
: पौराणिक काल से हमारे ऋषि-मुनि तमाम तरह सिद्धि और लोकमंगल की कामना को लिए हवन करते चले आ रहे हैं. देवी-देवताओं को प्रसन्न करने से लेकर नवग्रहों से जुड़े दोष को दूर करके उनकी शुभता पाने के लिए अक्सर लोग पूजा-पाठ के अंत में हवन किया करते रहे हैं, लेकिन सवाल उठता है कि यदि किसी व्यक्ति को अपने घर में सामान्य रूप से किसी तीज-त्योहार आदि पर हवन करना हो तो उसके लिए क्या नियम हैं. आइए देवी-देवताओं का आशीर्वाद दिलाने और मनोकामनाओं को पूरा करने वाले हवन की सरल विधि के बारे में जानते हैं.
हवन की सामग्री
घर में हवन करने से पहले व्यक्ति को स्नान-ध्यान करने के बाद हवन से जुड़ी सारी सामग्री पूजा स्थान पर एकत्र करके रख लेनी चाहिए. हवन करने के लिए मिट्टी से बना हवन कुंड, जड़ी-बूटी, अक्षत, लकड़ी, तिल, गुड़, शुद्ध घी, समिधा, जौ, काला या सफेद तिल, सूखा नारियल, मिश्री या बताशा, शहद, कपूर, माचिस, आम की लकड़ी, शुद्ध जल, पुष्प, दीया, बाती, आदि को रख लें. आप चाहें तो बाजार से तैयार की हुई हवन सामग्री का प्रयोग भी कर सकते हैं.
घर में हवन करने की सरल विधि
हिंदू मान्यता के अनुसार घर में हवन करने के लिए ईशान कोण में साफ एव पवित्र स्थान का चयन करें और पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें. सबसे पहले भगवान श्री गणेश का ध्यान करें और पूजा स्थान पर एक तांबे के कलश में आम या फिर अशोक के पत्ते, नारियल रखकर कलश की रोली, चंदन, अक्षत, मिष्ठान, पान सुपारी आदि अर्पित करते हुए विधि-विधान से पूजा करें. इसके बाद आटे से रंगोली बनाकर उसके ऊपर हवन कुंड स्थापित करके उसमें लकड़ी रखें. फिर उस पर शुद्ध जल छिड़कें और उसके चारों ओर कलावा बांध कर रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित करें. इसके बाद हवन कुंड में थोड़ा सा कपूर या घी डालकर अग्नि देवता का ध्यान करते हुए अग्नि प्रज्वलित करें.
भगवान श्री गणेश जी, नवग्रह, पंचदेवता, कुल देवता, स्थान देवता, ग्राम देवता, पितृ देवता को आहुति देने के बाद अपने आराध्य देवी या देवता अथवा गायत्री मंत्र का जप करते हुए अग्नि में आहुति डालें. मंत्र से आहुति देन के बाद हवन में मिठाई, गुड़ फिर बताशे का भोग डालें. इसके बाद अंत में सूखा नारियल का ऊपरी हिस्सा काट कर उसमें हवन सामग्री भरकर उसे कलावा से चारों तरफ से लपेट लें. फिर इसे हवन कुंड के बीच में रख कर बचे हुए शुद्ध घी को नीचे से ऊपर की तरफ ले जाते हुए नीचे दिये गये मंत्र को पढ़ते हुए पूरा डाल दें.
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते.पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते.
इसके बाद हवन कुंड के थोड़ा शुद्ध जल लेकर हवन कुंड के चारों तरफ फेर दें. हवन करने के बाद श्रद्धा और विश्वास के पूजा को पूर्ण बनाने वाली आरती अवश्य करें तथा सभी बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त करें.
हवन करने का नियम
- हवन हमेशा अपने परिवार के साथ बैठकर आसन पर बैठकर करें.
- घर में हवन शांत और पवित्र स्थान पर ही करना चाहिए.
- यदि संभव हो तो हवन करते समय बगैर सिले हुए कपड़े पहन कर हवन करना चाहिए.
- हवन करते समय हवन सामग्री को अंगूठे, मध्यमा और अनामिका अंगुली से उठाकर अर्पित करें.
- हवन करते समय यह सुनिश्चित कर लें कि उसकी सामग्री में कीड़े-मकोड़े नहीं है.
- हवन करते समय उसके पास ज्वलनशील पदार्थ न रखें.
- हवन के अंत में नारियल बताशा, गुड़ आदि से पूर्णाहुति अवश्य दें. ,
- हवन की अग्नि शांत होने के बाद उसकी भस्म का टीका प्रसाद स्वरूप अपने माथे पर लगाएं.
- हवन की बची हुई सामग्री को किसी पवित्र स्थान पर मिट्टी में दबा दें.
हवन करने के लाभ
घर में हवन करने से संबंधित देवी-देवता, नवग्रह आदि प्रसन्न होकर अपनी शुभता और कृपा बरसाते है. हवन करने से घर के भीतर का वातावरण शुद्ध एवं पवित्र होता है. हवन करने से घर की नाकारत्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है.



