Bhagalpur News: सिल्क सिटी के नाम से पहचान रखने वाले भागलपुर में अब बुनकरों की जिंदगी संकट के दौर से गुजर रही है. कभी देशविदेश में मशहूर भागलपुरी सिल्क का कारोबार आज लगातार गिरावट की मार झेल रहा है. पहले कोरोना महामारी ने सिल्क उद्योग की कमर तोड़ी, फिर ईरानइजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध ने विदेशी ऑर्डर रोक दिए. अब विक्रमशिला सेतु का हिस्सा गंगा में समाने से कारोबार पर तीसरी बड़ी चोट पड़ गई है.

4 तारीख को विक्रमशिला सेतु के दो पिलर के बीच का हिस्सा गंगा में समा गया, जिसके बाद पूर्वी बिहार से सीमांचल का सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया. इसका सीधा असर भागलपुर के सिल्क कारोबार पर पड़ा है. नेपाल, फारबिसगंज, अररिया, जोगबनी, पूर्णिया, कटिहार, खगड़िया और बेगूसराय समेत कई जिलों के व्यापारी अब सिल्क खरीदने भागलपुर नहीं पहुंच पा रहे हैं.
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बुनकरों को करोड़ों रुपए का नुकसान
बुनकरों का कहना है कि कोरोना काल से अब तक सिल्क व्यापार को करोड़ों रुपए का नुकसान हो चुका है. पहले जहां पावरलूम 18 से 19 घंटे तक चलते थे, वहीं अब कुछ घंटों तक ही सीमित रह गए हैं. उत्पादन में भारी गिरावट आई है और बाजार में खरीदारों की कमी ने हालात और खराब कर दिए हैं.
सिल्क कारोबारियों और बुनकरों ने सरकार से मांग की है कि उद्योग को बचाने के लिए विशेष सहायता और राहत पैकेज दिया जाए, ताकि वर्षों पुरानी इस पहचान को खत्म होने से बचाया जा सके. बुनकरों का कहना है कि अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो सिल्क सिटी की चमक पूरी तरह फीकी पड़ सकती है.
काम पर नहीं आ रहे मजदूर
सिल्क व्यापार में भारी नुकसान को लेकर बुनकर अमन कुमार ने कहा कि सेतु के टूट जाने से बाजार स्थिर हो गया है, जो पावर लूम रात दिन चलता था, वह अब एक शिफ्ट में ही चल रहा है. कई मजदूर काम पर नहीं आ रहे. पुल टूट जाने के बाद गंगा पार से व्यापारी भी नहीं आ रहे हैं. जिस वजह से काम ठप हो गया है. वहीं पूर्णिया, कटिहार और नेपाल से भी भारी ऑर्डर मिलता था, जो अब रुक गया है. जल्द पुल पर आवाजाही शुरू हो, हम लोग यही चाहते हैं, ताकि हम लोगों को अब परेशानी न झेलनी पड़े.
क्या बोले भागलपुर के बुनकर?
व्यापारी व बुनकर हसनैन अंसारी ने बताया कि इससे पहले भी हम लोग नुकसान की मार कई बार झेल चुके हैं. पहले कोरोना और फिर इजराइलअमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की वजह से करोड़ों का आर्डर डंप हुआ. वहीं अब रेशमी शहर से सटा विक्रमशिला पुल ध्वस्त होने के कारण नेपाल, भूटान के साथसाथ फारबिसगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा, सहरसा से जो भी व्यापारी आते थे, वह अब आना पूरी तरह बंद कर दिए. इस वजह से बुनकरों के बीच भयावाह संकट पैदा हो गई है. हम लोगों का अधिकांश पावर लूम बंद रहता है.



