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​पाइल्स समझकर न करें गलती! टॉयलेट से जुड़े ये लक्षण हो सकते हैं कोलन कैंसर के संकेत

टॉयलेट से जुड़ी कुछ परेशानियों को ज्यादातर लोग पाइल्स या बवासीर समझ लिया जाता है. पॉटी करते समय ब्लड आना, हर समय कब्ज या पेट साफ करने की आदतों में बदलाव को नॉर्मल मानना गलत भी हो सकता है. इसे सिर्फ पाइल्स से जोड़ना सही नहीं है. हो सकता है कि ये समस्याएं किसी गंभीर बीमारी के लक्षण भी हो. एक्सपर्ट बताते हैं कि कोलन कैंसर होने भी कुछ ऐसे ही लक्षण नजर आने लगते हैं. बड़ी आंत में होने वाले कैंसर को कोलोरेक्टल कैंसर कहते हैं.

​पाइल्स समझकर न करें गलती! टॉयलेट से जुड़े ये लक्षण हो सकते हैं कोलन कैंसर के संकेत

शरीर में होने वाले बदलावों को समझा जाए और लंबे समय तक बने रहने वाले या बारबार उभरने वाले लक्षणों को हल्के में न लिया जाए. आखिर पाइल्स और कोलन कैंसर के लक्षणों में क्या अंतर है और किन संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है? आइए, जानते हैं।

एक्सपर्ट ने क्या कहा?

डॉक्टर ब्रह्मानंद लाल कहते हैं कि पाइल्स की दिक्कत कैंसर नहीं बनती. पर पाइल्स को हल्के में लेने की गलती भी नहीं करनी चाहिए. अगर आप इसका इलाज अपने स्पेशलिस्ट डॉक्टर से नहीं कराते हैं तो यह सोच लीजिए कि इसमें कैंसर छुपा हो सकता है. दरअसल, पाइल्स के लक्षणों में ब्लड आना, पेट में दर्द होना या कब्ज का बने रहना शामिल है. यही चीजें कोलोरेक्टल कैंसर में भी नजर आती हैं.

तो अगर आप किसी भी ब्लीडिंग को पाइल्स ही समझेंगे तो ऐसा हो सकता है कि वह बाद में जाकर कैंसर निकले और अगर कैंसर के इलाज समय पर ना हो तो आपका जान का खतरा हो सकता है. कभी भी ब्लीडिंग हो तो आप सिर्फ स्पेशलिस्ट डॉक्टर को ही दिखाएं और उनसे परामर्श लें.

कोलन कैंसर के बढ़ते मामले

कोलोरेक्टल कैंसर यानी बड़ी आंत और मलाशय का कैंसर दुनिया भर में एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्या है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2022 में दुनिया में इसके लगभग 19 लाख नए मामले सामने आए और 9 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई. यह दुनिया का तीसरा सबसे आम कैंसर और कैंसर से होने वाली मौतों का दूसरा प्रमुख कारण था. इसके चेतावनी संकेतों में मल में खून आना, पाखाने की आदत में लगातार बदलाव, बारबार कब्ज या दस्त, पेट में लगातार दर्द, बिना कोशिश वजन कम होना, थकान और खून की कमी शामिल हैं.

हर बार मल में खून आने का कारण कैंसर नहीं होता. पाइल्स और फिशर भी सामान्य कारण हैं. लेकिन बिना जांच के इसे सिर्फ पाइल्स मान लेना सही नहीं है. शुरुआती अवस्था में कोलोरेक्टल कैंसर के लक्षण बहुत कम या बिल्कुल नहीं भी हो सकते हैं.

यदि खून आ रहा है या मल त्याग की आदत में बदलाव बना हुआ है, तो डॉक्टर से जांच कराएं. जरूरत के अनुसार कोलोनोस्कोपी और बायोप्सी से कारण स्पष्ट किया जा सकता है. मेरा संदेश है शर्म या झिझक के कारण जांच में देरी न करें. समय पर पहचान से बेहतर उपचार परिणाम की संभावना बढ़ती है.

कोलोरेक्टल कैंसर क्या है?

कोलोरेक्टल कैंसर बड़ी आंत या मलाशय की अंदरूनी परत से शुरू होने वाला कैंसर है. कई मामलों में इसकी शुरुआत कुछ प्रकार के पॉलीप से हो सकती है. अधिकांश पॉलीप कैंसर नहीं बनते, लेकिन कुछ एडेनोमा जैसे पॉलीप समय के साथ कैंसर में बदल सकते हैं. स्क्रीनिंग में कुछ पूर्वकैंसर पॉलीप पहचानकर हटाए जा सकते हैं.

बचने के लिए ये तरीके आजमाएं

  1. कोलन कैंसर या पाइल्स के की समस्या की अहम वजह बिगड़ा हुआ लाइफस्टाइल और गलत खानपान हो सकते हैं. हर समय तलाभुना खाने से आंतों का स्वास्थ्य बिगड़ता है और धीरेधीरे ये समस्या गंभीर बीमारी कैंसर का रूप भी ले सकती है.
  2. इससे बचने के लिए सबसे जरूरी है कि फाइबर वाली चीजें सब्जियां और फल खाएं.
  3. दिनभर में कम से कम 2.5 लीटर पानी पिएं. इसके अलावा ऐसे सीजनल फ्रूट्स खाएं जिनमें पानी की मात्रा ज्यादा हो.
  4. रोजाना किसी न किसी तरीके से खुद को फिजिकली एक्टिव रखें. रोज कम से कम 30 मिनट की वॉक करें.
  5. सबसे जरूरी है कि हर 6 महीने में अपना हेल्थ चेकअप कराएं. क्योंकि इस तरह बीमारी को जल्दी पकड़कर इलाज करना आसान हो जाता है.

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