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रोज 45 मिनट की वॉक से कितना मजबूत होता है दिल? जानिए कितनी तेज चलें, कितने दिन करें और क्या कहते हैं एक्सपर्ट​​​​​​

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में घंटों बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधि की कमी और खराब खान-पान दिल की सेहत पर असर डाल सकते हैं। ऐसे में फिट रहने के लिए जरूरी नहीं कि हर कोई जिम जाए या कठिन एक्सरसाइज करे। रोजाना पैदल चलना भी शरीर को सक्रिय रखने का एक आसान तरीका हो सकता है।

लेकिन सवाल यह है कि क्या रोज 45 मिनट पैदल चलने से दिल की सेहत में वास्तव में सुधार हो सकता है? कार्डियोलॉजिस्ट के मुताबिक, नियमित वॉकिंग ब्लड प्रेशर, वजन, ब्लड शुगर और फिटनेस जैसे कई ऐसे कारकों को बेहतर रखने में मदद कर सकती है, जिनका संबंध हृदय स्वास्थ्य से है।

इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रविंदर सिंह राव के अनुसार, रोजाना पैदल चलना कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ के लिए फायदेमंद आदत हो सकती है। वहीं एशियन हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी यूनिट-II और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के कंसल्टेंट डॉ. दिवाकर कुमार बताते हैं कि नियमित शारीरिक गतिविधि दिल को स्वस्थ रखने के साथ-साथ कई हार्ट रिस्क फैक्टर्स को नियंत्रित करने में मदद करती है।

दिल के लिए क्यों फायदेमंद है रोजाना चलना?

जब आप नियमित रूप से चलते हैं तो शरीर की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं और हृदय को रक्त पंप करने के लिए बेहतर तरीके से काम करना पड़ता है। समय के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।

वॉकिंग के कुछ संभावित फायदे इस तरह हैं—

  • ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद
  • शरीर का वजन मैनेज करने में सहायता
  • ब्लड शुगर कंट्रोल में मदद
  • शारीरिक फिटनेस और स्टैमिना में सुधार
  • तनाव कम करने में सहायता
  • लंबे समय तक बैठे रहने की आदत को तोड़ना
  • हृदय रोग के कुछ जोखिम कारकों को कम करने में मदद

हालांकि, किसी एक एक्सरसाइज से हार्ट अटैक का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता। इसके लिए खान-पान, नींद, वजन, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज और धूम्रपान जैसी दूसरी चीजों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

क्या 45 मिनट की वॉक पर्याप्त है?

स्वास्थ्य संबंधी सामान्य गाइडलाइंस में वयस्कों के लिए सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि का लक्ष्य रखा जाता है। तेज चाल से पैदल चलना इसका एक उदाहरण है।

अगर कोई व्यक्ति सप्ताह में 5 दिन 45 मिनट चलता है तो वह 225 मिनट की गतिविधि पूरी कर लेता है। वहीं सप्ताह में 3 दिन 45 मिनट चलने पर कुल 135 मिनट होते हैं, जो 150 मिनट के लक्ष्य के करीब है।

इसलिए सिर्फ 45 मिनट के आंकड़े पर निर्भर रहने के बजाय पूरे सप्ताह में अपनी कुल शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

कितनी तेज चलना चाहिए?

सिर्फ धीमी गति से टहलना और ब्रिस्क वॉक एक जैसी गतिविधि नहीं हैं। दिल की फिटनेस के लिए मध्यम तीव्रता वाली वॉक को बेहतर माना जाता है।

एक आसान तरीका है “टॉक टेस्ट”। अगर चलते समय आप सामान्य बातचीत कर सकते हैं, लेकिन लगातार गाना गाने में परेशानी महसूस होती है, तो आपकी गतिविधि मध्यम तीव्रता के आसपास हो सकती है।

कई वयस्कों के लिए ब्रिस्क वॉक की गति लगभग 5–6 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती है, लेकिन यह हर व्यक्ति के लिए समान नहीं होती। उम्र, फिटनेस लेवल और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार सही गति अलग हो सकती है।

अगर आप लंबे समय से एक्सरसाइज नहीं कर रहे हैं तो शुरुआत धीमी गति से करें और धीरे-धीरे समय तथा गति बढ़ाएं।

क्या रोज 45 मिनट चलने से कोलेस्ट्रॉल कम होता है?

