
ब्राजील में राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगी फ्लावियो बोल्सोनारो, किसी के भी बहुमत हासिल न कर पाने के कारण अब 25 अक्टूबर को दूसरे दौर का चुनाव होगा। इस चुनाव में अपराध और भ्रष्टाचार के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी एक बड़ा मुद्दा हैं।
किसी को नहीं मिल पाया बहुमत
ब्रासीलिया में देश की निर्वाचन अदालत ने कहा कि 80 वर्षीय मौजूदा राष्ट्रपति लूला और पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के 45 वर्षीय बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो में से कोई भी पहले दौर के चुनाव में जीत के लिए आवश्यक 50 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल नहीं कर सका। लूला चौथी बार राष्ट्रपति पद के कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ रहे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप के लिए भी अहम है ब्राजील
राष्ट्रपति पद के लिए दूसरे दौर का मतदान 25 अक्टूबर को होगा। अगला राष्ट्रपति कार्यकाल पांच जनवरी 2027 से शुरू होगा। इससे पहले, ब्राजील के लोगों ने रविवार को बेहद महत्वपूर्ण राष्ट्रपति चुनाव में मतदान किया, जिसमें लूला और फ्लावियो के बीच मुकाबला हुआ। यह चुनाव ऐसे समय में हुआ है जब ट्रंप प्रशासन के अनुरूप लातिन अमेरिकी क्षेत्र में दक्षिणपंथी राजनीति का प्रभाव बढ़ रहा है। ब्राजील लातिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
फ्लावियो दक्षिणपंथी विचारधारा वाले पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं। जायर बोल्सोनारो तख्तापलट की कोशिश के मामले में 27 साल की सजा काट रहे हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के करीबी हैं। वहीं, 80 वर्षीय लूला दुनिया के सबसे उम्रदराज राष्ट्राध्यक्षों में से एक हैं। वह अपने राजनीतिक जीवन में सातवीं बार राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ रहे हैं और उन्होंने चीन के साथ ब्राजील के संबंधों को मजबूत किया है। लातिन अमेरिका में हाल के चुनावों में ट्रंप के सहयोगियों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। इनमें अर्जेंटीना, कोलंबिया, होंडुरास और पेरू शामिल हैं।
क्या होता है रन-ऑफ चुनाव
चुनाव में किसी पार्टी को बहुमत ना मिलने पर रन-ऑफ चुनाव करवाया जाता है। इसके तहत सबसे ज्यादा वोट पाने वाले दो उम्मीदवारों के बीच फिर से मुकाबला करवाया जाता है। बाकी अन्य लोगों को बाहर कर दिया जाता है। तीसरे और अन्य स्थान पर आने वाले उम्मीदवारों के नाम मतपत्र में शामिल ही नहीं किए जाते हैं।
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क्या है चुनाव का मुद्दा
सुरक्षा फ्लावियो के अभियान का प्रमुख मुद्दा है। जून में जारी उनके 12 सूत्री सुरक्षा कार्यक्रम में आपराधिक गिरोहों को ‘नार्कोटेररिस्ट’ संगठन घोषित करने और अल सल्वाडोर की तर्ज पर अधिकतम सुरक्षा वाली जेलें बनाने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। आर्थिक मोर्चे पर उन्होंने महंगाई कम करने, सरकारी खर्च घटाने, सार्वजनिक ऋण सीमा लागू करने और ब्राजील के महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र को मजबूत करने का वादा किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, चुनाव का असर ब्राजील की विदेश नीति पर भी पड़ सकता है। अगली सरकार को अमेरिका और चीन के साथ संबंधों के अलावा ग्लोबल साउथ के देशों के साथ अपने रिश्तों को संतुलित करना होगा। दोनों देश ब्राजील के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं।
लूला के कार्यकाल में ब्राजील और चीन के संबंधों में विस्तार हुआ है और दोनों देशों ने व्यापार, प्रौद्योगिकी तथा पर्यावरण संरक्षण सहित कई क्षेत्रों में समझौते किये हैं। नवंबर 2024 में दोनों देशों ने अपनी साझेदारी को अधिक व्यापक स्तर पर ले जाने की घोषणा की थी।



