
नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं की ओर से पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने का मामला अब चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका के राजनीतिक भविष्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि पीस बॉन्ड साइन करने के बाद इन नेताओं की जनता के बीच छवि प्रभावित हुई है। उनके मुताबिक, यदि इन नेताओं ने दोबारा प्रदर्शन किया और पीस बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन हुआ तो उन्हें कई महीनों तक जेल में रहना पड़ सकता है।
मार्कंडेय काटजू ने एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करना आंदोलनकारियों के लिए बड़ा फैसला है। उन्होंने इसकी तुलना अंग्रेजों के शासनकाल में क्रांतिकारियों से माफी मंगवाने की घटनाओं से की। काटजू का कहना है कि ऐसे फैसलों से जनता के बीच नेताओं की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है।
पीस बॉन्ड को लेकर काटजू ने क्यों उठाए सवाल?
पूर्व जज ने कहा कि जिन नेताओं ने पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर किए हैं, उन्होंने लिखित रूप में भविष्य में आंदोलन नहीं करने का वादा किया है। ऐसे में यदि वे दोबारा प्रदर्शन करते हैं तो पुलिस इसे शांति भंग करने की कोशिश मान सकती है और बॉन्ड के उल्लंघन के आधार पर कार्रवाई हो सकती है।
उन्होंने सौरभ दास और आशुतोष रांका का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों पहले भी करीब एक सप्ताह जेल में रह चुके हैं। अगर उन्होंने दोबारा आंदोलन किया तो उन्हें लंबी अवधि तक जेल जाना पड़ सकता है। काटजू के मुताबिक, जेल जाने के डर से अब इन नेताओं के आंदोलन करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
अंग्रेजों के समय के माफीनामे से की तुलना
मार्कंडेय काटजू ने पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने की तुलना अंग्रेजी शासन के दौरान क्रांतिकारियों से लिखवाए जाने वाले माफीनामों से की। उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग जनता के अधिकारों के लिए आंदोलन करने की बात करते हैं, वे लिखित आश्वासन देकर पीछे कैसे हट सकते हैं।
उन्होंने दावा किया कि इस फैसले के बाद जनता का भरोसा इन नेताओं पर पहले जैसा नहीं रह सकता। हालांकि, यह उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक टिप्पणी है।
धर्मेंद्र प्रधान और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर भी उठाए सवाल
इंटरव्यू के दौरान काटजू ने सीजेपी की ओर से उठाई गई अन्य राजनीतिक मांगों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि किसी मंत्री या अधिकारी के इस्तीफे से अपने आप व्यवस्था में सुधार नहीं हो जाता।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यदि एक शिक्षा मंत्री की जगह दूसरा मंत्री आ जाता है तो इससे आम लोगों की जिंदगी में क्या बदलाव आएगा? उनके मुताबिक, पेपर लीक जैसी समस्याओं की बड़ी वजह व्यवस्था में मौजूद भ्रष्टाचार है और जब तक इस समस्या का समाधान नहीं होगा, तब तक केवल मंत्री बदलने से स्थिति नहीं बदलेगी।
इसी तरह उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर भी सवाल उठाया। काटजू ने कहा कि राजनीति में किसी भी मांग या फैसले का आकलन इस आधार पर होना चाहिए कि उससे आम जनता का जीवन स्तर बेहतर होगा या नहीं।
काटजू के बयान के बाद फिर चर्चा में सीजेपी का आंदोलन
पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर और आंदोलन को लेकर मार्कंडेय काटजू की टिप्पणी ने सीजेपी के नेताओं की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है। उनके बयान में जहां नेताओं की सार्वजनिक छवि और आंदोलन की क्षमता पर सवाल उठाए गए, वहीं उन्होंने राजनीति में व्यक्ति के इस्तीफे के बजाय व्यवस्था में सुधार को प्राथमिकता देने की बात भी कही।
Satya Report डिस्क्लेमर: इस खबर में मार्कंडेय काटजू के इंटरव्यू में दिए गए विचारों और उपलब्ध रिपोर्टों को प्रस्तुत किया गया है। पीस बॉन्ड की कानूनी शर्तों और संभावित कार्रवाई का अंतिम निर्धारण संबंधित कानून और परिस्थितियों के आधार पर होगा।



