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बिजनौर में तेंदुओं का आतंक! मां के पास सो रहे 2 साल के मासूम को उठा ले गया तेंदुआ, खेत में मिला शव; अगस्त में तीन मासूमों की मौत

Bijnor Leopard Attack: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में तेंदुओं का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है. पिछले छह वर्षो से तेंदुओ की आरामगाह बने बिजनौर जिले में सैकड़ों की तादाद में तेदुएं खेतों के अलावा आबादी वाले इलाकों में घरों में घुसकर मासूम बच्चों को अपना निशाना बना रहे हैं. ताजा मामला जिले के नहटौर इलाके का है. यहां 27 अगस्त की रात को एक दो साल के मासूम बच्चे को तेदुंआ उठाकर ले गया.

बच्चे का शव बाद में खेत से बरामद हुआ. इस घटना के साथ ही अकेले अगस्त महीने में तेंदुओं के हमलों में मरने वाले बच्चों की संख्या तीन हो गई है. जानकारी के अनुसार, जिले के नहटौर क्षेत्र के गांव मुस्सेपुर में 27 अगस्त को करीब पांच बजे दो साल का मासूम मोहित अपने घर में मां के पास सो रहा था. इसी दौरान दबे पांव आए तेंदुए ने झपट्टा मारा और बच्चे को उठाकर ले गया.

तेंदुए लगातार इंसानों और जानवरो को बना रहे निशाना

परिजनों के शोर मचाने पर ग्रामीणों ने लाठीडंडों के साथ तलाश शुरू की. घर से करीब 200 मीटर दूर एक खेत में मासूम मोहित का क्षतविक्षत शव बरामद हुआ. हालांकि, वन विभाग इस मामले को पूरी तरह तेंदुए का हमला मानने से बच रहा है और मौत को संदिग्ध मानकर जांच की बात कह रहा है. बिजनौर के अलगअलग ग्रामीण इलाकों में तेंदुए लगातार इंसानों और जानवरों को निशाना बना रहे हैं.

4 अगस्त को नगीना देहात के सीखनीवाला गांव में तेंदुए ने हमला कर एक 10 वर्षीय बच्चे को मौत के घाट उतार दिया था. 20 अगस्त को नजीबाबाद के खुशहालपुर मड़का गांव में एक और मासूम तेंदुए का शिकार बना. 27 अगस्त को नहटौर के मुस्सेपुर में दो साल के मोहित की मौत की हो गई. गांवों में लगे सीसीटीवी कैमरों में अक्सर तेंदुए कभी गायों का शिकार करते तो कभी गलियों में कुत्तों के पीछे दौड़ते नजर आ रहे हैं.

एक महीने में 14 तेंदुए कैद, लेकिन हालात जस के तस

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, जिले के संवेदनशील इलाकों में तेंदुओं को कैद करने के लिए 106 जगहों पर पिंजरे लगाए गए हैं. भारी मुस्तैदी का दावा करते हुए डीएफओ बिजनौर जय सिंह कुशवाहा ने बताया कि पिछले एक महीने में 14 तेंदुओं को पिंजरे में कैद भी किया गया है, लेकिन धरातल पर हालात जस के तस बने हुए हैं. पिंजरों में तेंदुए कैद होने के बावजूद नई जगहों पर लगातार हमले हो रहे हैं. इससे साफ है कि क्षेत्र में तेंदुओं की संख्या सैकड़ों में है.

ग्रामीणों में भारी आक्रोश और डर

वहीं लगातार हो रही मौतों से गुस्साए ग्रामीणों का कहना है कि वे अब अपने ही घरों और खेतों में सुरक्षित नहीं हैं. शाम ढलते ही लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं और बच्चों को अकेले छोड़ने से कतरा रहे हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि कागजी दावों और गिनेचुने पिंजरों से हटकर तेंदुओं के इस बढ़ते आतंक से निजात दिलाने के लिए कोई ठोस और स्थायी कदम उठाया जाए.

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