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‘डिलीवरी को 8 महीने हो गए, अब पति को मुझमें दिलचस्पी नहीं’, महिला की शिकायत पर डॉक्टर ने पति को समझाई ये बात;

‘डिलीवरी को 8 महीने हो गए, अब पति को मुझमें दिलचस्पी नहीं’, महिला की शिकायत पर डॉक्टर ने पति को समझाई ये बात;

डिलीवरी के बाद महिला के शरीर और दिनचर्या में कई बदलाव आते हैं। बच्चे की देखभाल, घर की जिम्मेदारियां और शारीरिक बदलावों के बीच कई महिलाएं खुद के लिए समय नहीं निकाल पातीं। ऐसे ही एक मामले में एक महिला ने डॉक्टर से शिकायत की कि बच्चे के जन्म के करीब 8 महीने बाद उसे महसूस हो रहा है कि उसके पति की उसमें पहले जैसी दिलचस्पी नहीं रही।

महिला बोली- पति को अब मुझमें दिलचस्पी नहीं

कपल कंसल्टेशन के दौरान महिला ने गाइनेकोलॉजिस्ट डॉ. प्रज्ञा तोमर से अपनी परेशानी साझा की। महिला ने बताया कि उसकी डिलीवरी को 8 महीने हो चुके हैं और उसे लगता है कि पति अब उसकी तरफ पहले जैसा ध्यान नहीं देते।

महिला की बात सुनने के बाद पति ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उसने कहा कि दिनभर घर और बच्चे की जिम्मेदारियों के कारण पत्नी थकी रहती है और उसे पास जाने का मन नहीं करता।

डॉक्टर ने पति से पूछा- क्या पत्नी की कोई जिम्मेदारी नहीं?

डॉक्टर ने पति की बात सुनने के बाद उससे उसकी नौकरी और रोजमर्रा की जिम्मेदारियों के बारे में पूछा। इसके बाद उन्होंने समझाया कि बच्चे को जन्म देने के बाद महिला से यह उम्मीद करना कि वह घर का हर काम भी करे और हर समय पहले जैसी दिखे, व्यावहारिक नहीं है।

डॉक्टर के मुताबिक, डिलीवरी के बाद महिला को खुद को संभालने, आराम करने और बच्चे की देखभाल करने के लिए समय की जरूरत होती है। ऐसे समय में पति का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

घर के काम में पत्नी का हाथ बंटाएं

डॉक्टर ने सलाह दी कि अगर घर की जिम्मेदारियों के कारण पत्नी खुद पर ध्यान नहीं दे पा रही है, तो पति को उसका हाथ बंटाना चाहिए। जरूरत हो तो घर के बेसिक कामों के लिए हेल्पर की मदद ली जा सकती है।

खाना बनाने, बच्चे की देखभाल और घर के दूसरे कामों में पति थोड़ा सहयोग करे तो महिला को आराम और अपने लिए समय मिल सकता है।

बच्चे की जिम्मेदारी सिर्फ मां की नहीं

डॉक्टर ने यह भी समझाया कि बच्चा होने के बाद उसकी जिम्मेदारी केवल मां की नहीं होती। पिता की भी उतनी ही जिम्मेदारी होती है। बच्चे की देखभाल में पति की भागीदारी महिला का शारीरिक और मानसिक बोझ कम करने में मदद कर सकती है।

डिलीवरी के बाद महिला को अपने शरीर में कई तरह के बदलावों का सामना करना पड़ता है। हार्मोनल बदलाव, नींद की कमी, बच्चे की देखभाल और घर के कामों के कारण थकान होना सामान्य हो सकता है।

पत्नी की तुलना उसके पुराने रूप से न करें

डिलीवरी के बाद महिला का शरीर पहले जैसा दिखे, यह जरूरी नहीं है। वजन, शरीर का आकार, त्वचा, बाल और ऊर्जा के स्तर में बदलाव हो सकते हैं। ऐसे समय में पार्टनर की ओर से आलोचना के बजाय समझ और सहयोग रिश्ते के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।

पति-पत्नी के रिश्ते में आकर्षण अपनी जगह महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन मुश्किल दौर में एक-दूसरे का साथ देना भी उतना ही जरूरी है। खासकर बच्चे के जन्म के बाद दोनों को मिलकर जिम्मेदारियां संभालनी चाहिए।

रिश्ते में सहयोग से बढ़ती है नजदीकी

अगर डिलीवरी के बाद पत्नी पहले जैसी नहीं दिख रही है या वह हमेशा थकी हुई रहती है, तो उसे आलोचना करने के बजाय यह समझना जरूरी है कि उसकी दिनचर्या कितनी बदल चुकी है।

पति अगर बच्चे और घर की जिम्मेदारियों में पत्नी का साथ दे, उसे आराम का समय दे और भावनात्मक रूप से उसके साथ खड़ा रहे, तो इससे न सिर्फ महिला को राहत मिल सकती है बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते में भी आपसी समझ और नजदीकी बढ़ सकती है।

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