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पहली बार, 96 के पार… अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में ऐतिहासिक गिरावट

नई दिल्ली: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में लगातार गिरावट बनी हुई है। शुक्रवार को भी गिरकर पहली बार 96 रुपये के स्तर को पार कर गया। अंत में यह 30 पैसे कमजोर होकर 95.94 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी नीति निर्माताओं के सख्त रुख ने रुपये पर जबरदस्त दबाव डाला। विदेशी मुद्रा व्यापारियों के अनुसार विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी और कमजोर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के कारण भी रुपये में गिरावट है। इससे देश के भुगतान संतुलन पर असर पड़ रहा है।

पहली बार, 96 के पार… अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में ऐतिहासिक गिरावट
पहली बार, 96 के पार… अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में ऐतिहासिक गिरावट

रुपये में गिरावट के मुख्य 4 कारण
तेल और आयात का दबाव: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और भारत का 28.38 अरब डॉलर का बढ़ता व्यापार घाटा रुपये की कमजोरी का बड़ा कारण है।

वैश्विक अनिश्चितता: वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता, भारतीय बाजार में हाई वैल्यूएशन और एआई क्षेत्र में निवेश के सीमित अवसरों ने पूंजी प्रवाह को प्रभावित किया है।
ट्रंपजिनपिंग मुलाकात: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बीजिंग में हुई ‘ऐतिहासिक’ वार्ता के बावजूद किसी ठोस समझौते पर सहमति न बनने से बाजार में निराशा रही।

अमेरिकी नीति: अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की टिप्पणियों और बेहतर अमेरिकी डेटा ने डॉलर को अन्य एशियाई मुद्राओं के मुकाबले मजबूत किया है।
अमेरिकी नीति निर्माताओं के कड़े रुख और ईरान युद्ध जैसी वैश्विक चिंताओं ने एशियाई मुद्राओं को उनके सबसे निचले स्तर पर धकेल दिया है। हालांकि, इस चुनौतीपूर्ण माहौल में भी अप्रैल के दौरान भारत का निर्यात 13.78% बढ़कर 43.56 अरब डॉलर रहा, जो एक सकारात्मक संकेत है।

तेल की कीमत 100 डॉलर पार
ईरानअमेरिका युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी है। यहां से वैश्विक ईंधन का 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है। होर्मुज के काफी हद तक बंद होने के कारण तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई। पिछले काफी समय से यह 100 डॉलर प्रति बैरल पर है। आज शुक्रवार को भी इसमें तेजी आई। ब्रेंट क्रूड करीब 2 फीसदी की तेजी के साथ करीब 108 डॉलर प्रति बैरल पर है।

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