
पानीपत, हरियाणा: सर्दियों का मौसम करीब आने के बावजूद देश के प्रमुख कंबल उत्पादन केंद्र पानीपत में कारोबार की रफ्तार धीमी पड़ गई है। घरेलू बाजार में मांग घटने, कच्चे माल की कीमतें बढ़ने और भुगतान में देरी ने निर्माताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, कंबलों की घरेलू मांग में करीब 50 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि उत्पादन भी 30 से 35 प्रतिशत तक कम हो गया है। हालात ऐसे हैं कि कई फैक्ट्रियां अपनी कुल क्षमता के लगभग एक-तिहाई पर काम कर रही हैं।
पॉलिएस्टर धागा महंगा होने से बढ़ी उत्पादन लागत
पानीपत के कंबल उद्योग पर कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर पड़ रहा है। उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार, पिछले साल पॉलिएस्टर धागा करीब 100 से 105 रुपये प्रति किलो मिल रहा था, जिसकी कीमत अब बढ़कर लगभग 155 रुपये प्रति किलो हो गई है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को भी इसकी वजहों में गिना जा रहा है।
धागे की कीमत बढ़ने से कंबल बनाने की लागत बढ़ गई है। इसका असर तैयार उत्पादों की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। सामान्य मिंक कंबलों के भाव करीब 210 से 240 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। कीमतें बढ़ने और बाजार में खरीदारी कमजोर रहने से बिक्री प्रभावित हो रही है।
गोदामों में जमा हो रहा तैयार माल
पानीपत में कंबल बनाने वाली करीब 160 विनिर्माण इकाइयां होने की जानकारी दी गई है। उद्योग प्रतिनिधियों के मुताबिक, यह केंद्र देश की घरेलू कंबल मांग का बड़ा हिस्सा पूरा करता है। इसके बावजूद इस सीजन में निर्माताओं को बिक्री के मोर्चे पर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि विदेशी बाजारों में सुस्ती के साथ घरेलू खरीदारी भी कमजोर हुई है। शादी-विवाह और त्योहारों के दौरान अपेक्षित बिक्री नहीं होने, मौसम की परिस्थितियों और थोक विक्रेताओं की सतर्कता ने कारोबार को प्रभावित किया है। तैयार कंबलों की बिक्री धीमी होने से गोदामों में माल जमा हो रहा है और उत्पादन घटाना पड़ रहा है।
भुगतान में देरी से नकदी का संकट
कंबल निर्माताओं के सामने केवल मांग और लागत की समस्या नहीं है, बल्कि बाजार से भुगतान मिलने में देरी भी चिंता बढ़ा रही है। पानीपत पोलर ब्लैंकेट एसोसिएशन के सचिव राम प्रताप गुप्ता के मुताबिक, पहले व्यापारियों को भुगतान लगभग 35 से 40 दिनों में मिल जाता था, लेकिन अब इसमें करीब दो महीने लग रहे हैं।
भुगतान देर से मिलने के कारण कारोबार में नकदी का प्रवाह प्रभावित हो रहा है। ऐसे में कच्चा माल खरीदने, मजदूरी देने और उत्पादन जारी रखने के लिए पूंजी जुटाना मुश्किल हो सकता है।
आगे कारोबार की राह कैसी होगी?
उद्योग प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि बाजार में मांग नहीं बढ़ी और कच्चे माल की कीमतें स्थिर नहीं हुईं, तो चालू सीजन में निर्माताओं की परेशानियां और बढ़ सकती हैं। कारोबार को गति देने के लिए बिक्री में सुधार, समय पर भुगतान और उत्पादन लागत पर नियंत्रण अहम होगा।
फिलहाल पानीपत का कंबल उद्योग इस उम्मीद में है कि सर्दियों के दौरान खरीदारी बढ़ेगी और गोदामों में जमा माल निकल सकेगा। हालांकि, बाजार की वास्तविक स्थिति आने वाले समय में मांग और बिक्री के आंकड़ों से ही स्पष्ट होगी।
सत्य रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट और उद्योग प्रतिनिधियों के बयानों पर आधारित है। कारोबार से जुड़े आंकड़े संबंधित रिपोर्ट में दी गई जानकारी के अनुसार हैं।



