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Explained- बंगाल का क्यों हुआ बुरा हाल! 6600 से ज्यादा कंपनियां हुई बंद, 42% फैक्ट्रियां बीमार, क्या अब होगा बेड़ापार

पैसा और समृद्धि ऐसी चीज है जो हर किसी के तरक्की के लिए जरूरी है. चाहे वो घर हो या कोई राज्य, अगर पैसा नहीं है तो हालत खराब हो ही जाती है. बंगाल में भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड जीत के साथ किला फतह कर लिया है. लेकिन आज आपको जो बताने जा रहे हैं उसका सीधा लेनादेना बंगाल की तरक्की से जुड़ा है. दरअसल किसी भी राज्य की इकोनॉमी को बेहतर करने के लिए वहां निवेश का होना बेहद जरूरी है. बंगाल की बात करें तो बंगाल की तरक्की में सबसे बड़ा विलेन निवेश ही बन गया. आइए समझने की कोशिश करते हैं कि बिना निवेश कैसे बंगाल का बुरा हाल हुआ.

Explained- बंगाल का क्यों हुआ बुरा हाल! 6600 से ज्यादा कंपनियां हुई बंद, 42% फैक्ट्रियां बीमार, क्या अब होगा बेड़ापार
Explained- बंगाल का क्यों हुआ बुरा हाल! 6600 से ज्यादा कंपनियां हुई बंद, 42% फैक्ट्रियां बीमार, क्या अब होगा बेड़ापार

बंगाल में करीब 6600 से ज्यादा कंपनियां या तो बंद हो गई या तो राज्य छोड़कर दूसरे राज्य में शिफ्ट हो गई. इसका खामियाजा राज्य की तरक्की को भुगतना पड़ा. देश की दिग्गज कंपनी ऑटो कंपनी हिन्दुस्तान मोटर्स का प्लांट साल 2014 से बंद पड़ा है. वहीं बंगाल की एक और बड़ी कंपनी डनलप इंडिया जिसकी कभी पूरे देश में तूती बोलती थी इस कंपनी का प्लांट लंबे समय से बंद पड़ा है.

टाटा, अंबानी, बिड़ला सबका हुआ बंगाल से मोहभंग!

जानकारों के मुतबिक जब किसी राज्य में निवेश आना बंद हो जाए और जो चल रहा है वो भी रुक जाए तो हालात खराब होना लाजिमी है. जानकारों के मुताबिक बंगाल की इंडस्ट्रियल गिरावट किसी एक कंपनी की वजह से नहीं, बल्कि पुरानी इंडस्ट्री को अपडेट न करना, नई टेक्नोलॉजी अपडेट की कमी होना और आर्थिक और नीतिकरण का न होने का मिलाजुला असर है. इसी का असर हुआ कि बंगाल की कई बड़ी कंपनियां बंगाल छोड़कर गुजरात और महाराष्ट्र में शिफ्ट हो गई. इसका सबसे बड़ा उदाहरण टाटा की ड्रीम प्रोजेक्ट नैनौ थी. जिसे रतन टाटा बंगाल के सिंगुर में लगाना चाहते थे. लेकिन साल 2008 में प्रोजेक्ट कैसिंल होने के कारण नैनो गुजरात के सानंद में शिफ्ट हो गया. और आज गुजरात का सानंद की गिनती देश के बड़े ऑटो हब के रुप में की जाती है. वहीं सिगरेट बनाने वाली दिग्गज कंपनी ITC का बेस भी बंगाल की राजधानी कोलकाता हुआ करती थी जो बाद में गुजरात और महाराष्ट्र में ज्यादा सक्रिय हो गई. पेट्रोकैमिकल की दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्री ने भी बंगाल में धीरेधीरे अपनी प्रेजेंस कम करके इसे गुजरात के जामनगर बढ़ाया. टाटा अंबानी के अलावा बिड़ला ग्रुप ने भी बंगाल में अपने पुराने यूनिट्स को बंद करके गुजरात और महाराष्ट्र में शिफ्ट कर दिया. अगर केवल अकेले नैनो बंगाल में आती तो इससे करीब 10,000 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सकता था.

Bangal Economy

जूट इंडस्ट्री पर सबसे तगड़ी मार

ये तो हुई दिग्गज कंपनियों की बात अब थोड़ा सेक्टर वाइज समझते हैं कि कैसे बंगाल धीरेधीरे विकास के मोर्चे पर पिछड़ता चला गया. बंगाल के लिए जूट इंडस्ट्री एक समय में कमाई का सबसे बड़ा जरिया हुआ करती थी. लेकिन दर्जन भर बड़ी जूट मिल्स या तो बंद हो गई या उनमें काम ठप हो गया. यूं कहे कि धीरेधीरे बंगाल की जूट इंडस्ट्री कोलैप्स कर गई. बंगाल की सबसे बड़ी जूट कंपनी नेशनल जूट मैन्युफैक्चर कॉरपोरेशन साल 2018 से पूरी तरह से बंद पड़ी हुई है. वहीं यूनियन जूट मिल्स, एलेक्जेन्ड्रा जूट मिल, कनिशन जूट मिल, खारदाह जूट मिल, भी पूरी तरह बंद हो चुकी है. वहीं बंगाल की एक बड़ी जूट मिल जिसकी बारबार खुलने बंद होने की स्थिति बार बार देखने को मिलती रहती है. बंगाल की ऐतिहासिक मिल पोर्ट ग्लोस्टर की बात करें तो यह भी पूरी तरह से निष्क्रिय हो चुकी है.

फाइनेंस और ऑटो सेक्टर का भी हुआ बुरा हाल

जूट के अलावा बंगाल की फाइनेंस सेक्टर पर तब मार पड़ी जब साल 2013 में Saradha Group का घोटाला सामने आया. इस घोटाले के बाद यह सेक्टर पूरी तरह से ढह गई. Saradha घोटाले का घाव अभी भरा भी नहीं था कि एक और घोटाला रोज वैली ग्रुप का सामने आया. जिसके बाद से इसका ऑपरेशन भी बंद कर दिया गया. बंगाल की खराब हालत की हकीकत ये है कि यहां हजारों MSME बंद पड़े हैं. पुरानी दिग्गज इंजीनियरिंग कंपनियां धीरेधीरे खत्म हो चुकी है. जूट सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ जिसका खामियाजा राज्य के साथसाथ जनता को मिला. जूट और फाइनेंस के अलावा ऑटो, इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स की भी हालत खराब हो चुकी है. देश की सबसे दिग्गज ऑटो कंपनी कहलाने वाली हिनदुस्तान मोटर्स का प्लांट साल 2014 से बंद पड़ा है.

बंगाल की इकोनॉमी

क्या अब होगा बेड़ापार

अब बंगाल में बीजेपी की सरकार आने वाली है ऐसे में जानकार मान रहे हैं कि जैसे उत्तर प्रदेश को निवेश का नया हब बनाया गया वैसा ही कुछ कायाकल्प बंगाल के साथ भी किया जा सकता है.जानकारों का मानना है कि कोई भी बिजनेसमैन अपना निवेश वहां करता है जहां उसे हर तरह की सहुलियत मिल सके. दरअसल बंगाल से जो कंपनियां बाहर शिफ्ट हुई वो भागी नहीं बल्कि अपना निवेश वहां किया जहां काम करने में आसानी हो. इसका सबसे बड़ा उदाहरण टाटा मोटर्स रह चुकी है.

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