नई दिल्ली दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को ‘स्वच्छ हवा, स्वस्थ दिल्ली’ के अंतर्गत आयोजित ओरिएंटेशन वर्कशॉप में मुख्य अतिथि के रूप में भागीदारी की। इस अवसर पर वर्ल्ड बैंक द्वारा परियोजना की तैयारी के लिए वित्तीय ग्रांट सुविधा की औपचारिक पुष्टि दिल्ली सरकार को सौंपी गई। पर्यावरण विभाग की यह महत्वाकांक्षी सात वर्षीय परियोजना वर्ल्ड बैंक और अन्य बहुपक्षीय संस्थाओं के सहयोग से लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के लक्ष्यों को गति देना है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि वायु प्रदूषण जैसी जटिल चुनौती से निपटने के लिए दिल्ली सरकार एक व्यापक, वैज्ञानिक और दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है। वायु गुणवत्ता में सुधार किसी एक विभाग का काम नहीं है बल्कि सभी विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

वर्कशॉप में दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री श्री प्रवेश साहिब सिंह, श्री आशीष सूद, सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा, भारत सरकार के आर्थिक विभाग के प्रतिनिधि, वर्ल्ड बैंक के कंट्री हेड श्री पॉल प्रोसी और वर्ल्ड बैंक के अन्य प्रतिनिधि सहित सभी संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। वर्कशॉप में वर्ल्ड बैंक के विशेषज्ञों ने ‘प्रोग्राम फॉर रिजल्ट्स ’ के तहत वित्तीय प्रबंधन, खरीद प्रक्रिया, पर्यावरण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मानकों और संस्थागत तैयारियों पर जानकारी दी। इसका उद्देश्य परियोजना से जुड़े विभागों और एजेंसियों को वर्ल्ड बैंक की प्रक्रियाओं और अंतरराष्ट्रीय मानकों से परिचित कराना था।
वर्कशॉप के दौरान तकनीकी मूल्यांकन और पैनल चर्चा में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए उठाए जा रहे प्रमुख कदमों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसमें परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने, सड़कों पर उड़ने वाली धूल को कम करने और ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़ी रणनीतियों पर विचारविमर्श किया गया। इस चर्चा में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति , परिवहन विभाग, दिल्ली नगर निगम , लोक निर्माण विभाग , नई दिल्ली नगरपालिका परिषद और दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने वर्कशॉप के दौरान कहा कि वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए पर्यावरण, परिवहन, पीडब्ल्यूडी, नगर निगम, डीपीसीसी, डीटीएल, दिल्ली जल बोर्ड इत्यादि के बीच मजबूत संस्थागत समन्वय तंत्र स्थापित किया गया है। ‘स्वच्छ हवा, स्वस्थ दिल्ली’ कार्यक्रम दिल्ली सरकार की उस सोच का हिस्सा है, जिसमें विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों को समान महत्व दिया गया है। तेजी से विकसित हो रही राजधानी में परिवहन, ऊर्जा, निर्माण, अपशिष्ट प्रबंधन और नागरिक सेवाओं के क्षेत्र में हो रहे बदलावों को एक साझा लक्ष्य के साथ जोड़ना समय की आवश्यकता है। इसी सोच के साथ ‘दिल्ली क्लीन एयर प्रोग्राम’ की परिकल्पना की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार की रणनीति साफ है, प्रदूषण के स्रोत पर रोक लगाना, डेटा के आधार पर निगरानी करना, तकनीक के जरिए नियमों का सख्ती से पालन कराना और लोगों की भागीदारी बढ़ाना। सरकार का लक्ष्य सिर्फ वायु गुणवत्ता सूचकांक में सुधार करना नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाना भी है। उन्होंने वर्ल्ड बैंक, भारत सरकार के आर्थिक कार्य विभाग और सभी संबंधित एजेंसियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार, वर्ल्ड बैंक और दिल्ली सरकार के बीच यह साझेदारी राजधानी के लिए स्वच्छ और स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘दिल्ली क्लीन एयर प्रोग्राम’ आने वाले वर्षों में देश के अन्य शहरों के लिए भी एक आदर्श मॉडल बनकर उभरेगा।
‘स्वच्छ हवा, स्वस्थ दिल्ली’ दिल्ली क्लीन एयर प्रोग्राम
यह परियोजना सितंबर 2026 से अगस्त 2033 तक दिल्ली के सभी जिलों में लागू की जाएगी। इसकी कुल अनुमानित लागत 8,300 करोड़ रुपये है, जिसमें 65 प्रतिशत वित्तीय लोन वर्ल्ड बैंक द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा, जबकि शेष 35 प्रतिशत राशि दिल्ली सरकार वहन करेगी। यह कार्यक्रम दो प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। पहला स्तंभ वायु गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली को सशक्त बनाने पर केंद्रित है। इसके तहत एक समर्पित प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट का गठन किया जाएगा, आधुनिक एयर क्वॉलिटी मॉनिटरिंग नेटवर्क, डेटा एनालिटिक्स और इंटीग्रेटेड कमांड ऐंड कंट्रोल सेंटर आधारित निगरानी प्रणाली विकसित की जाएगी और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही जनजागरूकता, प्रशिक्षण, तकनीकी नवाचार और इंडोगंगा के मैदानी राज्यों के साथ सहयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा। दूसरा स्तंभ प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने पर केंद्रित होगा। इसके अंतर्गत पुराने और अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने, सार्वजनिक परिवहन को सशक्त बनाने, अत्याधुनिक प्रदूषण जांच प्रणाली विकसित करने, सड़क और निर्माण स्थल, धूल पर नियंत्रण, कचरा संग्रहण में सुधार जैसे कदम उठाए जाएंगे।
इस अवसर पर दिल्ली के पर्यावरण मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता जी के दूरदर्शी नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को अपनी प्राथमिकता में रखा है। वर्ष 202627 के ग्रीन बजट के तहत एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के कुल बजट का लगभग 21 प्रतिशत हिस्सा स्वच्छ हवा, हरित दिल्ली और स्वच्छ यमुना के लिए समर्पित किया गया है। यह केवल वित्तीय आवंटन राजधानी के प्रत्येक नागरिक को बेहतर और स्वस्थ जीवन उपलब्ध कराने की सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि वायु प्रदूषण जैसी चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिक सोच, तकनीकी नवाचार और दीर्घकालिक योजना की आवश्यकता है। सरकार की प्रत्येक नीति और पहल का उद्देश्य वायु गुणवत्ता में ठोस सुधार लाने के साथसाथ सतत शहरी विकास को बढ़ावा देना है। वर्ल्ड बैंक के साथ दिल्ली सरकार की साझेदारी राजधानी की पर्यावरणीय यात्रा में एक नए और परिवर्तनकारी अध्याय की शुरुआत है। वर्ल्ड बैंक की वैश्विक विशेषज्ञता, तकनीकी मार्गदर्शन तथा संस्थागत सहयोग दिल्ली को स्वच्छ वायु और जलवायु अनुकूलन के लिए नवाचार आधारित और दीर्घकालिक समाधान विकसित करने में मदद करेगा। यह सहयोग दिल्ली को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को अपनाने और भविष्य की पीढ़ियों के लिए अधिक स्वच्छ, हरित और रहने योग्य शहर के रूप में विकसित करने का मार्ग प्रशस्त करेगा।



