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दिवाली​​​ पर मां लक्ष्मी के चरण चिह्न किस दिशा में लगाने चाहिए? जानें सही स्थान, रंग और जरूरी नियम

दिवाली पर मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए घरों में विशेष सजावट की जाती है। इस दिन मुख्य द्वार पर तोरण लगाने, दीपक जलाने और रंगोली बनाने के साथ माता लक्ष्मी के चरण चिह्न लगाने की भी परंपरा है। धार्मिक और वास्तु संबंधी मान्यताओं में इन चरण चिह्नों को देवी के घर में आगमन का प्रतीक माना जाता है।

हालांकि, चरण चिह्न लगाते समय उनकी दिशा और स्थान का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि पैरों का रुख घर के अंदर की ओर होना चाहिए। आइए जानते हैं दिवाली पर मां लक्ष्मी के चरण चिह्न कहां और किस तरह लगाने चाहिए।

घर में प्रवेश करते हुए होने चाहिए चरण चिह्न

वास्तु संबंधी मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी के चरण चिह्न इस तरह लगाने चाहिए, जैसे देवी घर के अंदर प्रवेश कर रही हों। इसलिए चरणों की उंगलियों का रुख घर के भीतर की ओर रखा जाता है।

ऐसा करने के पीछे धार्मिक भावना यह है कि मां लक्ष्मी का घर में स्वागत किया जा रहा है। चरण चिह्न लगाते समय उनकी दिशा का ध्यान रखना चाहिए, ताकि वे बाहर की ओर जाते हुए दिखाई न दें।

मुख्य द्वार पर लगाना माना जाता है शुभ

दिवाली पर मां लक्ष्मी के चरण चिह्न लगाने के लिए मुख्य द्वार को विशेष स्थान माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रवेश द्वार से ही देवी का घर में आगमन होता है। इसलिए कई परिवार दरवाजे की चौखट या उसके आसपास चरण चिह्न लगाते हैं।

अगर आप मुख्य द्वार पर चरण चिह्न लगा रहे हैं, तो ऐसी जगह चुनें जहां वे स्पष्ट दिखाई दें और किसी के पैरों के नीचे न आएं।

पूजा घर या तिजोरी के पास किस दिशा में लगाएं?

कुछ वास्तु मान्यताओं के अनुसार, यदि आप पूजा घर या तिजोरी के पास मां लक्ष्मी के चरण चिह्न लगा रहे हैं, तो उनका रुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है।

इन दिशाओं को पारंपरिक रूप से पूजा और शुभ कार्यों से जोड़ा जाता है। हालांकि, घर की बनावट और उपलब्ध जगह के अनुसार भी स्थान का चुनाव किया जा सकता है।

इन जगहों पर चरण चिह्न लगाने से बचें

धार्मिक मान्यताओं में मां लक्ष्मी के चरण चिह्नों को साफ और सम्मानजनक स्थान पर लगाने की सलाह दी जाती है। इसलिए कुछ जगहों पर इन्हें लगाने से बचना चाहिए।

  • सीधे जमीन पर: ऐसी जगह चरण चिह्न न बनाएं जहां लोगों के पैर पड़ते हों। चौखट या दीवार के उपयुक्त हिस्से पर इन्हें लगाया जा सकता है।
  • बाथरूम और टॉयलेट के पास: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन स्थानों के आसपास चरण चिह्न नहीं लगाने चाहिए।
  • अंधेरे और गंदे कोनों में: ऐसी जगह चुनें जहां पर्याप्त रोशनी हो और सफाई बनी रहती हो।
  • कूड़ेदान और जूते-चप्पलों के पास: चरण चिह्नों के आसपास साफ-सफाई रखें और उन्हें ऐसी वस्तुओं से दूर लगाएं।

चरण चिह्न लगाते समय इन नियमों का रखें ध्यान

1. जोड़े में लगाएं चिह्न: परंपरा के अनुसार, मां लक्ष्मी के चरण चिह्न जोड़े में लगाए जाते हैं। इन्हें इस तरह बनाएं कि देवी के घर में प्रवेश करने का भाव दिखाई दे।

2. स्थान की सफाई करें: चरण चिह्न लगाने से पहले उस जगह को अच्छी तरह साफ कर लें। कुछ परिवार धार्मिक परंपरा के अनुसार गंगाजल का छिड़काव भी करते हैं।

3. शुभ रंगों का चुनाव करें: वास्तु संबंधी मान्यताओं में लाल, गुलाबी और सुनहरे रंग को शुभ माना जाता है। इसलिए इन रंगों से बने चरण चिह्न या सजावटी स्टीकर इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

4. रंगोली से बना रहे हैं तो सजावट करें: यदि आप सिंदूर या रंगोली से चरण चिह्न बना रहे हैं, तो अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार दोनों ओर स्वास्तिक जैसे शुभ प्रतीक भी बना सकते हैं।

5. पुराने स्टीकर को सम्मानपूर्वक हटाएं: यदि पिछले साल लगाए गए स्टीकर बदल रहे हैं, तो उन्हें सावधानी से निकालें। पुराने स्टीकर को कूड़े में फेंकने के बजाय स्थानीय परंपरा के अनुसार सम्मानपूर्वक अलग करें। प्लास्टिक वाले स्टीकर को नदी या जलस्रोत में न बहाएं, क्योंकि इससे प्रदूषण हो सकता है।

चांदी या मिट्टी के चरण चिह्न भी लगा सकते हैं

दिवाली पर मुख्य द्वार की सजावट के लिए चांदी या मिट्टी से बने चरण चिह्न भी इस्तेमाल किए जाते हैं। इनके साथ दरवाजे पर तोरण और आसपास दीपक लगाकर पारंपरिक सजावट पूरी की जा सकती है। ध्यान रखें कि दीपक सुरक्षित स्थान पर रखें और उन्हें ज्वलनशील सजावटी सामान से दूर रखें।

धार्मिक मान्यता है कि घर में मां लक्ष्मी के चरण चिह्न लगाने से सुख-समृद्धि और खुशहाली का आगमन होता है। कुछ लोग इसे आर्थिक परेशानियां दूर होने और परिवार में सुख-शांति बने रहने का प्रतीक भी मानते हैं।

Satya Report Disclaimer: मां लक्ष्मी के चरण चिह्नों की दिशा, रंग और स्थान से जुड़े नियम धार्मिक आस्था और वास्तु की पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इनसे धन प्राप्ति, आर्थिक तंगी दूर होने या परिवार में खुशहाली आने की कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है। इन्हें श्रद्धा और परंपरा के अनुसार अपनाएं।

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