मानसून के दौरान बुखार, उल्टी, मतली या लूज मोशन लगने पर सवाल उठता है कहीं डेंगू तो नहीं हो गया है. डेंगू होने पर बहुत तेज बुखार चढ़ता है. लेकिन कई बार ये लक्षण शरीर पर नजर नहीं आता और डेंगू हमें अपनी चपेट में ले चुका होता है. दरअसल, डेंगू की सुनते ही ज्यादातर लोग ये मानते हैं कि बुखार, शरीर सिर में दर्द और थकान जैसे ही लक्षण नजर आते हैं. लेकिन यह जरुरी नहीं है की हर डेंगू से पीड़ित व्यक्ति में ये सभी लक्षण दिखाई दे. कई ऐसे मामले भी होते हैं लक्षण या तो हल्के होते हैं या असामान्य होते हैं.

जबकि डेंगू का मुख्य लक्षण बुखार है लेकिन एक बीमार व्यक्ति से दूसरे में लक्षणों की गंभीरता अलगअलग हो सकती है. कुछ मामलों में संक्रमण के बिना लक्षण हो सकते हैं. जबकि कुछ लोगों में बुखार हल्का हो सकता है या बुखार कम होने के बाद और भी लक्षण शुरू हो सकते हैं.
डॉ. रेशू अग्रवाल ने बताया यह पूरी तरह से गलत है कि केवल इसलिए डेंगू का मामला खारिज कर दिया जाए क्योंकि उसमे बुखार नहीं है.यह खासकर तब सच है जब आपके आसपास डेंगू के कई मामले हों और व्यक्ति अचानक कमजोरी या शरीर में दर्द या पेट की बीमारी का शिकार हो.
क्या होता है एटिपिकल डेंगू
इस तरह के डेंगू से पीड़ित मरीजों में पेट से जुड़ी परेशानियां ज्यादा परेशान करती हैं. उल्टी, दस्त, पेट में दर्द, अपच के अलावा थकान, सिरदर्द, आंखों में दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, भूख का ना होना,और त्वचा पर लाल धब्बे आना जैसे कुछ लक्षण दिखाई दे सकते हैं. कभीकभी डेंगू शरीर के कुछ अन्य महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित भी कर सकता है.
अगर लगातार पेट दर्द, उल्टी, सांस लेने में परेशानी, नाक या दांतों से खून आना, ज्यादा बेचैनी जैसी दिक्कतें हो रही हैं तो बहुत सावधानी बरतना जरूरी है. इन लक्षणों को सिर्फ थकान या मौसम बदलने के कारण माना नहीं जाना चाहिए.
डेंगू से जुड़ी गलतफहमियां
डेंगू के बारे में सबसे आम गलतफहमी यह है की जब बुखार कम हो जाता है तो खतरा टल जाता है लेकिन कुछ मरीजों में खतरा ठीक उसी समय शुरू होता है जब बुखार कम होता है. उस समय शरीर में डिहाइड्रेशन हो सकता है और दूसरी परेशानियां भी हो सकती हैं इसलिए यह महत्वपूर्ण है की बुखार कम होने के बाद भी मरीज की निगरानी की जाए.
ऐसे में डेंगू में प्लेटलेट्स की संख्या आम तौर पर कम होती है लेकिन प्लेटलेट्स की संख्या के आधार पर बीमारी की गंभीरता का निदान नहीं किया जा सकता है. डॉक्टर लक्षणों और रोगी की सामान्य स्थिति के आधार पर अपना फैसला करेगा.
इन बातों का रखें ध्यान
तो अगर डेंगू के संक्रमण का कोई खतरा है तो केवल प्लेटलेट्स टेस्ट के नतीजों पर निर्भर करके उपचार लेने और घबराने की बजाय पहले डॉक्टर सलाह ले . सभी डेंगू के मामलों में बुखार और सामान्य लक्षण दिखाई दे ऐसा ज़रूरी नहीं है . खासकर डेंगू के मौसम में कमज़ोरी, उल्टी, शरीर में दर्द, शरीर पर खुजली या पेट की परेशानियों को कभी भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए.



