Health Insurance Policy: आज के मंहगाई के दौर में खर्चें बढ़ते ही जा रहें हैं। ऐसे में पैसे बचाना बेहद मुश्किल हो गया है। फिर अगर कभी अचानक घर में कोई सदस्य या आप बीमार हो जाएं तो पैसे उधार लेने पड़ते हैं। ऐसे में सबको हेल्थ इंश्योरेंस जरुर करवाना चाहिए। फिर जब इंश्योरेंस पॉलिसी लें तो सिर्फ उसके प्रीमियम यानी हर साल भरे जाने वाले पैसों पर ही बस ध्यान ना दें, बल्कि कुछ जरुरी बातें जरुर चेक करें। आइए जानते हैं क्या क्या चेक करना जरुरी..

हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय इन बातों का रखें ध्यान
हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय सबसे जरूरी है कि आप पॉलिसी का क्लीन क्लेम सेटलमेंट रेशियो , नेटवर्क अस्पताल की सूची और वेटिंग पीरियड चेक करें।
क्लेम सेटलमेंट रेशियो
कंपनी का पिछला रिकॉर्ड और क्लेम देने की क्षमता देखें। इसकी क्षमता कम से कम 90% या उससे अधिक बेहतर माना जाता है।
नेटवर्क अस्पताल
हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय बीमा कंपनी के नेटवर्क हॉस्पिटल की सूची में आपके शहर के अच्छे और आपके घर के नजदीक रहने वाले हॉस्पिटल उस लिस्ट में हैं या नहीं। अगर इस लिस्ट में आपकी पसंद या नजदीकी हॉस्पिटल का नाम है तो इलाज के दौरान आपको कैशलेस इलाज की सुविधा आसानी से मिल जाएगी।
वेटिंग पीरियड
हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय पुरानी या पहले से मौजूद बीमारियों के लिए नियम जरुर समझें। हालांकि कम वेटिंग पीरियड वाले प्लान हमेशा फायदेमंद होते हैं, इससे आपको क्लेम जल्दी मिल सकता है।
कोपेमेंट और रूम रेंट कैपिंग पर दे ध्यान
पॉलिसी लेते समय कोपेमेंट और रुम रेंट कैपिंग पर जरुर ध्यान दें, क्योंकि कई पॉलिसियों में हॉस्पिटल के कमरे के किराए पर हर दिन की एक सीमा तय होती है। अगर आप उससे महंगा रुम लेते हैं, तो पूरे इलाज के बिल का बड़ा हिस्सा आपको अपनी जेब से देना पड़ सकता है। इसलिए बिना रूम रेंट लिमिट वाली पॉलिसी चुनें।
पॉलिसी में ‘कोपेमेंट’ क्लॉज की जांच भी करें, इसके तहत बिल का कुछ प्रतिशत आपको ही देना होगा। इसलिए हमेश शून्य या कम कोपेमेंट वाली पॉलिसी ही चुने। इसके साथ क्लेम सेटलमेंट रेशियो भी 90 प्रतिशत से ज्यादा होना चाहिए।
कई मामलों में क्लेम रिजेक्ट हो जाता है। इसलिए कोई भी हेल्थ पॉलिसी लेने से पहले सभी नियमों और शर्तों को अच्छे समझना जरुरी होता है।



