CrimeIndiaTrending

महाराष्ट्र: कोर्ट परिसर में पत्नी की गोली मारकर हत्या करने के आरोपी पूर्व सैनिक को 4 साल बाद जमानत, ट्रायल में देरी बनी वजह.

महाराष्ट्र: कोर्ट परिसर में पत्नी की गोली मारकर हत्या करने के आरोपी पूर्व सैनिक को 4 साल बाद जमानत, ट्रायल में देरी बनी वजह.

महाराष्ट्र में अपनी अलग रह रही पत्नी की कोर्ट परिसर में गोली मारकर हत्या करने के मामले में आरोपी पूर्व सैन्यकर्मी दीपक पांडुरंग धवले को बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। अदालत ने गौर किया कि आरोपी करीब 4 साल 4 महीने से जेल में बंद है, लेकिन मुकदमे की सुनवाई अब तक शुरू नहीं हो पाई है। मामले में लंबे समय से आगे की कार्रवाई नहीं होने और ट्रायल पूरा होने में लगने वाले संभावित समय को देखते हुए अदालत ने राहत देने का फैसला किया।

मुकदमे में देरी को अदालत ने माना अहम आधार

जस्टिस मिलिंद जाधव की पीठ ने दीपक धवले की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान उसकी हिरासत की अवधि और मुकदमे की स्थिति पर विचार किया। अदालत के सामने यह बात रखी गई कि वर्ष 2024 के बाद मामले में कोई खास प्रगति नहीं हुई है और सुनवाई शुरू होने में भी देरी हो रही है।

आरोपी की ओर से पेश वकील सत्यव्रत जोशी ने दलील दी कि उनका मुवक्किल लंबे समय से जेल में बंद है और मुकदमे की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी सेना में सेवा दे चुका है और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।

अदालत ने अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए भी यह माना कि मुकदमे में देरी और सुनवाई पूरी होने में लगने वाले संभावित समय को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इन्हीं परिस्थितियों में जमानत मंजूर की गई।

घरेलू विवाद के बाद शुरू हुई थी कानूनी लड़ाई

दीपक धवले और मंजुला की शादी वर्ष 2005 में हुई थी। दोनों महाराष्ट्र के ठाणे जिले के अंबरनाथ इलाके में रहते थे। रिपोर्ट के अनुसार, शादी के करीब एक साल बाद ही उनके बीच विवाद शुरू हो गए थे। शुरुआत में परिवार के लोगों ने हस्तक्षेप कर झगड़े सुलझाने की कोशिश की थी।

वर्ष 2020 में दीपक ने सेना की नौकरी छोड़ दी और रायगढ़ जिले की एक निजी कंपनी में काम करने लगा। इसी दौरान मंजुला ने उसके खिलाफ उत्पीड़न की शिकायत की और घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की।

7 जून 2022 को कोर्ट परिसर में हुई थी गोलीबारी

यह घटना 7 जून 2022 की बताई गई है। मंजुला घरेलू हिंसा से जुड़े मामले की सुनवाई के सिलसिले में अपने वकीलों से मिलने कोर्ट पहुंची थी। वह अपने परिवार के सदस्यों के साथ परिसर में एक पेड़ के नीचे इंतजार कर रही थी।

आरोप है कि सुबह करीब 11:45 बजे दीपक अपने भाई के साथ वहां पहुंचा और मंजुला पर तीन गोलियां चलाईं। बीच-बचाव करने पहुंचे उसके ससुर पर भी हमला किया गया, जबकि उसकी सास के सिर पर पिस्तौल के बट से वार किए जाने की बात सामने आई।

घटना के बाद आरोपी और उसका भाई मौके से भाग गए। मंजुला और उसकी मां को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन मंजुला की इलाज शुरू होने से पहले ही मौत हो गई।

बेटियों को गोली नहीं मारने की बात का भी जिक्र

जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों पर भी गौर किया। अदालत के अवलोकन के मुताबिक, घटना के दौरान आरोपी का गुस्सा मुख्य रूप से अपनी पत्नी के प्रति था। गोलीबारी के समय मंजुला के परिवार के सदस्य और उनकी दोनों बेटियां भी परिसर में मौजूद थीं।

अदालत ने इस बात पर ध्यान दिया कि पत्नी पर गोली चलाने के बाद आरोपी ने अपनी बेटियों और ससुराल के अन्य सदस्यों पर गोली नहीं चलाई। बयान में यह भी सामने आया कि आरोपी के भाई ने कथित तौर पर बेटियों को मारने के लिए कहा था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और दोनों बेटियां जान बचाने के लिए कोर्ट की इमारत के अंदर चली गईं।

फिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद आरोपी को राहत मिली है। हालांकि, जमानत का अर्थ मामले में दोषमुक्त होना नहीं है। मुकदमे में आरोपों पर अंतिम निर्णय सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और अदालत में सामने आए तथ्यों के आधार पर तैयार की गई है। मामले में अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply