
बांस की बल्लियों पर टिकी काली तिरपाल, ढहती मिट्टी की दीवारें और दो दशकों का संताप- पटमदा प्रखंड के झुंझका गांव में पूर्व सांसद सुनील महतो हत्याकांड के आरोपी और 15 लाख रुपये के इनामी माओवादी एरिया कमांडर रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन के घर का यही मंजर है।
कोलकाता में सचिन के आत्मसमर्पण करने की खबर जैसे ही गांव की पगडंडियों से होती हुई इस जर्जर चौखट तक पहुंची, उसके वृद्ध माता-पिता की पथराई आंखों में वर्षों बाद सुकून के आंसू छलक पड़े।
फुटबॉल टीम में चयन न होने से बदला जीवन का रास्ता
पिता सनातन मार्डी ने भावुक होकर बताया कि पटमदा हाई स्कूल से पढ़ाई करने वाला रामप्रसाद बचपन से ही मेधावी और फुटबॉल का बेहतरीन खिलाड़ी था।
हालांकि, टाटा की टीम में चयन न होने के कारण वह गहरे अवसाद में चला गया और मैट्रिक की परीक्षा से ठीक पहले घर छोड़कर नक्सलियों के साथ चला गया।
पिता ने कहा कि अफसर बनने का सपना देखने वाला बेटा रास्ते से भटक गया। अब जीवन के इस अंतिम पड़ाव पर बस उसे एक बार सीने से लगाने का इंतजार है।
अभाव में बीता सचिन के परिवार का जीवन
मां पानसरीमार्डी बताती हैं कि गांव में जब भी पर्व-त्योहार का माहौल होता, बेटे की कमी दिल को कचोटती थी। बड़े बेटे के गलत रास्ते पर जाने की सजा पूरे परिवार को भुगतनी पड़ी।
पुलिसिया कुर्की और मकान की मरम्मत पर लगी रोक के कारण उनका मिट्टी का घर खंडहर बन गया। वर्तमान में परिवार वृद्धा पेंशन और छोटे बेटे की मजदूरी पर आश्रित है, जबकि हाल ही में स्वीकृत सरकारी पक्के मकान का निर्माण कार्य जारी है।
भाई की पढ़ाई छूटी, कुर्की में उजड़ा सामान
सचिन के छोटे भाई छुटू लाल मार्डी ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि बड़े भाई के नक्सली गतिविधियों में शामिल होने के कारण उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई।
मैट्रिक की परीक्षा से ठीक एक दिन पहले पुलिस उन्हें पूछताछ के लिए ले गई थी, जिससे उपजे मानसिक तनाव के कारण वह परीक्षा में सफल न हो सके।
वहीं, छोटे भाई की पत्नी सरिता मार्डी ने बताया कि वर्ष 2016 में विवाह के कुछ दिनों बाद ही पुलिस कुर्की में उनके मायके से मिले बर्तन और गृहस्थी का सामान ले गई थी। अब सचिन के मुख्यधारा में लौटने की खबर से परिवार ने राहत की सांस ली है।



