अब आईटी और रिटेल सेक्टर का पावरहाउस चीन नहीं बल्कि भारत है. इस मामले में भारत ने इतिहास रच दिया है. 8 जुलाई को जारी TeamLease Digital की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत रिटेल और FMCG ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के लिए दुनिया का सबसे बड़ा हब बन गया है. यहां 180 GCCs हैं जिनमें लगभग 272,300 प्रोफेशनल्स काम करते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि देश का रिटेल GCC मार्केट अब पोलैंड, फिलीपींस, मैक्सिको, जर्मनी और मिस्र के संयुक्त मार्केट से 34 प्रतिशत बड़ा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाने के मामले में भी भारत अपने साथियों से आगे है. रिटेल GCC वर्कफोर्स में AI का इस्तेमाल 57 प्रतिशत है. यह इसे रिपोर्ट में शामिल अन्य सभी बड़े मार्केट से आगे रखता है, जिसमें जर्मनी भी शामिल है.

कई कंपनियां आ रही भारत
टीमलीज डिजिटल की सीईओ नीति शर्मा ने मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में कहा कि भारत में रिटेल GCC की ग्रोथ की रफ्तार तेज हुई है. सिर्फ अमेरिकी रिटेलर्स ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में यूरोपीय कंपनियां भी भारत आ रही हैं. हमें जापानी और दक्षिण कोरियाई रिटेलर्स से भी अच्छी मांग देखने को मिल रही है. शर्मा ने कहा कि भारत का आकर्षण सिर्फ कुशल टैलेंट की बड़ी संख्या तक ही सीमित नहीं है. बिजनेसफ्रेंडली पॉलिसी, टैक्स इंसेंटिव, इंफ्रास्ट्रक्चर की कम कॉस्ट और सरकारी सपोर्ट ने भी मल्टीनेशनल कंपनियों को देश में अपना कामकाज शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया है.
भारत में कम नहीं जीसीसी सेंटर्स
भारत में मौजूद 180 रिटेल और FMCG GCCs में से लगभग 130 नैनो GCCs हैं, जिनमें आमतौर पर हर एक में 200250 लोग काम करते हैं. ये सेंटर बेंगलुरु, मुंबई, नेशनल कैपिटल रीजन, पुणे और हैदराबाद के साथसाथ मंगलुरु जैसे टियरII और टियरIII शहरों में भी फैले हुए हैं. नए GCCs के आने के साथसाथ, उम्मीद है कि अगले कुछ वर्षों में मौजूदा नैनो सेंटर्स में से लगभग 6070 प्रतिशत अपनी वर्कफोर्स और कामकाज का विस्तार करेंगे. भारत में काम करने वाले प्रमुख रिटेल और FMCG GCCs में Lowes, Tesco, H&M, Walmart Global Tech, Target, LOréal और AB InBev शामिल हैं.
भारत का रिटेल GCC टैलेंट पूल
जैसेजैसे रिटेल GCCs का विस्तार हो रहा है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग स्किल्स वाले प्रोफेशनल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है. AI को तेजी से अपनाने के बावजूद, भारत में अभी अपने 180 रिटेल GCCs में आठ साल से अधिक AI एक्सपीरियंस वाले केवल लगभग 320 प्रोफेशनल्स हैं. इसका मतलब है कि औसतन हर सेंटर में दो से भी कम सीनियर AI स्पेशलिस्ट हैं. रिटेल GCC AI टैलेंट पूल में बेंगलुरु की हिस्सेदारी 54 फीसदी है और यह एडवांस्ड ग्लोबल प्रोजेक्ट्स का कोर सेंटर बना हुआ है. AI टैलेंट के लिए हैदराबाद सबसे मजबूत सेकेंडरी हब के तौर पर उभर रहा है, जबकि पुणे एक सहयोगी इंजीनियरिंग सेंटर के रूप में विकसित हो रहा है.
एक साल में 52 हजार जॉब्स
रिपोर्ट के अनुसार, 2024 और 2025 के बीच रिटेल GCCs में हायरिंग की मांग लगभग दोगुनी हो गई, जिससे पिछले साल 52,000 से ज़्यादा नौकरी के अवसर पैदा हुए. फिलहाल टेक्नोलॉजी, कस्टमर सक्सेस और सप्लाई चेन जैसे काम रिटेल GCC वर्कफोर्स का लगभग 60% हिस्सा हैं. उम्मीद है कि 2028 तक ये मिलकर हायरिंग की 80 फीसदी से ज्यादा मांग पैदा करेंगे. अकेले टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग भूमिकाओं की मांग 2025 में लगभग 25,100 पदों से बढ़कर 2028 तक 41,000 होने का अनुमान है.
कितनी मिल रही सैलरी
शर्मा ने कहा कि कोर AI और टेक्नोलॉजी स्किल्स वाले प्रोफेशनल्स को ऐसी सैलरी मिल रही है जो इसी तरह की पारंपरिक भूमिकाओं की तुलना में 5060 फीसदी ज्यादा है. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल रिटेल GCCs द्वारा हायर किए गए 28,500 प्रोफेशनल्स में से 90 फीसदी से ज्यादा इंडस्ट्री के बाहर से आए थे. इनमें IT सर्विस फर्मों का योगदान 17.5 फीसदी रहा, इसके बाद प्रोडक्ट कंपनियों का 14 फीसदी और कंसल्टिंग फर्मों का 10.5 फीसदी योगदान रहा. इस कमी के कारण सैलरी में भी काफी बढ़ोतरी हुई है. तीन से छह साल के एक्सपीरियंस वाले AI और मशीन लर्निंग प्रोफेशनल्स की मीडियन सैलरी 46 लाख रुपए है—जो मार्केट मीडियन से लगभग दोगुनी है—जबकि छह से दस साल के एक्सपीरियंस वालों की मीडियन सैलरी 68 लाख रुपए है. रिपोर्ट में कहा गया है कि 15 साल से ज्यादा के एक्सपीरियंस और AI व रिटेल डोमेन स्किल्स में महारत रखने वाले सीनियर प्रोफेशनल्स सालाना 1.2 करोड़ रुपए ज्यादा कमा सकते हैं.



