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भारत​​​ का अनोखा द्वीप समूह अंडमान-निकोबार, जहां आज भी मौजूद है दुनिया से कटी जनजातियां और सक्रिय ज्वालामुखी; जानिए 15 रोचक तथ्य

भारत में कई ऐसी जगहें हैं, जिनकी प्राकृतिक सुंदरता और अनोखी विशेषताएं लोगों को हैरान कर देती हैं। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह भी ऐसी ही एक जगह है। बंगाल की खाड़ी में स्थित यह द्वीप समूह खूबसूरत समुद्र तटों, घने जंगलों, दुर्लभ समुद्री जीवों और ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है।

लेकिन इसकी पहचान सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है। यहां ऐसी जनजातियां भी रहती हैं, जिन्होंने सदियों से अपनी अलग जीवनशैली और परंपराओं को बनाए रखा है। इनमें कुछ समुदाय बाहरी दुनिया से बेहद सीमित संपर्क रखते हैं। इसके अलावा यहां भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी भी मौजूद है।

आइए जानते हैं अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से जुड़े 15 रोचक तथ्य।

अंडमान-निकोबार से जुड़े 15 हैरान करने वाले तथ्य

1. यहां मौजूद हैं सैकड़ों छोटे-बड़े द्वीप

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में कुल 572 द्वीप, टापू और चट्टानी संरचनाएं शामिल मानी जाती हैं। इनमें से केवल कुछ द्वीपों पर ही स्थायी आबादी रहती है। बाकी द्वीपों में कई जगह घने जंगल, समुद्री तट और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र मौजूद हैं।

2. यहां रहती हैं दुनिया से अलग जीवन जीने वाली जनजातियां

अंडमान-निकोबार की सबसे खास बात यहां रहने वाले मूल निवासी समुदाय हैं। इनमें ग्रेट अंडमानी, ओंगे, जारवा, सेंटिनली और निकोबारी जैसे समुदाय शामिल हैं। इनकी अपनी भाषाएं, परंपराएं और जीवनशैली हैं। कुछ जनजातियां बाहरी लोगों से संपर्क नहीं रखना चाहतीं और उनकी निजता का सम्मान करना बेहद जरूरी है।

3. जारवा जनजाति का जीवन आज भी अनोखा है

जारवा जनजाति मुख्य रूप से दक्षिण और मध्य अंडमान के जंगलों में रहती है। उनका जीवन लंबे समय तक बाहरी दुनिया से काफी हद तक अलग रहा है। वे जंगलों से मिलने वाले संसाधनों पर निर्भर पारंपरिक जीवनशैली अपनाते रहे हैं।

जारवा समुदाय को खतरनाक कहकर पहचानना सही नहीं है। बाहरी लोगों का अनधिकृत संपर्क उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है। इसलिए उनके संरक्षित क्षेत्रों में प्रवेश और संपर्क पर सख्त नियम लागू हैं।

4. सेंटिनली जनजाति बाहरी दुनिया से नहीं रखना चाहती संपर्क

नॉर्थ सेंटिनल द्वीप पर रहने वाली सेंटिनली जनजाति दुनिया के सबसे अलग-थलग समुदायों में गिनी जाती है। यह जनजाति बाहरी लोगों से संपर्क स्वीकार नहीं करती। भारत सरकार ने इस द्वीप और इसके आसपास के समुद्री क्षेत्र में प्रवेश प्रतिबंधित किया हुआ है।

इसका उद्देश्य जनजाति को बाहरी संक्रमण से बचाना और उनके पारंपरिक जीवन तथा अधिकारों की रक्षा करना है।

5. यहां समुद्री कछुओं की कई दुर्लभ प्रजातियां मिलती हैं

अंडमान-निकोबार के समुद्री तट समुद्री कछुओं के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास हैं। यहां लेदरबैक, हॉक्‍सबिल, ग्रीन और ऑलिव रिडले जैसी प्रजातियां पाई जाती हैं। खासतौर पर निकोबार क्षेत्र लेदरबैक कछुओं के प्रजनन स्थलों के लिए जाना जाता है।

6. यहां मिलता है दुनिया का सबसे बड़ा स्थलीय केकड़ा

अंडमान-निकोबार के जंगलों में विशाल नारियल केकड़ा पाया जाता है। इसे अंग्रेजी में कोकोनट क्रैब कहा जाता है। यह दुनिया का सबसे बड़ा स्थलीय आर्थ्रोपोड माना जाता है।

इसकी खासियत है कि यह पेड़ों पर चढ़ सकता है और अपने मजबूत पंजों से नारियल का खोल तोड़ने में सक्षम होता है। इसका आकार देखकर पहली बार में किसी को भी हैरानी हो सकती है।

7. यहां कई भाषाएं बोली जाती हैं

अंडमान-निकोबार में अलग-अलग राज्यों और समुदायों से आए लोग रहते हैं। इसलिए यहां बंगाली, हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम और निकोबारी सहित कई भाषाएं बोली जाती हैं। स्थानीय जनजातियों की अपनी पारंपरिक भाषाएं भी हैं।

8. यहां कई धर्मों और संस्कृतियों का संगम देखने को मिलता है

अंडमान-निकोबार की आबादी में हिंदू, ईसाई, मुस्लिम और अन्य धार्मिक समुदायों के लोग शामिल हैं। अलग-अलग राज्यों से आकर बसे लोगों के कारण यहां भारतीय संस्कृति की विविधता दिखाई देती है। हालांकि, धार्मिक आबादी का सटीक प्रतिशत समय के साथ बदल सकता है।

9. भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी यहीं मौजूद है

अंडमान सागर में स्थित बैरन द्वीप भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है। यह पोर्ट ब्लेयर से समुद्र के रास्ते काफी दूरी पर स्थित है। इस ज्वालामुखी में समय-समय पर गतिविधियां दर्ज की गई हैं।

बैरन द्वीप का नाम भी इसकी प्रकृति के अनुरूप है। यह निर्जन द्वीप है और यहां आम लोगों का सामान्य रूप से जाना संभव नहीं है। इसे दूर से देखने के लिए भी निर्धारित नियमों और सुरक्षा निर्देशों का पालन करना जरूरी है।

10. 20 रुपये के नोट पर दिखता है अंडमान का प्राकृतिक नजारा

भारतीय 20 रुपये के नए नोट के पीछे की तरफ एलोरा की गुफाओं का चित्र नहीं, बल्कि एलोरा गुफाओं की तस्वीर होती है। वहीं पुराने 20 रुपये के नोट पर अंडमान-निकोबार से जुड़ा प्राकृतिक दृश्य दिखाई देता था। इसलिए पुराने नोटों को देखने पर इस द्वीप समूह की याद ताजा हो सकती है।

11. यहां समुद्री जीवों और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए नियम हैं

अंडमान-निकोबार का समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र बेहद संवेदनशील है। यहां प्रवाल भित्तियां, समुद्री कछुए, डुगोंग और कई दुर्लभ जीव पाए जाते हैं। इसलिए मछली पकड़ने, समुद्री संसाधनों के इस्तेमाल और संरक्षित क्षेत्रों में गतिविधियों को लेकर अलग-अलग नियम लागू हैं। हर जगह मछली पकड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन निर्धारित नियमों का पालन करना जरूरी है।

12. डुगोंग है यहां का राजकीय पशु

डुगोंग एक शाकाहारी समुद्री स्तनधारी जीव है, जिसे समुद्री गाय भी कहा जाता है। यह समुद्र में उगने वाली घास खाता है और आमतौर पर शांत स्वभाव का होता है। अंडमान-निकोबार में डुगोंग को राजकीय पशु का दर्जा दिया गया है।

13. सेल्युलर जेल का इतिहास आज भी रोंगटे खड़े कर देता है

अंडमान की राजधानी पोर्ट ब्लेयर में स्थित सेल्युलर जेल भारत के स्वतंत्रता संग्राम की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर है। ब्रिटिश शासन के दौरान यहां कई स्वतंत्रता सेनानियों को कैद करके रखा गया था।

इस जेल को काला पानी के नाम से भी जाना जाता है। यहां कैदियों को कठिन परिस्थितियों में रखा जाता था। आज यह राष्ट्रीय स्मारक है और देश के स्वतंत्रता संग्राम की याद दिलाता है।

14. यहां के जंगल और समुद्री जैव विविधता बेहद खास हैं

अंडमान-निकोबार का बड़ा हिस्सा जंगलों से घिरा हुआ है। यहां सदाबहार वन, मैंग्रोव, समुद्री घास के मैदान और प्रवाल भित्तियां पाई जाती हैं। इन प्राकृतिक क्षेत्रों में कई दुर्लभ पेड़-पौधे और जीव-जंतु रहते हैं।

यही वजह है कि यह द्वीप समूह पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

15. यहां घूमने के लिए कुछ जगहों पर विशेष अनुमति जरूरी है

अंडमान-निकोबार के सभी द्वीप पर्यटकों के लिए खुले नहीं हैं। कुछ जनजातीय संरक्षित क्षेत्रों और प्रतिबंधित द्वीपों में प्रवेश पूरी तरह निषिद्ध है, जबकि कुछ अन्य क्षेत्रों में विशेष अनुमति की जरूरत पड़ सकती है।

नॉर्थ सेंटिनल द्वीप इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां बाहरी लोगों का जाना प्रतिबंधित है। पर्यटकों को केवल निर्धारित पर्यटन स्थलों पर ही जाना चाहिए और स्थानीय प्रशासन के नियमों का पालन करना चाहिए।

आखिर क्यों खास है अंडमान-निकोबार?

अंडमान-निकोबार द्वीप समूह भारत की उन जगहों में शामिल है, जहां प्रकृति, इतिहास और अनोखी सांस्कृतिक विरासत एक साथ देखने को मिलती है। एक तरफ यहां नीले समुद्र और खूबसूरत समुद्र तट हैं, तो दूसरी तरफ घने जंगल, दुर्लभ जीव और दुनिया से अलग जीवन जीने वाले मूल निवासी समुदाय भी हैं।

यह जगह जितनी खूबसूरत है, उतनी ही संवेदनशील भी है। यहां की जनजातियों, जंगलों और समुद्री जीवन की रक्षा करना बेहद जरूरी है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य जागरूकता और उपलब्ध ऐतिहासिक एवं भौगोलिक विवरणों पर आधारित है। जनजातीय क्षेत्रों और प्रतिबंधित द्वीपों से जुड़े नियमों का पालन करना आवश्यक है।

— Satya Report

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