जो महिलाएं ओल्ड टैक्स रिजीम चुनती हैं, वे सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट का फायदा ले सकती हैं. इसके तहत कई लोकप्रिय निवेश विकल्प शामिल हैं.

- पब्लिक प्रोविडेंट फंड
- कर्मचारी भविष्य निधि
- इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम
- टैक्स सेविंग फिक्स्ड डिपॉजिट
- लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम
- सुकन्या समृद्धि योजना
- होम लोन के मूलधन का भुगतान
CA डॉ. सुरेश सुराना के मुताबिक, ये निवेश न सिर्फ टैक्सेबल इनकम कम करते हैं, बल्कि लंबे समय में बचत और संपत्ति बनाने में भी मदद करते हैं.
NPS से अतिरिक्त टैक्स छूट
नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS में निवेश करने पर 50,000 रुपये तक की अतिरिक्त टैक्स छूट मिल सकती है. यह छूट 80C की 1.5 लाख रुपये की सीमा से अलग होती है. डॉ. सुराणा का कहना है कि नौकरी करने वाली महिलाओं के लिए NPS रिटायरमेंट प्लानिंग, लंबी अवधि की बचत और टैक्स बचत तीनों के लिहाज से फायदेमंद हो सकता है.
हेल्थ इंश्योरेंस पर भी टैक्स बचत
मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर सेक्शन 80D के तहत टैक्स छूट मिलती है.
- खुद, पति और बच्चों के लिए 25,000 रुपये तक
- मातापिता के लिए अतिरिक्त 25,000 रुपये तक
अगर बीमित व्यक्ति सीनियर सिटीजन है, तो यह सीमा 50,000 रुपये तक हो जाती है. इसमें हेल्थ चेकअप का खर्च भी तय सीमा के भीतर शामिल किया गया है। इससे मांएं बच्चों और बुजुर्ग मातापिता की हेल्थ सिक्योरिटी भी बेहतर तरीके से संभाल सकती हैं.
बच्चों की ट्यूशन फीस पर राहत
भारत में बच्चों की पढ़ाई के लिए दी गई ट्यूशन फीस पर भी सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट मिल सकती है. यह सुविधा उन मांओं के लिए उपयोगी हो सकती है, जो बच्चों की पढ़ाई और टैक्स प्लानिंग दोनों साथसाथ करना चाहती हैं.
बेटी के लिए सुकन्या समृद्धि योजना
बेटी के नाम पर खोला गया सुकन्या समृद्धि योजना अकाउंट सबसे ज्यादा टैक्स बचाने वाले निवेश विकल्पों में माना जाता है. इसमें निवेश पर टैक्स छूट मिलती है, साथ ही मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी राशि भी टैक्स फ्री रहती है.
ओल्ड और न्यू टैक्स रिजीम में सही चुनाव जरूरी
ध्यान देने वाली बात यह है कि ऊपर बताए गए ज्यादातर टैक्स लाभ केवल ओल्ड टैक्स रिजीम में ही मिलते हैं. अगर कोई टैक्सपेयर न्यू टैक्स रिजीम चुनता है, तो उसे इनमें से कई छूट नहीं मिलतीं. इसलिए एक्सपर्ट्स का कहना है कि FY27 के लिए टैक्स प्लानिंग करते समय मांओं को अपनी आय, निवेश की जरूरत और भविष्य के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर ओल्ड और न्यू टैक्स रिजीम के बीच सही फैसला करना चाहिए.



