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​‘पैसे दो या बेटी भेजो…’, रायबरेली में लेखपाल पर महिला ने लगाए गंभीर आरोप, SDM जांच में पलट गई कहानी

Raebareli News Today: उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले से एक बेहद शर्मनाक और सनसनीखेज मामला सामने आया है. जिले के सरेनी ब्लॉक क्षेत्र अंतर्गत मलकेगांव में एक महिला ने राजस्व विभाग के लेखपाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं. महिला का दावा है कि कच्चा मकान गिरने के बाद सरकारी मुआवजा दिलाने की रिपोर्ट लगाने के नाम पर लेखपाल ने उससे पैसों की मांग की और रुपये न देने पर उसकी बेटी को भेजने की कथित अनुचित मांग रखी. हालांकि, इस मामले में पीड़िता की शिकायत के बाद हुई प्रशासनिक जांच रिपोर्ट में इन सभी आरोपों को निराधार और झूठा करार दिया गया है.

​‘पैसे दो या बेटी भेजो…’, रायबरेली में लेखपाल पर महिला ने लगाए गंभीर आरोप, SDM जांच में पलट गई कहानी

पीड़िता के अनुसार, कुछ दिनों से उसका कच्चा मकान गिरकर पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गया था. आर्थिक रूप से कमजोर पीड़िता को उम्मीद थी कि राजस्व विभाग से रिपोर्ट लगने के बाद उसे सरकार की ओर से राहत सहायता या मुआवजा मिल जाएगा. पीड़िता का आरोप है कि जब उसने क्षेत्रीय लेखपाल दिनेश सविता से संपर्क किया, तो रिपोर्ट लगाने के एवज में उससे पैसों की मांग की गई.

“पैसे नहीं तो बेटी को भेजो…” पीड़िता का गंभीर आरोप

पीड़िता ने अपनी शिकायत में दावा किया कि उसकी आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण जब उसने रुपये देने में असमर्थता जताई, तो आरोपी लेखपाल ने कथित तौर पर उस पर दबाव बनाया और बेटी को भेजने की घिनौनी मांग रख दी.

पीड़िता के अनुसार, लेखपाल ने कहा कि अगर काम करवाना है, तो या तो पैसे देने होंगे या फिर बेटी को भेजना होगा. इस आघात से आहत होकर पीड़िता ने मामले की लिखित शिकायत उच्चाधिकारियों से की और आरोपी लेखपाल दिनेश सविता के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई.

SDM जांच में आरोप पाए गए झूठे, इलाके में चर्चा गर्म

शिकायत का संज्ञान लेते हुए संबंधित उपजिलाधिकारी ने मामले की जांच कराई. हालांकि, जांच के बाद तैयार की गई रिपोर्ट में पीड़िता द्वारा लेखपाल पर लगाए गए सभी आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी और जांच आख्या में आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए झूठा बताया गया.

एक तरफ पीड़िता के गंभीर आरोप हैं और दूसरी तरफ प्रशासनिक जांच में लेखपाल को मिली क्लीन चिट, जिसके बाद यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है.

अब सवाल यह भी उठ रहे हैं कि यदि आरोप गलत थे तो शिकायत के पीछे की क्या वजह थी, और यदि आरोपों में सच्चाई थी तो जांच में पुष्टि क्यों नहीं हुई. मामले की अंतिम तस्वीर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई से ही साफ हो सकेगी.

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