
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के बदौसा थाना परिसर में 10 जून को हुई 19 वर्षीय शिवानी की हत्या ने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने थाना परिसर में घटना का सीन रिक्रिएशन कराया, जिसमें वारदात से ठीक पहले के घटनाक्रम की तस्वीर साफ हुई।
जांच के अनुसार, हत्या से पहले आरोपी पिता सत्यकुमार ने अपनी बेटी शिवानी के पैर छुए और उससे पति ललित के साथ संबंध तोड़ने की गुहार लगाई। वहीं शिवानी हाथ जोड़कर अपने पति के साथ रहने की जिद पर अड़ी रही। यह पूरा घटनाक्रम पुलिसकर्मियों के सामने हुआ। कुछ ही क्षण बाद पुलिसकर्मी थोड़ी दूरी पर चले गए और लगभग 20 सेकंड के भीतर सत्यकुमार ने छिपाकर लाए चाकू से शिवानी पर ताबड़तोड़ पांच वार कर दिए। गंभीर रूप से घायल शिवानी की मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस के मुताबिक, शिवानी ने पड़ोसी ललित से प्रेम विवाह किया था। उसे मध्य प्रदेश से बरामद कर थाने लाया गया था, जहां परिजनों से बातचीत कराई जा रही थी। इसी दौरान आरोपी पिता ने वारदात को अंजाम दिया।
मृतका की मां रन्नो की शिकायत पर आरोपी पिता के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने घटना की विभागीय जांच कराई, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही सामने आई।
जांच रिपोर्ट के आधार पर बदौसा थानाध्यक्ष अजीत प्रताप सिंह, दिवस अधिकारी उपनिरीक्षक सुरेंद्र मिश्रा और महिला आरक्षी राखी को लाइन हाजिर कर दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया कि युवती की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए और ड्यूटी के दौरान अपेक्षित सतर्कता नहीं बरती गई।
घटना के बाद मामले की विवेचना बदौसा थाने से हटाकर फतेहगंज थाना प्रभारी राजेश वर्मा को सौंप दी गई है। वहीं, मृतका के पति ललित और उसके परिवार की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सुरक्षा कारणों से परिवार ने अपना घर छोड़ दिया है और पुलिस की निगरानी में रह रहा है।
इस घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि थाने में प्रवेश करने वाले लोगों की नियमानुसार तलाशी ली जाती, तो आरोपी चाकू भीतर नहीं ले जा पाता और संभवतः यह दर्दनाक घटना टाली जा सकती थी।



