Satya Report: देश की जानीमानी इलेक्ट्रिक व्हीकल बनाने वाली कंपनियों के अनुसार USइजरायलईरान वॉर के बीच फ्यूल की उपलब्धता और कीमतों में उतारचढ़ाव की चिंताओं के चलते, भारतीय कार खरीदार अब इलेक्ट्रिक व्हीकल को ज्यादा पसंद कर रहे हैं. फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन द्वारा सरकार के ‘व्हीकल’ पोर्टल से जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले महीने नई कारों की बिक्री में EV की हिस्सेदारी फरवरी के 3.5 फीसदी से बढ़कर 5.1 फीसदी हो गई. टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर शैलेश चंद्र ने कहा कि कस्टमर्स को लग रहा है कि फ्यूल की उपलब्धता और कीमतें एक मुद्दा बन सकती हैं. उन्होंने पिछले महीने कंपनी में इलेक्ट्रिक कारों की मांग में हुई 2030 फीसदी की बढ़ोतरी का श्रेय पश्चिम एशिया संकट को लेकर ग्राहकों की चिंताओं को दिया.

कितना आया उछाल?
JSW MG Motor India के मैनेजिंग डायरेक्टर अनुराग मेहरोत्रा ने भी इस बात से सहमति जताई. मेहरोत्रा ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि पिछले कुछ महीनों में, हमने देखा है कि ज्यादा कस्टमर ग्राहक शोरूम में आते समय इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को अपनी पहली पसंद के तौर पर देख रहे हैं. साथ ही, जो लोग अभी तक दुविधा में थे, वे भी अब तेजी से इलेक्ट्रिक प्रोडक्ट्स की ओर बढ़ रहे हैं. इसका सबसे बड़ा कारण फ्यूल की कीमतों में होने वाले उतारचढ़ाव से सुरक्षा चाहते हैं. JSW MG ने मार्च में ग्राहकों की दिलचस्पी में 26 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की, जबकि जनवरीफरवरी का औसत इससे कम था.
रजिस्ट्रेशन में 68 फीसदी का उछाल
उद्योग के अधिकारियों ने बताया कि भले ही भारत ने अभी तक फ्यूल की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं, लेकिन ग्राहकों को मौजूदा राज्य चुनावों के बाद कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है. इसी वजह से इलेक्ट्रिक वाहनों की पूछताछ और बिक्री में तेजी से उछाल आया है. ‘वाहन’ के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में लोकल मार्केट में इलेक्ट्रिक कारों का रजिस्ट्रेशन पिछले साल के मुकाबले 68 फीसदी बढ़कर 22,490 यूनिट हो गया. ग्राहकों की पसंद में यह बदलाव ऐसे समय में आया है, जब US और इजरायल के ईरान पर हमलों के कारण ग्लोबल बाजारों में तेल और गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं. इस युद्ध की वजह से ‘होर्मुज स्ट्रेट’ से होने वाले तेल निर्यात में भारी रुकावट आई है. इस स्ट्रेट से आमतौर पर दुनिया के कुल तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है.
बड़ी कंपनियों की प्लानिंग
पश्चिम एशियाई देशों में ऊर्जा के बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचने की भी खबरें आई हैं. उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि ऊर्जा की सप्लाई को पूरी तरह से बहाल होने में कई साल लग सकते हैं. भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है, इसका असर काफी बड़ा हो सकता है. मेहरोत्रा ने कहा कि इलेक्ट्रिक गाड़ी चुनना अब ग्राहकों को एक जिम्मेदार और आर्थिक रूप से समझदारी भरा फैसला लगने लगा है.
मेहरोत्रा ने ईटी की रिपोर्ट में कि JSW MG Motor अपनी न्यू एनर्जी गाड़ियों के पोर्टफोलियो को मजबूत करने, प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाने, लोकलाइजेशन को बढ़ावा देने और चार्जिंग इकोसिस्टम को विकसित करने की योजना बना रही है, ताकि इस सेक्टर की छिपी हुई संभावनाओं का पूरा फायदा उठाया जा सके. ग्लोबल लेवल पर, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण यूरोप और अमेरिका जैसे बाजारों में भी इलेक्ट्रिक गाड़ियों की डिमांड में तेजी देखी जा रही है. शैलेश चंद्र, जो Tata Passenger Electric Mobility के प्रमुख भी हैं, ने बताया कि इन बाजारों में लोग पहले से ही पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के असर से जूझ रहे हैं.



