नई दिल्ली : भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने गुपकर गैंग पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उसने एक बार फिर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के पीड़ितों के साथ खड़े होने के बजाय पाकिस्तान की भाषा बोलने का रास्ता चुना है।

चुघ ने कहा कि फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, मीरवाइज उमर फारूक, मणिशंकर अय्यर और अन्य नेताओं को भारत से पाकिस्तान के साथ बातचीत शुरू करने की मांग करने के बजाय पाकिस्तान को पत्र लिखकर आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर बंद करने, सीमा पार आतंकवाद और घुसपैठ रोकने, आतंकी संगठनों को मिलने वाली फंडिंग व पनाह खत्म करने तथा आतंकवाद को संरक्षण देने की जिम्मेदारी स्वीकार करने की मांग करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज पाकिस्तान दुनिया की “आतंकवाद की फैक्ट्री” बन चुका है। शांति की पहली शर्त भारत से बातचीत नहीं, बल्कि पाकिस्तान का आतंकवाद के ढांचे को पूरी तरह खत्म करना और आतंकियों को संरक्षण व वित्तीय सहायता बंद करना है।
तरुण चुघ ने दोहराया कि भारत की नीति बिल्कुल स्पष्ट है—“आतंक और बातचीत साथसाथ नहीं चल सकते।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ‘जीरो टॉलरेंस अगेंस्ट टेररिज्म’ की नीति पर अडिग है और जब तक पाकिस्तान अपने आतंकी ढांचे के खिलाफ विश्वसनीय एवं सत्यापित कार्रवाई नहीं करता, तब तक सामान्य द्विपक्षीय वार्ता का कोई सवाल ही नहीं उठता।



