सोखकर पेट में फूलता है और तृप्ति का एहसास बढ़ा सकता है। इससे बार-बार खाने की इच्छा कम हो सकती है और वजन मैनेजमेंट में मदद मिल सकती है।

कोलेस्ट्रॉल मैनेजमेंट में मदद

घुलनशील फाइबर से भरपूर डाइट LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकती है। इसलिए इसबगोल को संतुलित डाइट के हिस्से के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

ब्लड शुगर पर असर

घुलनशील फाइबर भोजन से ग्लूकोज के अवशोषण को धीमा कर सकता है। इससे खाने के बाद ब्लड शुगर में अचानक बढ़ोतरी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, डायबिटीज में इसबगोल को दवाओं का विकल्प नहीं माना जा सकता।

इसबगोल लेते समय इन गलतियों से बचें

इसबगोल का सेवन करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है—

  • इसे पर्याप्त पानी के साथ लें।
  • सूखी इसबगोल की भूसी सीधे निगलने से बचें।
  • जरूरत से ज्यादा मात्रा लेने पर गैस, पेट फूलना या ऐंठन हो सकती है।
  • दवाएं लेने वाले लोग इसबगोल और अपनी दवाओं के बीच उचित अंतर रखने के बारे में डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लें।
  • लंबे समय तक कब्ज रहने पर सिर्फ घरेलू उपाय पर निर्भर न रहें।

किन लोगों को डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

अगर कब्ज के साथ तेज पेट दर्द, उल्टी, पेट बहुत फूलना या मल में खून जैसी समस्या हो तो बिना सलाह इसबगोल लेना उचित नहीं है। इसी तरह लगातार दस्त, कमजोरी या डिहाइड्रेशन की स्थिति में भी चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।

डायबिटीज या किसी अन्य बीमारी के लिए नियमित दवाएं लेने वाले लोगों को भी इसबगोल को रोजाना शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन से सलाह लेनी चाहिए।

निष्कर्ष

इसबगोल घुलनशील फाइबर का अच्छा स्रोत है और सही तरीके से इस्तेमाल करने पर कब्ज में मल को नरम करने तथा नियमित मल त्याग में मदद कर सकता है। कुछ स्थितियों में यह दस्त के दौरान अतिरिक्त पानी को बांधकर मल की बनावट सुधारने में भी सहायक हो सकता है।

कब्ज में इसे पानी या दूध के साथ और दस्त में दही के साथ लेने की परंपरा है, लेकिन हर व्यक्ति के लिए एक ही तरीका और मात्रा सही नहीं होती। सबसे जरूरी है पर्याप्त पानी पीना और लंबे समय तक बनी रहने वाली समस्या को नजरअंदाज न करना।

डिस्क्लेमर: इसबगोल किसी बीमारी का इलाज या दवा का विकल्प नहीं है। इसका सेवन व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और जरूरत के अनुसार अलग हो सकता है। लगातार कब्ज या दस्त, तेज पेट दर्द, उल्टी या मल में खून आने पर डॉक्टर से संपर्क करें। नियमित दवाएं लेने वाले लोग इसबगोल शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।

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