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पगड़ी बदलकर कैसे मुगल बादशाह से कोहिनूर छीन ले गया ईरान का नादिर शाह?

Satya Report: मोहम्मद शाह रोशन अख्तर उर्फ रंगीला. यही नाम था मुगल बादशाह और औरंगजेब के पोते का. जिसकी लाचारगी, बेचारगी की वजह से ईरानी बादशाह नादिर शाह कोहिनूर हीरा पाने में आसानी से सफल रहा. ईरान इन दिनों युद्धरत है, ऐसे में नादिर शाह की चर्चा आम है. क्योंकि वह चरवाहे का बेटा था और अपनी बहादुरी, चपलता, वाकपटुता, बहादुरी, कचलकपट की वजह से ईरान का सम्राट बना था. इन्हीं वजहों से जब वह हिंदुस्तान लूटने चला तो धनसंपदा तो मिली ही, कोहिनूर हीरा पाने में भी वह कामयाब रहा. नादिर शाह ने मुगल खजाने को लूटकर कंगाल कर दिया था.

पगड़ी बदलकर कैसे मुगल बादशाह से कोहिनूर छीन ले गया ईरान का नादिर शाह?
पगड़ी बदलकर कैसे मुगल बादशाह से कोहिनूर छीन ले गया ईरान का नादिर शाह?

उस समय दिल्ली के सिंहासन पर औरंगजेब का पोता मोहम्मद शाह रोशन अख्तर उर्फ रंगीला बैठा हुआ था. तभी नादिर शाह ने आक्रमण किया. करनाल के पास युद्ध में मुगल सैनिक हार गए. फिर नादिर शाह दिल्ली में घुसा, लूटपाट की, विरोध करने पर कत्लएआम किया. फिर मुगल बादशाह के महल में ही अपना अड्डा जमा लिया. फिर आराम से तब तक जमा रहा जब तक पूरा का पूरा खजाना लूट नहीं लिया.

26 अप्रैल 1748 को उसी मुगल बादशाह रंगीला की डेथ एनिवर्सरी के बहाने जानते हैं कि आखिर कैसे नादिर शाह ने बादशाह की पगड़ी से कोहिनूर हीरा निकाल ले गया?

हिंदुस्तान की समृद्धि और नादिर शाह

नादिर शाह और कोहिनूर की कहानी इतिहास की एक रोचक घटना है. यह घटना 18वीं सदी की है. उस समय भारत पर मुगल बादशाह मोहम्मद शाह का शासन था. ईरान में नादिर शाह बहुत शक्तिशाली शासक बन चुका था. वह एक कुशल योद्धा था और उसकी सेना बहुत मजबूत थी. भारत उस समय बहुत समृद्ध देश था. यहां सोना, चांदी और हीरेजवाहरात की भरमार थी. मुगल दरबार अपनी शानओशौकत के लिए प्रसिद्ध था. कोहिनूर हीरा भी इसी खजाने का महत्वपूर्ण हिस्सा था. यह दुनिया के सबसे कीमती हीरों में गिना जाता था. इसकी चमक और आकार अद्भुत थे.

नादिर शाह का जन्म साल 1688 में ईरान के खुरासान प्रांत में एक गरीब परिवार में हुआ था.

दौलत की भूख मिटाने को नादिर शाह ने किया आक्रमण

नादिर शाह की नजर भारत की दौलत पर थी. उसने साल 1739 में भारत पर आक्रमण किया. मुगल सेना ने उसका सामना किया. करनाल की लड़ाई में दोनों सेनाएं भिड़ीं लेकिन मुगल सेना कमजोर साबित हुई. नादिर शाह ने आसानी से जीत हासिल कर ली. इसके बाद नादिर शाह दिल्ली पहुंचा. उसने पूरे शहर पर कब्जा कर लिया. दिल्ली में भारी लूटपाट हुई. कई हजार लोग मारे गए. यह घटना इतिहास में एक बड़ी त्रासदी मानी जाती है. नादिर शाह ने पहले पूरे मुगल खजाने को लूटा, फिर कोहिनूर की तलाश में लगा. तब तक उसे इतनी धनसंपदा मिल चुकी थी कि उसने अपना पैतरा बदल दिया. मुगल बादशाह को दिखावे के लिए दोस्त की तरह ट्रीट करने लगा.

