सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दो नई पुस्तकों के विमोचन समारोह में गृह मंत्री अमित शाह ने न्यायपालिका, संविधान और लोकतंत्र के संतुलन पर खुलकर अपने विचार रखे. कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि उनके वक्तव्य को केवल एक मित्र की राय के तौर पर नहीं, बल्कि न्यायपालिका और सरकार के रिश्तों के संदर्भ में देखा जाएगा. हालांकि उन्होंने साफ किया कि वे इस मंच को किसी विवाद का विषय नहीं बनाना चाहते.

अमित शाह ने भारतीय लोकतंत्र की 76 साल की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत किया है. जनता को आज भी विश्वास है कि यदि उसके अधिकारों पर आघात होगा तो न्यायपालिका उसके लिए खड़ी मिलेगी. उन्होंने कहा कि संविधान और न्यायपालिका ने लोकतंत्र को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है. न्यायपालिका और कार्यपालिका का संबंध टकराव का नहीं, बल्कि संतुलन और मर्यादा का है. संविधान ने दोनों संस्थाओं को एकदूसरे को संतुलित करने के लिए बनाया है और पिछले 75 वर्षों में यही परंपरा भारत की ताकत बनी रही है.
उन्होंने कहा, ‘1947 से आज तक इस देश में संसद और विधानसभाओं के माध्यम से जितने भी परिवर्तन हुए, उन्हें बिना किसी हिंसा के स्वीकार किया गया. यह भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है.’
तकनीक का इस्तेमाल जरूरी, सतर्क रहने की आवश्यकता
तुषार मेहता की पुस्तकों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि इन किताबों में अदालतों के गंभीर माहौल के बीच हास्य, व्यंग्य और मानवीय पहलुओं को भी बेहद रोचक तरीके से प्रस्तुत किया गया है. साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकों से न्यायपालिका के सामने आने वाली चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया है. उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल जरूरी है, लेकिन इसके संभावित दुष्प्रभावों और न्याय प्रक्रिया पर पड़ने वाले असर को लेकर भी सतर्क रहने की आवश्यकता है. उन्होंने यह भी कहा कि न्याय का काम खुले कोर्ट में बहस सुनकर अनुभव और ज्ञान के आधार पर निर्णय देना है.
भारतीय न्याय व्यवस्था पर भी लिखनी चाहिए किताब
तुषार मेहता ने अपनी किताब में दुनिया के अलगअलग देशों में न्यायपालिका के क्रियाकलापों से जुड़े कई घटनाओं के व्यंगात्मक पहलूओं पर भी प्रकाश डाला है, जिसमें एक जज द्वारा शिकार करतेकरते फैसला लिख देना, दो जुड़वा बहनों द्वारा जज और वकील बनकर न्यायपालिका को चलाना जैसे प्रसंग भी शामिल हैं. किताब के इन पहलुओं पर बोलते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने तुषार मेहता से कहा की विदेशी न्याय न्यायालयों में हुई घटनाओं के साथसाथ उन्हें भारतीय न्याय व्यवस्था पर भी इस तरह की किताब लिखनी चाहिए, अगर वह ऐसा करते तो ज्यादा बेहतर होता.
कोई कंट्रोवर्शियल बयान नहीं देंगे
इसके साथ ही गृह मंत्री अमित शाह ने कार्यक्रम की शुरुआत में ही मीडिया कर्मियों को बता दिया कि आज वह अपने 30 साल पुराने दोस्त तुषार मेहता की किताब के विमोचन समारोह में आए हैं इसलिए किसी भी तरह का कोई कंट्रोवर्शियल बयान नहीं देंगे, बल्कि न्याय, न्यायपालिका और विधि से जुड़े अपने विचार आने वाले कुछ दिनों में वह किसी अन्य फोरम से जरूर रखेंगे.



