Eknath Nimgade Murder Case: नागपुर बहुचर्चित आर्किटेक्ट एकनाथ निमगड़े हत्या प्रकरण में मृतक के पुत्र एवं अधिवक्ता अनुपम एकनाथ निमगड़े ने सीबीआई के खिलाफ अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायाधीश की अदालत में आवेदन दायर कर सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती देते हुए मामले की आगे की जांच कराने की मांग की है।

आवेदन में दावा किया गया है कि जांच अधूरी, एकपक्षीय और बड़े षड्यंत्र को छिपाने वाली है। इस पर न्यायालय ने सीबीआई को नोटिस जारी कर दिया है। आवेदन के अनुसार 6 सितंबर 2016 को हुई निमगड़े की हत्या कोई सामान्य हत्या नहीं, बल्कि करीब 200 करोड़ रुपये के भूमि विवाद से जुड़ी सुनियोजित सुपारी किलिंग थी।
5 करोड़ की सुपारी मामले में अधूरी जांच का आरोप
याचिकाकर्ता का आरोप है कि ने वर्ष 2021 में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हत्या के लिए 5 करोड़ रुपये की सुपारी और 1.20 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि दिए जाने की बात कही थी, लेकिन सीबीआई ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में इन तथ्यों की समुचित जांच नहीं की।
आवेदन में कहा गया है कि सीबीआई ने कथित शूटर मोहसीन अंसारी उर्फ राजा पीओपी और षड्यंत्र की प्लानिंग करने वाले रंजीत सफेलकर तक ही जांच सीमित रखी, जबकि हत्या के पीछे कथित फाइनेंसर, मास्टरमाइंड, लाभार्थियों और आर्थिक स्रोत की जांच नहीं की गई।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि करोड़ों रुपये के कथित लेनदेन, बैंक खातों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, , हथियार की खरीद और हवाला नेटवर्क की गहन जांच नहीं की गई।
संदिग्धों की भूमिका स्पष्ट नहीं
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि धारा 164 सीआरपीसी के तहत दर्ज एक महत्वपूर्ण गवाह के बयान में कथित आरोपियों की भूमिका सामने आने के बावजूद उस दिशा में प्रभावी जांच नहीं हुई। पुलिस द्वारा पहले जिन अन्य संदिग्धों की पहचान किए जाने का दावा किया गया था, उनकी भूमिका भी स्पष्ट नहीं की गई।
न्यायालय से आग्रह किया गया है कि सीबीआई को धारा तहत आगे की जांच का निर्देश दिया जाए। इसमें विशेष रूप से मनी ट्रेल, वित्तीय फॉरेंसिक ऑडिट, डिजिटल एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच, कथित मास्टरमाइंड और अन्य षड्यंत्रकारियों की पहचान और भूमिका की जांच कराने की मांग की गई है। यदि इन पहलुओं की जांच किए बिना मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ती है तो वास्तविक षड्यंत्रकारियों के बच निकलने की आशंका रहेगी।



