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सर्व पितृ अमावस्या 2026: पर बन रहा गजच्छाया योग, ऐसे करें पितरों को विदाई, ये 3 उपाय माने जाते हैं खास’

सर्व पितृ अमावस्या 2026: पर बन रहा गजच्छाया योग, ऐसे करें पितरों को विदाई, ये 3 उपाय माने जाते हैं खास’

सर्व पितृ अमावस्या को पितृ पक्ष का अंतिम दिन माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन उन सभी पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती या जिनका किसी कारण से श्राद्ध नहीं हो पाया हो। इस दिन पितरों को विधि-विधान से विदाई भी दी जाती है।

इस बार सर्व पितृ अमावस्या शनिवार के दिन पड़ रही है। इसके साथ ही गजच्छाया योग बनने की भी बात कही जा रही है। ऐसे में अमावस्या का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है।

7 अक्टूबर से शुरू होंगे अंतिम श्राद्ध

7 अक्टूबर को आश्विन कृष्ण द्वादशी तिथि रात 11:17 बजे तक रहेगी। इस दिन द्वादशी का श्राद्ध किया जाएगा। धार्मिक परंपरा के अनुसार इस तिथि पर संन्यासी पितरों का श्राद्ध करने की मान्यता है।

इसके बाद 8 अक्टूबर को त्रयोदशी तिथि रात 10:17 बजे तक रहेगी और इस दिन त्रयोदशी का श्राद्ध होगा। वहीं 9 अक्टूबर को चतुर्दशी तिथि रात 9:36 बजे तक रहेगी। चतुर्दशी के दिन उन लोगों का श्राद्ध करने की परंपरा बताई जाती है, जिनकी मृत्यु दुर्घटना, शस्त्र, विष या किसी अन्य असामयिक कारण से हुई हो।

10 अक्टूबर को सर्व पितृ अमावस्या

10 अक्टूबर 2026 को शनिवार के दिन आश्विन कृष्ण अमावस्या रहेगी, जो रात 9:20 बजे तक रहेगी। इसी दिन सर्व पितृ अमावस्या, पितृ विसर्जन और शनैश्चरी अमावस्या का संयोग बन रहा है।

जिन पितरों की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है, उनके लिए अमावस्या के दिन श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है। इसी दिन पितृ पक्ष का समापन भी माना जाता है।

क्या है गजच्छाया योग?

धार्मिक ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार जब आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी या अमावस्या के समय सूर्य हस्त नक्षत्र में और चंद्रमा मघा नक्षत्र में स्थित हों, तब गजच्छाया योग बनने की बात कही जाती है। इस बार यह योग सूर्योदय से सूर्यास्त तक रहने की मान्यता है।

अमावस्या की शाम करें ये 3 उपाय

1. दक्षिण दिशा में जलाएं चार मुख वाला दीपक

सर्व पितृ अमावस्या की शाम पितरों की विदाई के लिए चार मुख वाला दीपक जलाने की परंपरा है। इसे दक्षिण दिशा की ओर रखकर पितरों से उनके कल्याण और सद्गति की प्रार्थना की जाती है।

2. पीपल के पेड़ के पास दीपक जलाएं

अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की जड़ में दीपक जलाने की भी धार्मिक मान्यता है। घी, सरसों के तेल या तिल के तेल का दीपक जलाया जा सकता है। इसके साथ पीपल को जल अर्पित कर परिक्रमा करने की परंपरा भी है। कई लोग इस दिन ब्राह्मण भोज और सफेद वस्त्र का दान भी करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं में अलग-अलग दीपकों को अलग-अलग फल से जोड़ा गया है। घी का दीपक सुख-समृद्धि, सरसों के तेल का दीपक स्वास्थ्य और तिल के तेल का दीपक पितरों की प्रसन्नता से संबंधित माना जाता है।

3. जरूरत की वस्तुओं का दान करें

सर्व पितृ अमावस्या पर जरूरतमंद लोगों को कपड़े, छाता, नमक, जूते-चप्पल और छड़ी जैसी उपयोगी वस्तुओं का दान करने की परंपरा भी बताई जाती है। मान्यता है कि श्रद्धा से किया गया दान पितरों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक होता है।

श्राद्ध और तर्पण के शुभ मुहूर्त

सर्व पितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध और तर्पण के लिए दिए गए प्रमुख समय इस प्रकार हैं:

  • पहला मुहूर्त: सुबह 11:34 बजे से दोपहर 12:21 बजे तक
  • दूसरा मुहूर्त: दोपहर 12:21 बजे से 1:07 बजे तक

पितरों का श्राद्ध, तर्पण और दान अपनी पारिवारिक परंपरा तथा स्थानीय पंचांग के अनुसार करना उचित माना जाता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई धार्मिक और ज्योतिषीय जानकारियां मान्यताओं एवं परंपराओं पर आधारित हैं। इन्हें निश्चित वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। तिथि और मुहूर्त में स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है।

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