फिर शुरू की कोहिनूर हीरे की खोज

इस लूटपाट में कोहिनूर हीरा उसे तुरंत नहीं मिला. असल में यह हीरा मुगल बादशाह के पास छिपा हुआ था. कहा जाता है कि मोहम्मद शाह ने इसे अपनी पगड़ी में छुपा रखा था. पगड़ी उस समय सम्मान का प्रतीक थी. नादिर शाह बहुत चालाक था. उसे कोहिनूर हीरे के बारे में जानकारी बादशाह के एक करीबी से मिल गई. उसने सीधे मांगने या जोरजबरदस्ती करने के बजाय एक योजना बनाई. उसने दोस्ती और भाईचारे का दिखावा किया. उसने मुगल बादशाह से अच्छे संबंध बनाने की बात कही. तब तक उसका पेट भर चुका था. उसे यह भी भरोसा था कि अगर आसानी से नहीं मिला तो वह कोहिनूर जबरन ले लेने में कामयाब हो जाएगा.

कोहिनूर.

पगड़ी बदलने की परंपरा का लिया सहारा

उस समय एक खास परंपरा थी. जब दो राजा दोस्ती का वादा करते थे, तो वे अपनी पगड़ी बदलते थे. यह सम्मान और विश्वास का प्रतीक था. नादिर शाह ने इसी परंपरा के जरिए कोहिनूर पर कब्जा किया. उसने दोस्ती एवं भाईचारे के सहारे मुगल बादशाह से पगड़ी बदलने का प्रस्ताव रखा. मोहम्मद शाह ने इसे सामान्य रस्म समझा. उन्होंने खुशीखुशी अपनी पगड़ी दे दी. बदले में उन्होंने नादिर शाह की पगड़ी पहन ली. जबकि नादिर शाह का असली मकसद कुछ और था. जैसे ही उसे पगड़ी मिली, उसने उसे खोला. उसमें से कोहिनूर हीरा निकला. वह बहुत खुश हुआ. इस तरह उसने बिना लड़ाई के कोहिनूर हासिल कर लिया. कहा जाता है कि कोहिनूर नाम नादिर शाह ने ही दिया. इसका अर्थ है रोशनी का पहाड़. यह हीरा शक्ति और वैभव का प्रतीक था. नादिर शाह इसे अपने साथ ईरान ले गया.

मोहम्मद शाह रोशन अख्तर उर्फ रंगीला.

मुगल साम्राज्य पर उल्टा पड़ा प्रभाव

इस घटना से मुगल साम्राज्य को बड़ा नुकसान हुआ. उसकी कमजोरी सामने आई. इसके बाद मुगल शक्ति धीरेधीरे कम होने लगी. हालांकि, यह कमजोरी औरंगजेब के निधन के बाद से ही शुरू हो गई थी लेकिन फिर भी बादशाह बदलते रहे. सत्ता चलती रही. इस बीच भारत में नई शक्तियां उभरने लगीं. असल में बादशाह रंगीला की रुचि कला में थी. साहित्य में थी. राजकाज उनके कारिंदे देखते और फैसले लेते थे. ऐसे में स्वाभाविक है कि क्षेत्रीय ताकतों का उदय होने लगा. तब हिंदुस्तान एक बहुत बड़ा साम्राज्य था. जब राजा की रुचि राज करने में न होकर विलासिता में होगी तो सत्ता खिसकने में समय नहीं लगेगा. हालाँकि, रंगीला के बाद भी शासन मुगलों के हाथ में ही रहा लेकिन बेहद कमजोर स्थिति में.

नादिर शाह और पगड़ी बदलने की यह घटना इतिहास की एक अनोखी कहानी है. इसमें युद्ध से ज्यादा चालाकी की भूमिका थी. इस तरह उसने बिना तलवार उठाए कोहिनूर हासिल कर लिया. यह घटना आज भी लोगों को हैरान करती है.

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