नियमित शारीरिक गतिविधि वजन और मेटाबॉलिक हेल्थ को बेहतर रखने में मदद कर सकती है और कुछ लोगों में ब्लड लिपिड प्रोफाइल पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है। लेकिन केवल वॉकिंग के आधार पर LDL कोलेस्ट्रॉल को कम करने या HDL को बढ़ाने की गारंटी नहीं दी जा सकती।

अगर किसी व्यक्ति का कोलेस्ट्रॉल पहले से ज्यादा है तो डॉक्टर की सलाह, सही डाइट और जरूरत पड़ने पर दवाओं का पालन भी जरूरी हो सकता है।

डायबिटीज और ब्लड शुगर में भी मददगार

चलने जैसी नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता को बेहतर बनाने और ब्लड शुगर मैनेजमेंट में मदद कर सकती है। यही वजह है कि डायबिटीज वाले लोगों के लिए भी डॉक्टर अक्सर नियमित शारीरिक गतिविधि की सलाह देते हैं।

हालांकि, डायबिटीज की दवा लेने वाले व्यक्ति को एक्सरसाइज की तीव्रता और समय अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करना चाहिए, खासकर अगर ब्लड शुगर कम होने का जोखिम रहता हो।

क्या सिर्फ वॉक करने से हार्ट अटैक से बच सकते हैं?

नहीं।

यह समझना जरूरी है कि वॉकिंग दिल के लिए फायदेमंद जरूर है, लेकिन यह हार्ट अटैक से बचाव की गारंटी नहीं है। अगर किसी व्यक्ति को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा या धूम्रपान की आदत है, तो केवल रोजाना चलना पर्याप्त नहीं होगा।

दिल की सुरक्षा के लिए इन सभी जोखिम कारकों को नियंत्रित करना जरूरी है।

सुबह की वॉक बेहतर या शाम की?

दिल की सेहत के लिए ऐसा कोई एक समय जरूरी नहीं है जो हर व्यक्ति के लिए सबसे बेहतर हो। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप ऐसा समय चुनें जिसे नियमित रूप से अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकें।

अगर सुबह समय नहीं मिलता तो शाम को चल सकते हैं। ऑफिस में लंबे समय तक बैठना पड़ता है तो दिनभर में छोटे-छोटे वॉक ब्रेक लेना भी उपयोगी हो सकता है।

वॉक शुरू करते समय इन बातों का रखें ध्यान

अगर आपने लंबे समय से कोई एक्सरसाइज नहीं की है तो अचानक 45 मिनट तेज चलना शुरू करने की जरूरत नहीं है।

पहले 10–15 मिनट आरामदायक गति से चलें। शरीर को इसकी आदत होने के बाद धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। आरामदायक जूते पहनें और पर्याप्त पानी पिएं।

अगर चलते समय सीने में दर्द या दबाव, अत्यधिक सांस फूलना, चक्कर, बेहोशी जैसा महसूस होना या असामान्य कमजोरी हो तो एक्सरसाइज रोककर तुरंत चिकित्सकीय मदद लें।

दिल को स्वस्थ रखने के लिए वॉक के साथ ये आदतें भी जरूरी

वॉक को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने के साथ बाकी लाइफस्टाइल पर भी ध्यान दें।

संतुलित आहार लें: फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, पर्याप्त प्रोटीन और स्वस्थ वसा को डाइट में शामिल करें।

धूम्रपान से बचें: तंबाकू हृदय और रक्त वाहिकाओं के लिए बड़ा जोखिम कारक है।

वजन नियंत्रित रखें: ज्यादा वजन हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज समेत कई जोखिम कारकों को बढ़ा सकता है।

नींद पूरी करें: पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाली नींद भी ओवरऑल हार्ट हेल्थ के लिए महत्वपूर्ण है।

ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराएं: खासकर अगर परिवार में हृदय रोग का इतिहास है या अन्य जोखिम कारक मौजूद हैं।

निष्कर्ष

रोजाना 45 मिनट पैदल चलना दिल की सेहत के लिए एक अच्छी और आसान आदत हो सकती है। अगर संभव हो तो सप्ताह के अधिकांश दिनों में मध्यम गति की वॉक या दूसरी शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

लेकिन दिल को स्वस्थ रखने का मतलब सिर्फ वॉक करना नहीं है। नियमित एक्सरसाइज के साथ संतुलित डाइट, पर्याप्त नींद, तनाव पर नियंत्रण, धूम्रपान से दूरी और ब्लड प्रेशर-कोलेस्ट्रॉल की निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। अगर आपको पहले से हृदय रोग, सीने में दर्द, सांस फूलने या कोई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, तो नई एक्सरसाइज या वॉकिंग रूटीन शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।

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