Home Loan: जिंदगी का सबसे बड़ा सुकून तब मिलता है जब सिर से होम लोन का बोझ पूरी तरह उतर जाता है. अपनी आखिरी ईएमआई चुकाने के बाद ज्यादातर लोग राहत की सांस लेते हैं. उन्हें लगता है कि अब बैंक से उनका हिसाबकिताब खत्म हो गया है. लेकिन असल में लोन का पूरा पैसा चुकाने के बाद भी एक बहुत जरूरी काम बाकी रहता है. वो काम है बैंक से अपनी प्रॉपर्टी के असली कागज सुरक्षित वापस लेना. कई बार ऐसा होता है कि लोन खत्म होने के हफ्तों या महीनों बाद भी बैंक ग्राहकों को उनके घर के ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स नहीं लौटाते हैं. ग्राहकों को अपनी ही प्रॉपर्टी के कागज वापस पाने के लिए बैंक के चक्कर काटने पड़ते हैं. इस परेशानी को खत्म करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने बेहद सख्त कदम उठाए हैं. नए नियमों ने आम ग्राहकों को बड़ी राहत दी है.

क्या है आरबीआई का 30 दिन वाला नियम
रिजर्व बैंक के निर्देशों के मुताबिक लोन का पूरा पैसा चुकाने के साथ ही प्रक्रिया खत्म नहीं होती. आरबीआई ने बैंकों के लिए एक स्पष्ट समय सीमा तय कर दी है. नए नियम के अनुसार जब कोई ग्राहक अपना पूरा लोन चुका देता है, तो बैंक को 30 दिन के अंदर उसकी प्रॉपर्टी के सभी असली कागज वापस करने होंगे. इसके अलावा उस प्रॉपर्टी पर दर्ज बैंक का चार्ज भी संबंधित रजिस्ट्री से तुरंत हटाना होगा.
ये नियम 1 दिसंबर 2023 से उन सभी मामलों पर लागू हैं जहां बैंक या वित्तीय संस्थान ग्राहक की प्रॉपर्टी के कागज अपने पास गिरवी रखते हैं. सभी व्यावसायिक बैंकों के साथसाथ नॉनबैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों पर भी ये नियम पूरी तरह लागू होते हैं. सेंक्शन लेटर में ही बैंक को ये जानकारी देनी होगी कि लोन खत्म होने पर कागज कहां से वापस मिलेंगे. ग्राहक अपनी सुविधानुसार लोन वाली ब्रांच या किसी अन्य तय ऑफिस से अपने दस्तावेज कलेक्ट कर सकते हैं.
नियम टूटने पर बैंक को देना होगा भारी हर्जाना
अगर बैंक 30 दिन की तय समय सीमा के भीतर आपके कागज नहीं लौटा पाता है, तो उसे इस गलती की भारी कीमत चुकानी होगी. आरबीआई के साफ निर्देश हैं कि 30 दिन बीत जाने के बाद हर एक दिन की देरी के लिए बैंक को ग्राहक को 5,000 रुपये का मुआवजा देना होगा. यानी अगर बैंक ने कागज लौटाने में 10 दिन की देरी की, तो उसे सीधे 50,000 रुपये आपके खाते में ट्रांसफर करने होंगे.
इतना ही नहीं, बैंक को ग्राहक को साफ शब्दों में बताना होगा कि आखिर कागज लौटाने में देरी क्यों हो रही है. ये नियम बैंकों की मनमानी पर पूरी तरह से रोक लगाता है. इसका सीधा फायदा उन ग्राहकों को मिलेगा जो बैंक की लेटलतीफी के कारण अपने ही कागज पाने के लिए परेशान होते थे.
कागज खो जाने पर क्या है बैंक की जिम्मेदारी
कई बार ऐसी खबरें आती हैं कि बैंक की लापरवाही से ग्राहक के घर के कागज खो गए या खराब हो गए. अगर बैंक की कस्टडी में रखे आपके ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स खो जाते हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी बैंक की होगी. ऐसे हालात में बैंक को खुद आगे आकर ग्राहक के लिए डुप्लीकेट या सर्टिफाइड कॉपी बनवाने की व्यवस्था करनी होगी. इस पूरी प्रक्रिया में जितना भी खर्च आएगा, वो सीधा बैंक उठाएगा.
हालांकि ऐसी मुश्किल स्थिति में बैंक को कागज बनवाने के लिए 30 दिन का अतिरिक्त समय दिया जाता है. यानी बैंक के पास डुप्लीकेट कागज देने के लिए कुल 60 दिन का वक्त होगा. अगर 60 दिन के बाद भी बैंक कागज नहीं दे पाता है, तो फिर 5,000 रुपये रोजाना का जुर्माना शुरू हो जाएगा जो सीधा ग्राहक को मिलेगा.
सुनवाई न होने पर ग्राहक यहां करें अपनी शिकायत
अगर लोन का सेटलमेंट होने के 30 दिन बाद भी आपको प्रॉपर्टी के कागज नहीं मिलते हैं, तो आपको एक व्यवस्थित तरीका अपनाना चाहिए. सबसे पहले अपने बैंक को एक लिखित शिकायत दें. आप बैंक से अपने लोन क्लोजर का लिखित प्रमाण मांग सकते हैं. साथ ही देरी का कारण भी लिखित में मांगें.
इसके बाद भी अगर बैंक जवाब नहीं देता है, तो आप उनके शिकायत निवारण विभाग में अपनी बात रख सकते हैं. जब लंबी अवधि के बाद भी बैंक के स्तर पर आपकी समस्या का कोई समाधान न निकले, तो आप सीधे आरबीआई ओम्बड्समैन के पास अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. अपने केस को मजबूत बनाने के लिए हमेशा बैंक से किए गए पत्राचार का लिखित रिकॉर्ड अपने पास सुरक्षित रखें.



