नई दिल्ली। भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपरा आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए आज 11वां आयुर्वेद दिवस मनाया जा रहा है। इस वर्ष इसका मुख्य आयोजन महाराष्ट्र के नागपुर में हो रहा है। “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” को इस साल की थीम बनाया गया है।

आयुर्वेद दिवस अब केवल भारत तक सीमित कार्यक्रम नहीं रह गया है। सरकार के अनुसार, वर्ष 2025 में आयुर्वेद दिवस से जुड़ी गतिविधियां 150 से अधिक देशों में आयोजित हुई थीं। 2026 के आयोजन से पहले भी अमेरिका समेत कई देशों और क्षेत्रों में कार्यक्रम दर्ज किए गए हैं।
अमेरिका और यूरोप में क्यों बढ़ रही दिलचस्पी?
आयुर्वेद को लेकर दुनिया में प्रिवेंटिव हेल्थकेयर, वेलनेस, पोषण और स्वस्थ जीवनशैली पर बढ़ते ध्यान के कारण रुचि बढ़ रही है। भारत सरकार भी आयुर्वेद को आधुनिक शोध, गुणवत्ता मानकों और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों के साथ जोड़ने पर जोर दे रही है।
हालांकि, आयुर्वेदिक दवाओं की प्रभावशीलता और सुरक्षा को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण तथा गुणवत्ता मानकों का महत्व भी लगातार रेखांकित किया जा रहा है। आयुष मंत्रालय ने 2026 के कार्यक्रम में evidencebased Ayurveda, research, innovation और integrated healthcare को प्रमुख विषय बनाया है।
इस बार क्या होगा खास?
नागपुर में होने वाले मुख्य कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण पहल और रिपोर्ट लॉन्च की जाएंगी। इनमें आयुष सर्विसेज सेक्टर पर पहली रिपोर्ट, सुरक्षा संबंधी दस्तावेज और दिशानिर्देश तथा CCRASAGNI वेब पोर्टल शामिल हैं। आयुर्वेद को 2047 तक आगे ले जाने और गैरसंचारी रोगों के बोझ को कम करने जैसे विषयों पर वैज्ञानिक सत्र भी होंगे।
देशभर में बड़े स्तर पर कार्यक्रम
आयुर्वेद दिवस से पहले ही देशभर में बड़ी संख्या में गतिविधियां आयोजित की गईं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 9,700 से अधिक गतिविधियां दर्ज हुईं और 3.6 लाख से ज्यादा लोगों ने पंजीकरण कराया। करीब 89.3 लाख नागरिकों ने आयुर्वेद के समर्थन का संकल्प लिया।
इन कार्यक्रमों में आयुर्वेद जागरूकता अभियान, स्वास्थ्य एवं वेलनेस कैंप, स्कूलकॉलेज कार्यक्रम, औषधीय पौधों का संरक्षण और रोपण, स्वस्थ आहार से जुड़े अभियान तथा युवाओं की भागीदारी शामिल है।
23 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है आयुर्वेद दिवस?
सरकार ने 2025 में फैसला किया था कि अब हर वर्ष 23 सितंबर को आयुर्वेद दिवस मनाया जाएगा। इससे पहले इसकी तारीख धनतेरस/धन्वंतरि जयंती के अनुसार बदलती रहती थी। 23 सितंबर को तय करने के पीछे शरद विषुव का संदर्भ भी दिया गया है, जो दिन और रात के लगभग बराबर होने का प्रतीक है और आयुर्वेद के संतुलन के विचार से जोड़ा गया है।
क्या बदलेगा?
आयुर्वेद दिवस 2026 का फोकस केवल प्रचार पर नहीं बल्कि शोध, वैज्ञानिक प्रमाण, गुणवत्ता, नवाचार और जिम्मेदार वैश्विक विस्तार पर रखा गया है। सरकार का लक्ष्य भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली को आधुनिक स्वास्थ्य जरूरतों के साथ जोड़ना है।



