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आंखों​​​ में दिखने वाले इन 5 संकेतों को न करें नजरअंदाज, धुंधली नजर से लेकर चमकती रोशनी तक हो सकती है गंभीर समस्या की चेतावनी

आंखों​​​ में दिखने वाले इन 5 संकेतों को न करें नजरअंदाज, धुंधली नजर से लेकर चमकती रोशनी तक हो सकती है गंभीर समस्या की चेतावनी

आज के समय में मोबाइल, लैपटॉप और टीवी का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में थकान, सूखापन, जलन और अस्थायी धुंधलापन महसूस हो सकता है। कई बार लोग इन परेशानियों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन आंखों में लगातार बने रहने वाले कुछ बदलाव ऐसी समस्याओं का संकेत भी हो सकते हैं, जिनके लिए समय पर जांच जरूरी है।

स्क्रीन देखते समय लोग अक्सर कम पलकें झपकाते हैं। इससे आंखों की सतह पर नमी बनाए रखने वाली प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और ड्राई आई की समस्या बढ़ सकती है। इसके अलावा उम्र, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और पोषण की कमी भी आंखों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है।

एम्स के पूर्व कंसल्टेंट और साओल हार्ट सेंटर के संस्थापक एवं निदेशक डॉ. बिमल झांजेर ने आंखों की सेहत के लिए संतुलित खानपान और पोषक तत्वों के महत्व पर जोर दिया है। हालांकि, आंखों से जुड़े लक्षणों को पहचानने और उनका सही कारण जानने के लिए नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है। आइए जानते हैं आंखों के ऐसे पांच संकेत, जिन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए।

1. लगातार धुंधला दिखाई देना

अगर लंबे समय तक स्क्रीन देखने के बाद कुछ देर के लिए नजर धुंधली होती है और आराम करने पर ठीक हो जाती है, तो इसकी वजह आंखों का तनाव या सूखापन हो सकता है। लेकिन बार-बार धुंधला दिखाई देना या लगातार नजर साफ न रहना जांच की जरूरत का संकेत है।

इसके पीछे चश्मे का नंबर बदलना, मोतियाबिंद, डायबिटीज के कारण ब्लड शुगर में बदलाव या रेटिना से जुड़ी समस्या हो सकती है। अगर अचानक एक आंख की रोशनी कम हो जाए या धुंधलापन तेजी से बढ़े, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

2. आंखों में तनाव और सिरदर्द होना

कंप्यूटर पर लंबे समय तक काम करने, लगातार पढ़ने या मोबाइल देखने के दौरान आंखों में भारीपन और सिरदर्द हो सकता है। कई बार इसका कारण चश्मे का गलत नंबर, आंखों का सूखापन या दोनों आंखों के तालमेल से जुड़ी समस्या हो सकती है।

अगर बार-बार पढ़ते समय सिरदर्द होता है, आंखों को फोकस करने में परेशानी आती है या आराम करने के बाद भी समस्या बनी रहती है, तो नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराएं। हर सिरदर्द का कारण आंखों की बीमारी नहीं होता, इसलिए सही वजह जानना जरूरी है।

3. आंखों में लगातार लालिमा और जलन

आंखों में कभी-कभी लालिमा धूल, एलर्जी या अस्थायी जलन की वजह से हो सकती है। लेकिन अगर आंखें लगातार लाल रहती हैं, उनमें जलन होती है या बार-बार पानी आता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

इसके पीछे ड्राई आई, एलर्जी, संक्रमण या आंखों में सूजन जैसी स्थितियां हो सकती हैं। आंखों में तेज दर्द, रोशनी से परेशानी, धुंधली नजर या अधिक लालिमा होने पर जल्द जांच कराएं। बिना डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉयड या एंटीबायोटिक आई ड्रॉप का इस्तेमाल न करें।

4. रात में देखने में परेशानी और रोशनी से चकाचौंध

अगर रात में गाड़ी चलाते समय सड़क साफ नहीं दिखाई देती या सामने से आने वाली गाड़ियों की लाइट बहुत ज्यादा चुभती है, तो इसकी वजह की जांच करानी चाहिए।

रात में देखने में परेशानी का संबंध मोतियाबिंद, चश्मे के नंबर में बदलाव, कॉर्निया या रेटिना से जुड़ी समस्या से हो सकता है। विटामिन A की कमी भी कुछ लोगों में रात में देखने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।

ऐसी परेशानी लगातार बनी रहे तो नेत्र विशेषज्ञ से मिलें। रात में नजर कमजोर होने पर जांच होने तक अंधेरे में वाहन चलाने से बचें।

