
भारतीय क्रिकेट टीम में वापसी का इंतजार कर रहे बल्लेबाज सरफराज खान ने टीम में चयन नहीं होने को लेकर अपनी निराशा जाहिर की है। घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बनाने और फिटनेस पर कड़ी मेहनत करने के बावजूद उन्हें भारतीय टेस्ट टीम में नियमित मौका नहीं मिल रहा है। इस स्थिति ने उन्हें मानसिक रूप से भी परेशान किया है। रेलवे के खिलाफ रणजी ट्रॉफी मुकाबले के दौरान मुंबई के इस बल्लेबाज ने अपने संघर्ष और परिवार के समर्थन को लेकर खुलकर बात की।
सरफराज ने अपनी फिटनेस सुधारने के लिए वजन करीब 97 किलोग्राम से घटाकर 77 किलोग्राम तक किया। इसके बावजूद टीम में जगह नहीं मिलने से उनके मन में कई सवाल उठते हैं। ब्रेबोर्न स्टेडियम में अर्धशतक लगाने के बाद उन्होंने बताया कि कई बार सुबह उठकर वह खुद से पूछते हैं कि आखिर इतनी मेहनत क्यों कर रहे हैं और बार-बार निराशा का सामना क्यों करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि वह सुबह पांच बजे उठकर अभ्यास के लिए जाते हैं। कई बार उनके मन में क्रिकेट को लेकर सवाल आते हैं, लेकिन जब वह अपने पिता को उनके लिए मेहनत करते देखते हैं तो दोबारा मैदान पर उतरने की प्रेरणा मिलती है। सरफराज के मुताबिक, उनके पिता का संघर्ष ही उन्हें लगातार रन बनाने के लिए प्रेरित करता है।
श्रीलंका दौरे के लिए चुने गए थे सरफराज
सरफराज ने बताया कि उन्हें श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए टीम में चुने जाने की उम्मीद नहीं थी। साई सुदर्शन के चोट से पूरी तरह उबर नहीं पाने के बाद चयनकर्ताओं ने उन्हें मौका दिया था।
उन्होंने बताया कि वह नेशनल क्रिकेट एकेडमी (NCA) में बल्लेबाजी का अभ्यास कर रहे थे, तभी उन्हें बुलाया गया। हालांकि, वहां उन्हें खेलने का अवसर नहीं मिला। इसके बाद वह वापस लौटकर मुंबई के लिए घरेलू क्रिकेट खेलने लगे।
सरफराज का कहना है कि वह फिलहाल अपने खेल पर ध्यान दे रहे हैं। जब भी चयनकर्ता उन्हें मौका देंगे, वह खेलने के लिए तैयार रहेंगे। अगर टीम में चयन नहीं होता है तो वह घरेलू क्रिकेट में अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे।
‘ऐसा नहीं है कि मैंने विदेशों में रन नहीं बनाए’
सरफराज से जब पूछा गया कि क्या चयनकर्ताओं ने उन्हें उनकी कमजोरियों या सुधार के क्षेत्रों के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी दी है, तो उनके पास इसका कोई ठोस जवाब नहीं था।
उन्होंने इस धारणा पर भी सवाल उठाया कि वह विदेशी परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकते। सरफराज ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका में उन्होंने भारतीय टीम के खिलाफ 60 गेंदों में शतक लगाया था। इंग्लैंड में भी उन्होंने 60 गेंदों में शतक जड़ा था।
उनका कहना था कि विदेशी परिस्थितियों में रन बनाने के बावजूद उनके प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाए जाते हैं। भारत लौटने पर कई बार उन्हें ऐसी पिचों पर खेलना पड़ता है, जहां गेंद काफी टर्न करती है। ऐसी परिस्थितियों में बल्लेबाजी करना चुनौतीपूर्ण होता है।
सरफराज ने कहा कि चयनकर्ताओं का अपना नजरिया हो सकता है, लेकिन उनका काम क्रिकेट खेलना और लगातार अच्छा प्रदर्शन करना है। वह इसी पर ध्यान देते रहेंगे।
‘मेरी जिंदगी में सिर्फ पिता ने मेरा साथ दिया’
सरफराज ने अपने क्रिकेट करियर के संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें अपने पिता के अलावा किसी और से खास समर्थन नहीं मिला। उनके मुताबिक, उनके पिता ने हमेशा उनका साथ दिया और क्रिकेट में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने पिता का सपना पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत की है। घरेलू क्रिकेट में उन्होंने कई बड़ी पारियां खेली हैं और 200, 250 तथा 300 रन तक के स्कोर बनाए हैं। इसके बावजूद भारतीय टीम में लगातार मौका नहीं मिलना उनके लिए निराशाजनक रहा है।
सरफराज ने साफ किया कि वह आगे भी अपनी पूरी क्षमता के साथ मेहनत करते रहेंगे। उनके लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण क्रिकेट खेलना और अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाए रखना है।
यशस्वी जायसवाल ने शतक लगाकर की फॉर्म में वापसी
इसी बीच इंडिया ए के सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल ने न्यूजीलैंड ए के खिलाफ दूसरे अनाधिकारिक टेस्ट मैच में शानदार शतक लगाया। मुकाबले के चौथे दिन उन्होंने 119 गेंदों में अपना शतक पूरा किया।
इससे पहले जायसवाल की पिछली तीन पारियों में प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था। उन्होंने इन पारियों में 17, 5 और 0 रन बनाए थे। ऐसे में उनका शतक टीम के लिए अहम रहा और उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से फॉर्म में वापसी के संकेत दिए।
Satya Report डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट उपलब्ध खेल समाचारों और खिलाड़ियों के सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। चयन से जुड़े फैसले चयनकर्ताओं के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।



