
नई दिल्ली: कब्ज आजकल एक आम पाचन संबंधी समस्या बन गई है। कम फाइबर वाला भोजन, पर्याप्त पानी न पीना, शारीरिक गतिविधि की कमी, तनाव और अनियमित दिनचर्या जैसी कई वजहों से मल त्याग में परेशानी हो सकती है। अगर कब्ज लंबे समय तक बनी रहे या बार-बार वापस आए तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कब्ज की समस्या में डाइट में फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करना मददगार हो सकता है। कुछ फल ऐसे हैं जिनमें फाइबर के साथ पानी या प्राकृतिक रूप से मौजूद ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो मल को नरम करने और नियमित मल त्याग में मदद कर सकते हैं।
कब्ज होने की प्रमुख वजहें क्या हैं?
कब्ज का मतलब केवल कई दिनों तक मल त्याग न होना नहीं है। मल का बहुत कठोर होना, मल त्याग के दौरान ज्यादा जोर लगाना या पेट पूरी तरह साफ न होने जैसा महसूस होना भी कब्ज के लक्षण हो सकते हैं।
इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। डाइट में फाइबर की कमी, कम पानी पीना, शारीरिक गतिविधि कम होना, मल को बार-बार रोकना और कुछ दवाओं का सेवन इसके कारणों में शामिल हो सकते हैं। उम्र बढ़ने के साथ कुछ लोगों में आंतों की गति धीमी होने से भी कब्ज की शिकायत बढ़ सकती है।
1. पपीता
पपीता कब्ज की समस्या में खाए जाने वाले लोकप्रिय फलों में शामिल है। इसमें फाइबर और पानी की अच्छी मात्रा होती है, जो पाचन और मल त्याग को सपोर्ट कर सकती है।
पपीते में पपेन (Papain) नामक एंजाइम भी पाया जाता है, जो प्रोटीन के पाचन में भूमिका निभाता है। इसे सामान्य मात्रा में फल के तौर पर डाइट में शामिल किया जा सकता है।
2. आलूबुखारा और प्रून्स
सूखा आलूबुखारा यानी प्रून्स (Prunes) कब्ज में राहत के लिए सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले खाद्य पदार्थों में से एक है। इसमें फाइबर के साथ सॉर्बिटोल नामक प्राकृतिक शुगर अल्कोहल पाया जाता है, जो आंतों में पानी खींचने और मल को नरम करने में मदद कर सकता है।
कुछ लोगों को प्रून्स या प्रून जूस से मल त्याग में आसानी महसूस हो सकती है। हालांकि, अधिक मात्रा लेने पर गैस या दस्त की समस्या हो सकती है। डायबिटीज वाले लोगों को प्रून जूस में मौजूद प्राकृतिक शुगर को भी ध्यान में रखना चाहिए।
3. कीवी
कीवी भी फाइबर से भरपूर फल है और इसे नियमित डाइट में शामिल करने से कुछ लोगों को कब्ज की समस्या में फायदा मिल सकता है। इसमें एक्टिनिडिन (Actinidin) नामक एंजाइम पाया जाता है, जो प्रोटीन के पाचन में भूमिका निभाता है।
कीवी में मौजूद फाइबर आंतों की गतिविधि और मल की बनावट को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। इसे साबुत फल के रूप में खाना जूस की तुलना में बेहतर विकल्प हो सकता है।
4. अंजीर
ताजा और सूखा दोनों तरह का अंजीर फाइबर का अच्छा स्रोत हो सकता है। खासकर सूखे अंजीर में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, इसलिए सीमित मात्रा में इसका सेवन कब्ज से परेशान कुछ लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है।
कई लोग सूखे अंजीर को रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाते हैं। हालांकि, इसे किसी पक्के इलाज के तौर पर नहीं देखना चाहिए। अधिक मात्रा में अंजीर खाने से कुछ लोगों को गैस, पेट फूलने या दस्त की समस्या हो सकती है।
5. नाशपाती
नाशपाती में घुलनशील और अघुलनशील दोनों तरह के फाइबर पाए जाते हैं। फाइबर मल में पानी बनाए रखने और उसके आकार को बढ़ाने में मदद कर सकता है, जिससे मल त्याग आसान हो सकता है।
नाशपाती को अच्छी तरह धोकर छिलके समेत खाना अधिक फाइबर पाने का एक तरीका है। हालांकि, जिन लोगों को किसी फल से एलर्जी या पाचन संबंधी विशेष समस्या है, उन्हें अपनी सहनशीलता के अनुसार इसका सेवन करना चाहिए।
सिर्फ फल खाना ही काफी नहीं
कब्ज से राहत के लिए केवल एक या दो फल खाना पर्याप्त नहीं होता। पूरी जीवनशैली और डाइट पर ध्यान देना जरूरी है।
- दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
- खाने में धीरे-धीरे फाइबर की मात्रा बढ़ाएं।
- रोजाना पैदल चलने या दूसरी नियमित शारीरिक गतिविधि की आदत डालें।
- मल त्याग की इच्छा को बार-बार न रोकें।
- लंबे समय तक बैठे रहने से बचें।
- तनाव को नियंत्रित करने और पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें।
- अगर फाइबर अचानक बहुत ज्यादा बढ़ा दिया जाए तो गैस और ब्लोटिंग हो सकती है, इसलिए इसे धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर कब्ज कई हफ्तों तक बनी रहती है, बार-बार होती है या घरेलू बदलावों के बावजूद ठीक नहीं होती तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। मल में खून आना, बिना वजह वजन कम होना, लगातार या तेज पेट दर्द, उल्टी, पेट बहुत फूलना या अचानक शुरू हुई गंभीर कब्ज जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
खासकर लंबे समय से कब्ज की समस्या होने पर बार-बार खुद से लैक्सेटिव या चूर्ण लेने के बजाय इसके पीछे की वजह जानना ज्यादा जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। किसी फल या घरेलू उपाय को कब्ज का निश्चित इलाज न मानें। यदि कब्ज लंबे समय से बनी हुई है या इसके साथ गंभीर लक्षण हैं, तो योग्य चिकित्सक या गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से सलाह लें।



