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पीएम सूर्य घर योजना: गलत चुना तो डूब जाएंगे ₹78,000… ऑन-ग्रिड या ऑफ-ग्रिड, कौन सा सोलर पैनल लगवाना फायदेमंद?

केंद्र सरकार की ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ को लेकर लोगों में भारी उत्साह है. हर कोई अपनी छत पर सोलर पैनल लगाकर महंगे बिजली बिल से हमेशा के लिए छुटकारा पाना चाहता है. लेकिन, इस योजना का फॉर्म भरने से पहले एक बड़ा तकनीकी पेंच फंसा है. बाजार में ऑनग्रिड तथा ऑफग्रिड, दो तरह के सोलर सिस्टम मौजूद हैं. अगर आपने बिना पूरी जानकारी के गलत पैनल चुन लिया, तो सरकार से मिलने वाली 78,000 रुपये तक की भारीभरकम सब्सिडी आपके हाथ से निकल सकती है. आइए इस पूरे गणित को डिकोड करते हैं .

पीएम सूर्य घर योजना: गलत चुना तो डूब जाएंगे ₹78,000… ऑन-ग्रिड या ऑफ-ग्रिड, कौन सा सोलर पैनल लगवाना फायदेमंद?
पीएम सूर्य घर योजना: गलत चुना तो डूब जाएंगे ₹78,000… ऑन-ग्रिड या ऑफ-ग्रिड, कौन सा सोलर पैनल लगवाना फायदेमंद?

ऑनग्रिड सिस्टम से कैसे होगा बिजली बिल जीरो?

ऑनग्रिड सोलर तकनीक सीधे तौर पर सरकारी बिजली ग्रिड के साथ जुड़कर काम करती है. इसका सबसे बड़ा आर्थिक फायदा यह है कि इसमें महंगी बैटरियों का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं होता. दिन के वक्त जब धूप तेज होती है, तो इन पैनल से बनने वाली बिजली से आपके घर के उपकरण आसानी से चलते हैं.

खपत से ज्यादा बिजली बनने पर यह ‘नेट मीटरिंग’ व्यवस्था के तहत वापस सरकारी ग्रिड में भेज दी जाती है. रात के समय, जब पैनल बिजली नहीं बनाते, तब आप वापस ग्रिड से सप्लाई ले सकते हैं. इस पूरी प्रक्रिया में आपकी अतिरिक्त बिजली सरकार खरीद लेती है, जिससे महीने के अंत में आपका बिल शून्य या माइनस में आ जाता है. सबसे अहम बात, पीएम सूर्य घर योजना के तहत ₹78,000 तक की सब्सिडी सिर्फ इसी सिस्टम को लगवाने पर दी जाती है.

ऑफग्रिड सिस्टम पर क्यों नहीं मिलती सरकारी मदद?

ऑफग्रिड सिस्टम का सरकारी बिजली विभाग के नेटवर्क से कोई सीधा संबंध नहीं होता. यह एक पूरी तरह से स्वतंत्र ढांचा है जो भारीभरकम बैटरियों पर निर्भर करता है. दिन में पैनल बिजली बनाते हैं, जिससे घर भी चलता है तथा बची हुई ऊर्जा से बैटरियां चार्ज होती हैं. रात के वक्त इन्हीं बैटरियों से घर रोशन होता है.

चूंकि इसमें महंगी बैटरियां लगती हैं, इसलिए इसकी शुरुआती लागत ऑनग्रिड के मुकाबले दो से तीन गुना ज्यादा आती है. इसके अलावा हर चारपांच साल में बैटरी बदलने का भारी खर्च भी उपभोक्ता को ही उठाना पड़ता है. यही वजह है कि सरकार इस महंगे सिस्टम पर कोई सब्सिडी नहीं देती. यह ढांचा केवल उन सुदूर पहाड़ी या ग्रामीण इलाकों के लिए मुफीद है, जहां 12 से 15 घंटे का लंबा पावर कट रहता है.

हाइब्रिड मॉडल से मिलेगी पावर कट से परमानेंट मुक्ति

अगर आपके इलाके में बीचबीच में बिजली गुल होती रहती है, लेकिन आप सरकारी सब्सिडी का फायदा भी छोड़ना नहीं चाहते, तो हाइब्रिड सोलर सिस्टम एक बेहतरीन रास्ता है. यह तकनीक ऑनग्रिड तथा ऑफग्रिड का एकदम सटीक मिश्रण है. ग्रिड से कनेक्ट होने के कारण इस पर आपको योजना की पूरी सब्सिडी मिल जाती है. वहीं, पावर बैकअप के लिए इसमें एक छोटी बैटरी भी जोड़ी जा सकती है. हालांकि, यह ढांचा एक सामान्य ऑनग्रिड सेटअप के मुकाबले आपकी जेब पर थोड़ा ज्यादा असर डालता है.

आपके लिए कौन सा विकल्प रहेगा मुनाफे का सौदा?

अगर आप किसी ऐसे शहर या कस्बे में रहते हैं जहां बिजली कटौती न के बराबर होती है, तो आंख बंद करके ऑनग्रिड सिस्टम में पैसा लगाना सबसे समझदारी भरा कदम होगा. इसके तीन सीधे फायदे हैं. पहला, यह सिस्टम काफी सस्ता पड़ता है जिसपर मोटी सब्सिडी मिल जाती है. दूसरा, नेट मीटरिंग से बिल का टेंशन खत्म हो जाता है. तीसरा, बैटरियां न होने के कारण इसमें मेंटेनेंस का कोई झंझट नहीं रहता तथा पैनल 25 साल तक बिना किसी परेशानी के सर्विस देते हैं.

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