DharamIndiaTrending

वैवाहिक जीवन में चाहिए सुख-शांति और स्थिरता? शिव-पार्वती के इस मंदिर में लगा लें अर्जी

 उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर विवाहित और अविवाहित दोनों के लिए बेहद खास माना जाता है. पौराणिक मान्यता है कि यहां पर माता पर्वती और भगवान शिव का विवाह संपन्न हुआ था. इस पौराणिक धार्मिक स्थल को लेकर मान्यता यह भी है कि यहां दर्शन मात्र से दांपत्य जीवन में सुख-शांति और खुशहाली आती है.
Triyuginarayan Temple: वैवाहिक जीवन में चाहिए सुख-शांति और स्थिरता? शिव-पार्वती के इस मंदिर में लगा लें अर्जी

Satya Report:  वैसे तो देश में कई ऐसे प्रचीन और प्रसिद्ध मंदिर हैं, जहां से जुड़ी कुछ मान्यताएं दुनियाभर में प्रचलित हैं. आमतौर पर जब किसी शादीशुदा व्यक्ति के दांपत्य जीवन में परेशानियां आती हैं, तो वह भगवान की शरण में पहुंचता है. कहा भी जाता है कि जहां दवा काम नहीं करती, वहां दुआ और मन्नतें काम आती हैं. देवभूमि उत्तराखंड में मौजूद शिव-पार्वती का मंदिर विवाहित और अविवाहित दोनों के लिए बेहद खास माना गया है. मान्यता है कि इस मंदिर में अर्जी लगाने से शादी में आ रही अड़चने अपने आप दूर हो जाती हैं. इसके अलावा वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और स्थिरता के लिए भी यह मंदिर बेहद प्रसिद्ध है. इस मंदिर को लेकर पौराणिक मान्यता यह है कि त्रेतायुग में यहां पर माता पार्वती और शिव का विवाह संपन्न हुआ था. ऐसे में आइए जानते हैं शिव-पार्वती के इस से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं के बारे में.

यहां हुआ था माता पार्वती और शिव का विवाह

पौराणिक मान्यता है कि सतयुग के बाद जब त्रेतायुग का समय था, तब इसी पवित्र भूमि पर महादेव और पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था. इस विवाह में दिव्य शक्तियों का अद्भुत संगम देखने को मिला था. कहा जाता है कि भगवान विष्णु विवाह की रस्मों को पूर्ण कराने वाले मुख्य संरक्षक के रूप में वहां उपस्थित थे. जबकि, ब्रह्मा जी इस विवाह के मुख्य पुरोहित बने थे. वहीं, अग्नि देव इस विवाह के साक्षी थे और उन्हीं की उपस्थिति में फेरे लिए गए थे. इसी ऐतिहासिक घटना के कारण इस मंदिर को ‘अखंड धूनी मंदिर’ के नाम से भी जाना जाता है.

मंदिर की अखंड ज्योति का क्या है रहस्य

इस मंदिर की सबसे चमत्कारी विशेषता यहां स्थित हवन कुंड है. कहा जाता है कि इस कुंड में जल रही अग्नि वही है, जिसके चारों ओर शिव-पार्वती ने फेरे लिए थे. यह अखंड ज्योति तीन युगों से लगातार जल रही है और इसे कभी बुझने नहीं दिया गया. श्रद्धालु यहां आकर इस कुंड की राख (भस्म) को अपने माथे पर लगाते हैं. इस संबंध में मान्यता है कि यह भस्म वैवाहिक जीवन में आ रही हर प्रकार की बाधाओं को दूर करने में सहायक है.

नवविवाहित जोड़ों के लिए क्यों है खास

आज के दौर में त्रियुगीनारायण मंदिर नवविवाहितों और विवाह करने वाले जोड़ों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गया है. पौराणिक मान्यता है कि यहां दर्शन करने से दांपत्य जीवन में स्थिरता और अपार प्रेम बना रहता है. यही वजह है कि कई जोड़े यहां आकर विवाह की रस्में पूरी करते हैं ताकि उन्हें साक्षात शिव-पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त हो सके. यहां आने वाले भक्त मंदिर की अखंड धूनी में समिधा (लकड़ी) अर्पित करते हैं और सुखमय जीवन की कामना करते हैं. .

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply