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किसानों ने एक क्विंटल प्याज के लिए मांगे 3000 रुपये, बोले- मौजूदा खरीद कीमत पर लागत निकलना भी मुश्किल

महाराष्ट्र के किसानों ने केंद्र सरकार द्वारा प्याज खरीद के मानकों में दी गई ढील का स्वागत किया है, लेकिन उनका कहना है कि इससे उन्हें कोई खास राहत नहीं मिलेगी। किसानों ने सरकार से प्याज के लिए 3000 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम खरीद मूल्य तय करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ द्वारा लगभग 1,580 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही खरीद किसानों की लागत निकालने के लिए भी पर्याप्त नहीं है। 

किसानों ने एक क्विंटल प्याज के लिए मांगे 3000 रुपये, बोले- मौजूदा खरीद कीमत पर लागत निकलना भी मुश्किल
किसानों ने एक क्विंटल प्याज के लिए मांगे 3000 रुपये, बोले- मौजूदा खरीद कीमत पर लागत निकलना भी मुश्किल

सरकार ने प्याज खरीद के लिए आकार और गुणवत्ता संबंधी मानकों में दी ढील

केंद्र सरकार ने प्याज खरीद के लिए आकार और गुणवत्ता संबंधी मानकों में ढील दी है। इसके तहत स्वीकार्य आकार सीमा को 4565 मिमी. से बढ़ाकर 3570. मिमी कर दिया गया है। इसके साथ ही रंग, छिलके की खामियों और हल्की धूप से हुई क्षति जैसी गुणवत्ता संबंधी शर्तों को भी आसान बनाया गया है। हालांकि, किसान नेताओं का कहना है कि मुख्य समस्या खरीद मानकों की नहीं, बल्कि कम कीमतों की है। 

नियमों में ढील के बावजूद घाटे में किसान

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के नासिक जिला अध्यक्ष जयदीप भदाने ने कहा कि नियमों में ढील दी गई है, लेकिन किसान अब भी घाटे में हैं। असली सवाल ये है कि प्याज के दाम कब बढ़ेंगे। उन्होंने बताया कि पहले की ग्रेडिंग व्यवस्था में अगर कोई किसान 30 क्विंटल प्याज खरीद केंद्र पर लाता था, तो उसमें से केवल लगभग 25 क्विंटल ही स्वीकार किए जाते थे और बाकी प्याज उसे कम कीमत पर बाजार में बेचना पड़ता था।

1,500 रुपये प्रति क्विंटल की सब्सिडी की भी मांग

संघ के अध्यक्ष भरत दिघोले ने कहा कि प्याज उत्पादन की औसत लागत लगभग 1,800 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि किसानों को इससे कम कीमत पर फसल बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उनके अनुसार, उत्पादन लागत से कम दाम मिलने से किसान आर्थिक संकट में फंस रहे हैं। इसके अलावा, किसानों ने पिछले 45 महीनों के दौरान कम कीमत पर प्याज बेचने वाले किसानों को 1,500 रुपये प्रति क्विंटल की सब्सिडी देने की मांग भी की है। 

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