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भूलने की आदत को हमेशा’ न समझें बीमारी, उम्र बढ़ने के साथ होने वाले बदलाव और अल्जाइमर में ऐसे करें फर्क.

भूलने की आदत को हमेशा’ न समझें बीमारी, उम्र बढ़ने के साथ होने वाले बदलाव और अल्जाइमर में ऐसे करें फर्क.

नई दिल्ली: उम्र बढ़ने के साथ कई लोगों को छोटी-छोटी बातें भूलने की समस्या होने लगती है। सामान कहीं रखकर भूल जाना, किसी का नाम तुरंत याद न आना या किसी काम को कुछ देर बाद याद करना अक्सर सामान्य उम्र से जुड़े बदलावों का हिस्सा हो सकता है। लेकिन अगर भूलने की समस्या लगातार बढ़ रही है और इसका असर रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने लगा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

उम्र के साथ याददाश्त में होने वाले सामान्य बदलाव और अल्जाइमर या डिमेंशिया जैसी बीमारियों के बीच अंतर समझना जरूरी है। सामान्य स्थिति में व्यक्ति को कुछ समय बाद भूली हुई बात याद आ सकती है या किसी संकेत मिलने पर वह जानकारी दोबारा याद कर सकता है। इसके बावजूद उसकी रोजमर्रा की गतिविधियां आमतौर पर सामान्य रूप से चलती रहती हैं।

वहीं, अल्जाइमर जैसी बीमारी में भूलने की समस्या धीरे-धीरे बढ़ सकती है। व्यक्ति हाल में हुई घटनाओं, जरूरी बातचीत या बार-बार इस्तेमाल की जाने वाली चीजों के बारे में भूलने लग सकता है। कई बार एक ही सवाल बार-बार पूछना, परिचित कामों को करने में परेशानी होना या जाने-पहचाने लोगों और जगहों को पहचानने में दिक्कत भी दिखाई दे सकती है।

कब चिंता की जरूरत होती है?

अगर भूलने की समस्या इतनी बढ़ जाए कि व्यक्ति अपने रोजमर्रा के काम ठीक से न कर पाए, जरूरी चीजों का इस्तेमाल भूलने लगे, बातचीत या निर्णय लेने में लगातार परेशानी हो या व्यवहार में स्पष्ट बदलाव दिखाई देने लगे, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी हो सकता है।

हर भूलने की समस्या अल्जाइमर नहीं होती। तनाव, नींद की कमी, कुछ दवाएं और कई अन्य कारणों से भी याददाश्त प्रभावित हो सकती है। इसलिए केवल चीजें भूलने के आधार पर खुद से किसी बीमारी का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

अगर याददाश्त में लगातार गिरावट महसूस हो रही है या इसका असर सामान्य जीवन पर पड़ रहा है, तो चिकित्सकीय जांच

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