भारत में धार्मिक कथा और आध्यात्मिक कार्यक्रमों का अपना एक बड़ा दर्शक वर्ग है. समय के साथ कथा वाचन का स्वरूप भी बदला है और इसके साथ कथावाचकों की सार्वजनिक पहचान का दायरा बढ़ा है. अब कथा केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, लाइव प्रसारण और भक्ति सामग्री के जरिए भी बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचती है. इस बदलते दौर में जया किशोरी, देवी चित्रलेखा, देवी कृष्णप्रिया, पलक किशोरी और देवी नेहा सारस्वत जैसी युवा महिला कथावाचिकाएं चर्चा में हैं.

देवी कृष्णप्रिया की अलग पहचान
इन नामों में देवी कृष्णप्रिया का सफर खास तौर पर ध्यान खींचता है. वह कम उम्र से धार्मिक प्रवचन और कथा वाचन से जुड़ी रही हैं. श्रीमद्भागवत कथा के अलावा उनके कार्यक्रमों में रामकथा और शिव महापुराण जैसे धार्मिक विषय भी शामिल रहे हैं. उनकी कथा गतिविधियां भारत तक सीमित नहीं हैं और लंदन, सिंगापुर तथा कनाडा में भी उनके धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होने की जानकारी प्रकाशित हुई है.
देवी कृष्णप्रिया के कथा कार्यक्रमों की सबसे अहम बात यह है कि उनके मानदेय का कोई निश्चित सार्वजनिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है. इसलिए उनकी कमाई को किसी तय रकम से जोड़ना सही नहीं होगा. दूसरी ओर, उनके कथा कार्यक्रमों और डिजिटल माध्यम पर मौजूद सामग्री ने उनके दर्शक वर्ग को आयोजन स्थल से आगे बढ़ाया है.
जया किशोरी का मानदेय
जया किशोरी इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा चर्चित नामों में हैं. विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में उनकी एक कथा के लिए करीब 9 से 10 लाख रुपए के मानदेय का उल्लेख मिलता है. कुछ रिपोर्टों में 9.5 लाख रुपए का आंकड़ा भी दिया गया है. कथा के अलावा भजन, सार्वजनिक कार्यक्रम और डिजिटल सामग्री भी उनकी सार्वजनिक गतिविधियों का हिस्सा हैं. इसी वजह से उनके आर्थिक मॉडल को केवल कथा से मिलने वाले मानदेय तक सीमित करके देखना पूरी तस्वीर नहीं देता.
देवी चित्रलेखा का अलग मॉडल
देवी चित्रलेखा का मॉडल अलग बताया जाता है. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वह कथा के लिए कोई निश्चित व्यक्तिगत मानदेय नहीं लेतीं और उनके कार्यक्रमों में मुख्य रूप से आयोजन तथा स्टाफ से जुड़े खर्च की व्यवस्था की जाती है. उनका नाम गौसेवा और सामाजिक कार्यों से भी जुड़ा रहा है.
पलक किशोरी और नेहा सारस्वत
पलक किशोरी भी कम उम्र में कथा वाचन शुरू करने के कारण चर्चा में आईं. प्रकाशित जानकारी के अनुसार उन्होंने 2021 में सार्वजनिक रूप से कथा वाचन शुरू किया था. उनके लिए भी किसी निश्चित व्यक्तिगत मानदेय की सार्वजनिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है. वहीं देवी नेहा सारस्वत की कथाओं में श्रीमद्भागवत और रामायण प्रमुख विषय रहे हैं. एक पुरानी रिपोर्ट के हवाले से उनके सात दिवसीय कार्यक्रम के लिए करीब 3 लाख रुपए के मानदेय का उल्लेख मिलता है. यह आंकड़ा पुराना है, इसलिए इसे वर्तमान दर नहीं माना जाना चाहिए.
बदल रहा है कथा वाचन का आर्थिक मॉडल
इन महिला कथावाचिकाओं के उदाहरण बताते हैं कि कथा वाचन का आर्थिक मॉडल एक जैसा नहीं है. कहीं निश्चित मानदेय की बात सामने आती है, कहीं आयोजन और टीम का खर्च प्रमुख होता है और कहीं सार्वजनिक रूप से कोई रकम उपलब्ध ही नहीं है.
देवी कृष्णप्रिया के मामले में भी यही बात महत्वपूर्ण है. उनकी पहचान केवल कथा के मानदेय से नहीं, बल्कि कथा वाचन, डिजिटल पहुंच, विदेशों में कार्यक्रम और धार्मिक कंटेंट के व्यापक दायरे से बन रही है. यही बदलाव आज के आध्यात्मिक कार्यक्रमों को एक नए मीडिया और बिजनेस मॉडल से जोड़ रहा है.



