बंगाल के हावड़ा जिले के छोटे से गांव बनिपुर से शुरू हुई नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया ने मात्र तीन साल में संसद तक का सफर तय कर लिया है। एक पति-पत्नी की जोड़ी द्वारा स्थापित यह पार्टी अब 20 तृणमूल कांग्रेस के बागी लोकसभा सांसदों के विलय के बाद लोकसभा में पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी बन गई है

पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के संकरील क्षेत्र के बनिपुर (हाटगछा) में एक साधारण से किराए के छोटे कार्यालय से शुरू हुई नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) अब देश की संसद में राष्ट्रीय राजनीति का नया शक्तिशाली केंद्र बन गई है। मात्र तीन वर्षों में यह पार्टी लोकसभा की पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है और भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की मजबूत सहयोगी बनकर उभरी है।
पति-पत्नी की जोड़ी की मेहनत, सामाजिक कार्य और स्थानीय स्तर पर जनसेवा की बदौलत NCPI ने जो सफर तय किया है, वह भारतीय राजनीति के इतिहास में एक अनोखा उदाहरण बन गया है। 14 जून 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी लोकसभा सांसदों के सामूहिक विलय ने पार्टी को रातोंरात राष्ट्रीय पटल पर स्थापित कर दिया।
NCPI की स्थापना और पृष्ठभूमि
चुनाव आयोग ने वर्ष 2023 में NCPI को अनरेकग्नाइज्ड पॉलिटिकल पार्टी के रूप में पंजीकृत किया था। पार्टी का रजिस्टर्ड मुख्यालय हावड़ा जिले के बनिपुर (हाटगछा) में स्थित है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उत्तिया कुंडू और उनकी पत्नी शेवली (शिउली) कुंडू कोषाध्यक्ष हैं। दोनों पति-पत्नी लंबे समय से स्थानीय स्तर पर सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय रहे हैं। शेवली कुंडू दो महत्वपूर्ण संगठनों की डायरेक्टर भी हैं…
बताया जाता है कि, NCPI की नींव स्थानीय समस्याओं, युवाओं के रोजगार, महिलाओं के सशक्तिकरण और क्षेत्रीय विकास को लेकर उठाए गए मुद्दों पर रखी गई थी।
त्रिपुरा से शुरू हुआ चुनावी सफर
NCPI ने अपना पहला चुनावी प्रयोग 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में किया। बंगाल में पंजीकृत होने के बावजूद पार्टी ने त्रिपुरा के आदिवासी बहुल और दूरदराज के इलाकों पर विशेष फोकस किया। सात सीटों पर उम्मीदवार उतारे गए, लेकिन चार के नामांकन रद्द हो गए। केवल दो सीटों पर पार्टी के चुनाव चिह्न ‘सात किरणों वाला पेन निब’ पर वोटिंग हुई। परिणाम इस प्रकार रहे…
इस चुनाव में पार्टी को कुल 822 वोट मिले। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन कैसी रही। उस वक्त पार्टी का चुनावी नारा था- ‘अपने अधिकारों की रक्षा के लिए दलबदलुओं को नकारें, समाजसेवियों का समर्थन करें’। जिस नारे के साथ पार्टी चुनावी मैदान में उतरी थी आज, उसी के भरोसे लोकसभा में पांचवीं बड़ी पार्टी बन गई।
ऐतिहासिक विलय और सियासी भूचाल
14 जून 2026 को NCPI के लिए सबसे यादगार और स्वर्णिम दिन साबित हुआ। तृणमूल कांग्रेस के लगभग दो-तिहाई लोकसभा सांसदों (कुल 20) ने सामूहिक रूप से NCPI में विलय की घोषणा कर दी। इस ऐतिहासिक कदम में शामिल प्रमुख दिग्गज नेता सुदीप बंद्योपाध्याय, काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, सायोनी घोष, यूसुफ पठान समेत टीएमसी के कुल 20 सांसद NCPI में शामिल हो गए।
वहीं, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात के बाद बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि तृणमूल कांग्रेस के दो-तिहाई सांसदों ने अलग समूह के रूप में मान्यता और अलग बैठने की व्यवस्था के लिए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा है। हम सब NCPI में पूर्ण विलय कर रहे हैं और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का पूर्ण समर्थन करेंगे।
सुदीप बंद्योपाध्याय ने भी पुष्टि की कि असंतुष्ट गुट पहले ही NCPI के संगठनात्मक ढांचे में शामिल हो चुका है। उन्होंने कहा कि यह फैसला तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी कलह, नेतृत्व की कार्यशैली और राज्य में बढ़ती अराजकता के खिलाफ लिया गया है।



