
अमृत विचार : बरेली स्टेडियम में चल रही होमगार्ड भर्ती की दौड़ में शामिल अभ्यर्थियों की शैक्षिक योग्यता ने बेरोजगारी की तस्वीर का दूसरा पहलू भी उजागर कर दिया है। कोई बीए पास है तो कोई एमए । कई युवा दरोगा भर्ती समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी किस्मत आजमा चुके हैं, लेकिन नौकरी नहीं लगी। होमगार्ड का मासिक मानदेय 27 हजार रुपये है। इसलिए डिग्रीधारक बेरोजगार युवा होमगार्ड बनने को भी तैयार हैं। वह भर्ती में जीजान से डटे हैं।
शाहजहांपुर के भीरा थाना क्षेत्र के पड़रिया तिलकपुर निवासी अनुराग शुक्ला एमए हैं। वह शुक्रवार को होमगार्ड भर्ती की दौड़ में शामिल हुए, लेकिन 12वें राउंड के दौरान गिरकर घायल हो गए। इस तरह होमगार्ड बनने की उनकी ख्वाहिश भी अधूरी रह गई।
मुरादाबाद के भगतपुर थाना क्षेत्र के महेशपुर खेमा निवासी बीए पास रमेश सिंह भी होमगार्ड भर्ती की उम्मीद लेकर आए थे। दौड़ पूरी करने के बाद अचानक गिर पड़े और घायल हो गए।
लखीमपुर के भीरा थाना क्षेत्र निवासी विनीत भी बीए पास हैं। वह भी उम्मीद लेकर आए थे, लेकिन चौथे राउंड में गिरकर जख्मी हो गए। बोले कि हमारी कई दोस्त दुकानों पर आठदस हजार रुपये की नौकरी कर रहे हैं। उन्हें देखकर सोचता हूं की होमगार्ड की नौकरी उससे कई गुना अच्छी है। फिलहाल जिला अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।
इसे भी पढ़ें



