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जोड़ों​​​ के दर्द से परेशान हैं तो जानें इन 3 योगासनों और 3 औषधीय पौधों के फायदे, मिट्टी के लेप में भी बरतें सावधानी

जोड़ों का दर्द यानी आर्थराइटिस (Arthritis) आजकल बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर रहा है। इसमें घुटनों, कमर, कूल्हों और हाथों के जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न की समस्या हो सकती है। कुछ लोगों को सुबह उठने के बाद जोड़ों को हिलाने-डुलाने में परेशानी होती है, जबकि कई लोगों को चलने-फिरने के दौरान दर्द महसूस होता है।

आयुर्वेद में जोड़ों से जुड़ी कुछ समस्याओं को संधिवात और वात दोष से जोड़कर देखा जाता है। पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में निर्गुंडी, सहजन और मेथी जैसी जड़ी-बूटियों के साथ मिट्टी के लेप और योग को भी सहायक उपायों के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। हालांकि, आर्थराइटिस के अलग-अलग प्रकार होते हैं और उनका उपचार भी अलग हो सकता है। इसलिए किसी घरेलू उपाय को बीमारी का स्थायी इलाज नहीं मानना चाहिए।

जोड़ों की सेहत के लिए उपयोगी मानी जाती हैं ये 3 जड़ी-बूटियां

1. निर्गुंडी

आयुर्वेद में निर्गुंडी की पत्तियों और अन्य हिस्सों का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से दर्द और सूजन से जुड़ी समस्याओं में किया जाता है। इसमें कुछ प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं, जिनके संभावित प्रभावों पर शोध किया जा रहा है। हालांकि, आर्थराइटिस के इलाज में इसकी प्रभावशीलता को लेकर अभी पर्याप्त ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

2. मोरिंगा यानी सहजन

सहजन की पत्तियों में विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इसे पौष्टिक आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है। संतुलित भोजन के साथ सहजन का सेवन शरीर को जरूरी पोषक तत्व देने में मदद कर सकता है। लेकिन इसे जोड़ों के दर्द की दवा नहीं समझना चाहिए।

3. मेथी

मेथी में फाइबर और कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं। पारंपरिक चिकित्सा में इसका इस्तेमाल अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं के लिए किया जाता रहा है। हालांकि, मेथी खाने से आर्थराइटिस ठीक होने या जोड़ों का दर्द खत्म होने का दावा प्रमाणित नहीं है। अगर आप नियमित दवाएं लेते हैं, तो मेथी के सप्लीमेंट का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

क्या जोड़ों के दर्द में मिट्टी का लेप फायदेमंद है?

प्राकृतिक चिकित्सा में मिट्टी के लेप का इस्तेमाल शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर किया जाता है। कुछ लोग घुटनों और दूसरे प्रभावित जोड़ों पर ठंडी मिट्टी का पैक लगाते हैं। इससे कुछ लोगों को अस्थायी ठंडक और आराम महसूस हो सकता है।

मिट्टी का लेप इस्तेमाल करते समय कुछ सावधानियां जरूरी हैं:

  • केवल साफ और सुरक्षित मिट्टी का इस्तेमाल करें।
  • गंदे पानी या अज्ञात काढ़े में मिट्टी मिलाकर न लगाएं।
  • खुले घाव, त्वचा के संक्रमण या एलर्जी वाली जगह पर इसका इस्तेमाल न करें।
  • बहुत ठंडा या गर्म लेप लगाने से बचें।
  • लेप लगाने के बाद जलन, खुजली या दर्द बढ़े तो तुरंत हटा दें।

यह दावा वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है कि मिट्टी का लेप ऑस्मोसिस के जरिए जोड़ों की सूजन या शरीर के विषैले पदार्थों को बाहर खींच लेता है। इसे आर्थराइटिस के मुख्य उपचार का विकल्प नहीं मानना चाहिए।

जोड़ों की गतिशीलता के लिए करें ये 3 योगासन

हल्की शारीरिक गतिविधि और सही व्यायाम जोड़ों की गतिशीलता बनाए रखने तथा आसपास की मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं। अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार योग करना उपयोगी हो सकता है।

1. ताड़ासन

ताड़ासन में सीधे खड़े होकर शरीर को ऊपर की ओर खींचने का अभ्यास किया जाता है। इससे शरीर के संतुलन और सही मुद्रा पर काम किया जा सकता है। घुटनों या पैरों में दर्द होने पर दीवार या कुर्सी का सहारा लेकर अभ्यास करें।

2. कटिचक्रासन

इस आसन में सीधे खड़े होकर कमर और धड़ को धीरे-धीरे दाएं और बाएं घुमाया जाता है। इससे कमर और शरीर के ऊपरी हिस्से की गतिशीलता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इसे झटके से न करें और दर्द महसूस होने पर अभ्यास रोक दें।

3. त्रिकोणासन

इस आसन में पैरों को फैलाकर शरीर को एक तरफ झुकाया जाता है। इससे पैरों, कूल्हों और शरीर के किनारों की मांसपेशियों में खिंचाव महसूस होता है। घुटनों में दर्द या संतुलन बनाने में परेशानी होने पर विशेषज्ञ की देखरेख में ही इसका अभ्यास करें।

ध्यान रखें कि योग से जोड़ों में श्लेषक द्रव का उत्पादन बढ़ने या जड़ी-बूटियों का असर कई गुना तेज होने का दावा प्रमाणित नहीं है। हर व्यक्ति की स्थिति अलग होती है, इसलिए योगासन का चुनाव भी उसी के अनुसार होना चाहिए।

आर्थराइटिस में इन बातों का भी रखें ध्यान

  • शरीर का वजन संतुलित रखें, ताकि घुटनों और कूल्हों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
  • नियमित रूप से हल्की शारीरिक गतिविधि करें।
  • भोजन में फल, सब्जियां, दालें और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करें।
  • दर्द बढ़ाने वाली गतिविधियों से बचें, लेकिन पूरी तरह निष्क्रिय न रहें।
  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं और फिजियोथेरेपी जारी रखें।

कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है?

अगर जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन, गर्माहट या अकड़न बनी रहती है, तो डॉक्टर से जांच करवाएं। अचानक किसी जोड़ में तेज दर्द, बहुत ज्यादा सूजन, लालिमा और बुखार होने पर जल्द चिकित्सा सहायता लें। यह संक्रमण या किसी अन्य गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की जानकारी के लिए है। जड़ी-बूटियां, मिट्टी का लेप और योग आर्थराइटिस का प्रमाणित इलाज नहीं हैं। कोई भी घरेलू उपचार या योग अभ्यास शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। निर्धारित दवाएं अपने आप बंद न करें।

— Satya Report

contact.satyareport@gmail.com

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