Satya Report: जब हम क्रेडिट कार्ड की बात करते हैं, तो हमारे दिमाग में बड़े प्राइवेट बैंकों का नाम सबसे पहले आता है. लेकिन, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के हालिया आंकड़े इस स्थापित धारणा को बदल रहे हैं. देश में उधारी पर खर्च करने का चलन तेजी से मुख्यधारा में आ रहा है और अब इस रेस में सरकारी बैंक प्राइवेट खिलाड़ियों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं. मार्च 2026 के अंत तक भारत में क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों का आंकड़ा 11.9 करोड़ को पार कर चुका है.

कार्ड्स के बाजार इन चार का दबदबा
केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2025 में देश में करीब 11 करोड़ क्रेडिट कार्ड थे, जो महज एक साल के भीतर बढ़कर 11.9 करोड़ हो गए. यह आंकड़ा बताता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में कार्ड पेनिट्रेशन कितनी तेजी से बढ़ रहा है.
हालांकि, इतना बड़ा होने के बावजूद यह बाजार बहुत अधिक केंद्रित है. एचडीएफसी बैंक , एसबीआई कार्ड्स , आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक अभी भी इस बाजार के ‘बिग 4’ बने हुए हैं. दिलचस्प बात यह है कि टॉप 3 प्राइवेट बैंक और 5 बड़े सरकारी बैंक मिलकर ही बाजार के 80 फीसदी कार्ड्स को कंट्रोल करते हैं. 22.2% मार्केट शेयर और सबसे ज्यादा ट्रांजेक्शन वैल्यू के साथ एचडीएफसी बैंक अभी भी इस रेस में सबसे आगे है.
में सरकारी बैंकों ने मारी बाजी
भले ही कुल बाजार हिस्सेदारी में प्राइवेट बैंक आगे हों, लेकिन जब बात नई ग्रोथ की आती है, तो सरकारी बैंकों ने बाजी मार ली है. आंकड़ों के अनुसार, मार्च महीने में कुल बकाया क्रेडिट कार्ड बेस में सालाना आधार पर 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. इसमें सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा सरकारी बैंकों का रहा, जिन्होंने सालदरसाल 11.3 फीसदी की शानदार ग्रोथ दर्ज की. इसके मुकाबले, प्राइवेट बैंकों की ग्रोथ 8.3 फीसदी पर ही सिमट गई. वहीं, विदेशी बैंक लगातार अपना कारोबार समेट रहे हैं और उनके कार्ड्स की संख्या में 5.4 फीसदी की गिरावट आई है.
कैसे बदल रही है सरकारी बैंकों की तस्वीर?
सरकारी बैंकों की इस तेज रफ्तार के पीछे कोई रातोंरात हुआ चमत्कार नहीं, बल्कि एक सोचीसमझी रणनीति है.
- खर्च में भारी उछाल: जहां प्राइवेट बैंकों के ग्राहकों का प्रति कार्ड औसत खर्च 4 फीसदी गिरकर ₹18,948 रह गया है, वहीं सरकारी बैंकों के ग्राहकों ने प्रति कार्ड खर्च में 17 फीसदी का जोरदार इजाफा किया है. यह आंकड़ा अब बढ़कर ₹16,847 हो गया है.
- यूपीआई लिंकेज का फायदा: क्रेडिट कार्ड को यूपीआई से लिंक करने की सुविधा ने सरकारी बैंकों को एक नया हथियार दे दिया है.
- छोटे शहरों में गहरी पैठ: जेफियन कैपिटल के पार्टनर प्रकाश अग्रवाल के मुताबिक, सरकारी बैंक अपने विशाल डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का पूरा फायदा उठा रहे हैं. टियर2 और टियर3 में इनकी मजबूत पकड़ नए ग्राहकों को जोड़ने में सबसे अहम साबित हो रही है.
- कोब्रांडेड पार्टनरशिप: ईकॉमर्स कंपनियों और फिनटेक प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर नए कार्ड लॉन्च करने की रणनीति भी सरकारी बैंकों के लिए गेमचेंजर साबित हुई है.