5. आंखों के सामने चमक या अचानक फ्लोटर्स दिखाई देना

आंखों के सामने छोटे-छोटे काले धब्बे, धागे या जाले जैसी आकृतियां दिखाई देने को फ्लोटर्स कहा जाता है। उम्र बढ़ने के साथ कुछ लोगों को ये दिखाई दे सकते हैं।

लेकिन अगर अचानक बहुत सारे नए फ्लोटर्स दिखाई देने लगें, रोशनी की चमक महसूस हो या नजर के किसी हिस्से में काला पर्दा या साया आने लगे, तो यह रेटिना में खिंचाव या उसके अलग होने का संकेत हो सकता है।

यह एक गंभीर स्थिति है और इसमें तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है। इलाज में देरी होने पर स्थायी रूप से दृष्टि प्रभावित हो सकती है।

आंखों की नियमित जांच क्यों जरूरी है?

आंखों की जांच केवल चश्मे का नंबर पता करने के लिए नहीं होती। इससे ग्लूकोमा, डायबिटिक रेटिनोपैथी और रेटिना से जुड़ी कई समस्याओं का शुरुआती दौर में पता लगाया जा सकता है।

इनमें से कुछ बीमारियां शुरुआत में बिना स्पष्ट लक्षणों के भी विकसित हो सकती हैं। खासतौर पर डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित आंखों की जांच करानी चाहिए।

समय पर जांच होने से बीमारी की पहचान और उचित उपचार शुरू करने में मदद मिल सकती है।

आंखों को स्वस्थ रखने के लिए डाइट में शामिल करें ये 5 चीजें

पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित भोजन आंखों के सामान्य स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है। हालांकि, कोई एक खाद्य पदार्थ चश्मे का नंबर खत्म नहीं कर सकता और न ही कमजोर नजर को निश्चित रूप से वापस ला सकता है।

1. हरी पत्तेदार सब्जियां

पालक, मेथी, बथुआ और चौलाई जैसी सब्जियों में ल्यूटिन और ज़ेक्सैंथिन सहित कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये आंखों के रेटिना के मैक्युला हिस्से में मौजूद प्राकृतिक पिगमेंट के महत्वपूर्ण घटक हैं। इन्हें नियमित डाइट में शामिल करना आंखों के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है।

2. गाजर

गाजर बीटा-कैरोटीन का अच्छा स्रोत है, जिसे शरीर विटामिन A में बदलता है। विटामिन A सामान्य दृष्टि बनाए रखने के लिए जरूरी है। इसकी कमी होने पर रात में देखने में परेशानी हो सकती है। गाजर को सलाद, सब्जी या सूप के रूप में खा सकते हैं।

3. शकरकंद

शकरकंद में बीटा-कैरोटीन, फाइबर और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह विटामिन A की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकता है। इसे उबालकर या हल्का पकाकर भोजन में शामिल किया जा सकता है।

4. पर्याप्त पानी

शरीर में पानी की कमी होने पर आंखों में सूखापन महसूस हो सकता है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। हालांकि, केवल ज्यादा पानी पीने से ड्राई आई की हर समस्या ठीक नहीं होती। लगातार सूखापन रहने पर जांच जरूरी है।

5. दालें और बीन्स

दालों और बीन्स में प्रोटीन, जिंक, आयरन और फोलेट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। संतुलित आहार के हिस्से के रूप में इनका सेवन आंखों सहित पूरे शरीर के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है।

स्क्रीन देखने वालों के लिए आंखों की देखभाल के आसान तरीके

  • स्क्रीन पर लगातार काम करते समय 20-20-20 नियम अपनाएं। हर 20 मिनट बाद लगभग 20 फीट दूर रखी किसी वस्तु को 20 सेकंड तक देखें।
  • काम के दौरान सामान्य रूप से पलकें झपकाते रहें।
  • स्क्रीन को आंखों से उचित दूरी पर रखें और उसकी चमक कमरे की रोशनी के अनुसार समायोजित करें।
  • पर्याप्त नींद लें और आंखों को समय-समय पर आराम दें।
  • धूल और तेज धूप से बचाव के लिए जरूरत के अनुसार चश्मे का इस्तेमाल करें।
  • आंखों में लगातार जलन, दर्द या धुंधलापन रहने पर खुद से दवा लेने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लें।

Satya Report Disclaimer: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। आंखों की रोशनी बढ़ाने या किसी बीमारी का इलाज करने का दावा किसी खाद्य पदार्थ के आधार पर नहीं किया जा सकता। अचानक नजर कम होना, रोशनी की चमक दिखना, नए फ्लोटर्स बढ़ना या आंखों के सामने पर्दा आने जैसी स्थिति में तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें।

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