TrendingUttar Pradesh

कॉलेज का पहला दिन: घबराहट से आत्मविश्वास तक का यादगार सफर

कॉलेज का पहला दिन जिंदगी के उन दिनों में से एक होता है, जिसे चाहकर भी भुलाया नहीं जा सकता। मेरे लिए भी बीबीए छात्रा के रूप में कॉलेज का पहला दिन उत्साह, घबराहट और अनजाने सपनों से भरा हुआ था। स्कूल की चारदीवारी से निकलकर कॉलेज की दुनिया में कदम रखने का एहसास ही कुछ अलग था। 

सुबह से ही मन में एक अजीबसी हलचल थी। नए कपड़े पहनकर, जरूरी सामान से भरा बैग लेकर जब घर से निकली तो मन में बारबार यही सवाल घूम रहा था कि कॉलेज कैसा होगा, शिक्षक कैसे होंगे और क्या मैं नए दोस्तों के बीच सहज हो पाऊंगी। कॉलेज के मुख्य द्वार पर पहुंचते ही विद्यार्थियों की भीड़ देखकर मेरी धड़कन थोड़ी तेज हो गई। कोई अपने दोस्तों से मिल रहा था, कोई कक्षा का रास्ता पूछ रहा था तो कोई मोबाइल से तस्वीरें खींच रहा था।

कैंपस में प्रवेश करते ही सबसे पहले मेरी नजर कॉलेज की इमारत, पुस्तकालय और आसपास के हरेभरे वातावरण पर पड़ी। स्कूल की तुलना में यहां सब कुछ अधिक स्वतंत्र और बड़ा लग रहा था। कुछ देर बाद अपनी कक्षा खोजते हुए मैं कमरे तक पहुंची। वहां पहले से कई छात्रछात्राएं बैठे हुए थे। शुरुआत में मैं थोड़ी संकोच में थी और चुपचाप अपनी सीट पर बैठ गई।

कुछ ही देर में हमारी पहली कक्षा शुरू हुई। शिक्षक ने मुस्कुराते हुए सभी विद्यार्थियों का स्वागत किया और बीबीए पाठ्यक्रम के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि कॉलेज की पढ़ाई केवल किताबों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह हमें निर्णय लेना, नेतृत्व करना और भविष्य की चुनौतियों का सामना करना भी सिखाती है। उनकी बातें सुनकर मेरे भीतर एक नया आत्मविश्वास पैदा हुआ।

ब्रेक के दौरान मेरी मुलाकात कुछ सहपाठियों से हुई। थोड़ी झिझक के बाद बातचीत शुरू हुई और देखते ही देखते हम एकदूसरे के नाम और रुचियां जानने लगे। उस दिन घर लौटते समय सुबह वाली घबराहट पूरी तरह गायब हो चुकी थी।

बीबीए छात्रा के रूप में कॉलेज का वह पहला दिन मेरे लिए केवल नए संस्थान में प्रवेश का दिन नहीं था, बल्कि अपने सपनों की ओर बढ़ाए गए पहले कदम जैसा था। आज भी उस दिन को याद करती हूं तो चेहरे पर मुस्कान और मन में वही उत्साह लौट आता है।

तनिष्का सिंह, छात्रा, बीबीए, SRMSCET बरेली

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply