BusinessIndia

Explainer: समुद्र में तूफान, लेकिन बीमा का कवच तैयार! क्या है BMIP, क्यों है इसकी जरूरत?

Satya Report: समुद्री व्यापार ग्लोबल अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, लेकिन जब भूराजनीतिक तनाव बढ़ता है तो सबसे पहले असर जहाज़रानी पर पड़ता है. हाल ही में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़े तनाव के चलते युद्धजोखिम प्रीमियम में भारी उछाल और बीमा कवर के रद्द होने की घटनाओं ने भारत जैसे आयातनिर्यात पर निर्भर देश के लिए खतरे की घंटी बजा दी. इसी चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने Bharat Maritime Insurance Pool बनाने की पहल की है, ताकि कठिन हालात में भी भारतीय व्यापार को सस्ता और भरोसेमंद बीमा मिल सके. आइए आपको इसके बारे में डिटेल से बताते हैं कि यह क्या है और क्यों जरूरी है?

Explainer: समुद्र में तूफान, लेकिन बीमा का कवच तैयार! क्या है BMIP, क्यों है इसकी जरूरत?
Explainer: समुद्र में तूफान, लेकिन बीमा का कवच तैयार! क्या है BMIP, क्यों है इसकी जरूरत?

ग्लोबल लेबल पर बढ़ते तनाव, खासतौर पर मिडिल ईस्ट में अस्थिरता ने समुद्री बीमा की अहमियत को फिर से सामने ला दिया है. होर्मुज जैसे संवेदनशील समुद्री मार्गों से गुजरने वाले जहाजों के लिए युद्धजोखिम प्रीमियम में 300% तक की बढ़ोतरी और कई अंतरराष्ट्रीय बीमाकर्ताओं द्वारा कवर वापस लेने की घटनाओं ने भारत के लिए जोखिम बढ़ा दिया है. ऐसे में Bharat Maritime Insurance Pool एक रणनीतिक कदम के रूप में उभर रहा है.

इतने करोड़ का है प्लान

सरकार ने 12,980 करोड़ रुपये की सॉवरेन गारंटी के साथ इस घरेलू बीमा पूल को मंजूरी दी है. इसका मकसद भारतीय बंदरगाहों तक आनेजाने वाले जहाजों को सस्ती और निरंतर बीमा सुविधा देना है, खासकर तब जब वैश्विक बीमा बाजार अनिश्चित हो. अभी तक भारतीय जहाज मालिक सुरक्षा और क्षतिपूर्ति बीमा के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी क्लबों पर निर्भर हैं, जिनका संचालन लंदन जैसे ग्लोबल केंद्रों से होता है और जिनका अनुभव 150 वर्षों से अधिक पुराना है.

BMIP के लिए चुनौतियां

बिजनेस टुडे की रिपोर्ट में एक्सपर्ट बताते हैं कि BMIP की सफलता आसान नहीं होगी. इसे वैश्विक स्तर पर भरोसा जीतने के लिए मजबूत कानूनी ढांचा, पर्याप्त फंडिंग और प्रभावी रिइंश्योरेंस सपोर्ट की जरूरत होगी. साथ ही, भारतीय जहाज मालिकों की सक्रिय भागीदारी भी बेहद जरूरी है, क्योंकि बिना पर्याप्त जोखिम पूल के यह मॉडल टिकाऊ नहीं बन पाएगा.

भारत का वैश्विक शिपिंग में योगदान अभी मात्र 0.8% है, लेकिन हर साल विदेशी बीमाकर्ताओं को भारी प्रीमियम चुकाना पड़ता है. BMIP इस निर्भरता को कम करने और देश के भीतर बीमा क्षमता विकसित करने की दिशा में अहम कदम हो सकता है. अगर इसे सही रणनीति, विशेषज्ञता और वैश्विक मानकों के साथ लागू किया गया, तो यह न केवल भारतीय जहाजरानी उद्योग को मजबूती देगा बल्कि संकट के समय व्यापार को सुरक्षित रखने वाला मजबूत कवच भी साबित होगा.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply