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ऊर्जा में भारत बनेगा आत्मनिर्भर, रिलायंस की बैटरी फैक्ट्री का काम अंतिम चरण में

भारत के कॉरपोरेट जगत में जब भी कोई बड़ा बदलाव होता है, तो उसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज का नाम सबसे आगे रहता है. टेलीकॉम और रिटेल सेक्टर में अपनी बादशाहत कायम करने के बाद, अब रिलायंस की नजर क्लीन एनर्जी के बाजार पर है. कंपनी की हालिया वार्षिक रिपोर्ट इस बात की साफ गवाही दे रही है कि आने वाले समय में रिलायंस का सबसे बड़ा दांव ग्रीन एनर्जी, बैटरी मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन हाइड्रोजन और बड़े रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स पर होने वाला है. इस पूरे मास्टरप्लान में सबसे अहम खबर यह है कि रिलायंस की बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम गीगा फैक्ट्री का काम अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है, जो सीधे तौर पर देश में ऊर्जा के इस्तेमाल का तरीका बदलने वाली है.

ऊर्जा में भारत बनेगा आत्मनिर्भर, रिलायंस की बैटरी फैक्ट्री का काम अंतिम चरण में
ऊर्जा में भारत बनेगा आत्मनिर्भर, रिलायंस की बैटरी फैक्ट्री का काम अंतिम चरण में

जामनगर बनेगा देश का सबसे बड़ा पावर हाउस

रिलायंस के जामनगर स्थित विशाल ग्रीन एनर्जी कॉम्प्लेक्स में काम काफी तेजी से चल रहा है. इस इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम के तहत बैटरी प्रोजेक्ट का निर्माण जल्द ही पूरा होने वाला है. योजना के मुताबिक, साल 2026 की दूसरी छमाही से लिथियम आयरन फॉस्फेट आधारित बैटरियों का उत्पादन बाजार में बड़े स्तर पर शुरू हो जाएगा. शुरुआत में इस फैक्ट्री की क्षमता 40 गीगावॉट आवर रखी जाएगी, जिसे भविष्य की बढ़ती मांग को देखते हुए 100 GWh तक ले जाने का लक्ष्य है. सोलर पैनल से लेकर नए ग्रीन फ्यूल तक, सब कुछ इसी महाप्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिससे ऊर्जा के मामले में भारत की विदेशी निर्भरता कम होगी.

ग्रीन फ्यूल के बाजार पर रिलायंस की नजर

भविष्य में कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन बेहद जरूरी है. रिलायंस ने इस दिशा में एक स्पष्ट टाइमलाइन तय कर दी है. कंपनी का लक्ष्य है कि साल 2032 तक वह हर साल 30 लाख मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करे. इसके अलावा, दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग C&T के साथ 15 साल का एक बड़ा करार भी हो चुका है. इसके तहत वित्त वर्ष 2029 की दूसरी छमाही से ग्रीन अमोनिया की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी. यह किसी भी भारतीय कंपनी द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा लॉन्गटर्म सप्लाई एग्रीमेंट है. इसका सीधा इस्तेमाल रिफाइनिंग, फर्टिलाइजर, शिपिंग और भारी उद्योगों में भविष्य के ईंधन के तौर पर किया जाएगा.

कच्छ के प्रोजेक्ट से मिलेगी सस्ती बिजली

बिना बड़े स्तर पर बिजली उत्पादन के इस पूरे क्लीन एनर्जी सपने को साकार करना मुमकिन नहीं है. इसके लिए गुजरात के कच्छ में 5.5 लाख एकड़ में एक बेहद विशाल रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट तैयार हो रहा है. उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 तक यहां से बिजली उत्पादन शुरू हो जाएगा. बड़े स्तर पर मिलने वाली यह सस्ती और रिन्यूएबल बिजली, ग्रीन हाइड्रोजन बनाने की लागत को काफी हद तक कम कर देगी. इसके अलावा, अपने सोलर मैन्युफैक्चरिंग कारोबार को भी रिलायंस 10 GWp से बढ़ाकर 20 GWp सालाना करने जा रही है. साथ ही आंध्र प्रदेश में 6 GWp का एक नया सोलर पावर प्रोजेक्ट भी तैयार किया जा रहा है.

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